आर्थिक मंदी का दौर है. नौकरियां जहाज पकड़ के दूसरे देश जा चुकी हैं. लोग हिन्दू-मुस्लिम का नारा लगाके एक-दूसरे को मार दे रहे हैं. चारों-तरफ हाहाकार मची है. ये देश को किस की नज़र लगी है? आखिर कौन देश को बर्बाद करना चाहता है?

वो लोग जो पूछ रहे थे कि मुसीबत की इस घड़ी में प्रधानमंत्री कहां हैं, उनके लिए जवाब आ गया है. हमारे प्रधान सेवक स्वयं नरेंद्र मोदी जी इतने दिनों से उन्हीं लोगों का पता लगाने में लगे थे जो देश को बर्बाद कर रहे हैं और इस खोज में उन्हें सफलता हासिल हो गई है.

बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में थे. वहां के लोगों को भाषण देते हुए उन्होंने कहा,

इस देश का दुर्भाग्‍य है कि कुछ लोगों के कान पर अगर ‘ओम’ और ‘गाय’ शब्‍द पड़ता है तो उनके बाल खड़े हो जाते हैं. उनको लगता है कि देश 16वीं शताब्‍दी में चला गया. ऐसा ज्ञान, देश बर्बाद करने वालों ने देश बर्बाद करने में कुछ नहीं छोड़ा है.

माने, देश बर्बाद किसने किया? जिन्हें ‘ओम’ शब्द उनके कानों में नहीं पसंद। जीडीपी दर गिराई किसने? जिन्हें ‘गाय’ शब्द उनके कानों में नहीं पसंद। जेट एयरवेज़, भेल, बीएसएनएल किसने डुबाया? जिन्हें लगता है कि गाय की पूजा करने से देश 16वीं शताब्दी में चला गया है.

अपने भाषण में मोदी जी बस ये बताना भूल गए कि जिन लोगों के ओम सुन के बाल खड़े होते हैं, जो देश को बर्बाद कर रहे हैं, उनका क्या किया जाना चाहिए? क्या उन्हें माफ़ कर दिया जाना चाहिए? क्या उन्हें देश से बाहर भगा देना चाहिए? क्या पीट-पीट कर उनकी जान ले-लेनी चाहिए? क्या उन्हें रेप की धमकी दे दी जानी चाहिए?

खैर. प्रधानमंत्री जी एक व्यस्त आदमी है. उन्हें मीटिंग करनी होती हैं, दूसरे देश जाना होता है, डॉक्युमेंट्री बनानी होती है इत्यादि-इत्यादि। प्रधानमंत्री जी की इस व्यस्तता को समझ कर उनके फॉलोवर्स ने खुद ही डिसाइड कर लिया है कि उन लोगों का क्या किया जाए.

नरेंद्र मोदी, फोटो सोर्स- गूगल
व्यस्त नरेंद्र मोदी, फोटो सोर्स- गूगल

प्रधानमंत्री के कहने से पहले ही उनके फॉलोवर्स ने पोटेंशियल ‘देश को बर्बाद करने वालों’ के साथ ये किया है:

  • पत्रकार गौरी की हत्या, उन्हीं के घर के सामने गोली मारी गई
  • अनुराग कश्यप ने ट्विटर छोड़ा, बोले परिवार वालों को मारने की धमकियां दी जा रहीं हैं

अब बस ये दलील न दी जाए कि प्रधानमंत्री जी ऐसा नहीं चाहते थे जो इन खबरों में लिखा है. अगर प्रधानमंत्री जी उन लोगों के साथ ऐसा नहीं होने देना चाहते थे तो, भला उन्होंने गौरी लंकेश की मौत पर नाचने वालों को ट्वीटर पर फॉलो क्यों किया? उनके मंत्री जी लिंचिंग करने वालों को जेल से छूटते ही माला पहनाने क्यों गए?

खैर. अब जबकि देश को बर्बाद करने वालों की पकड़ हो ही चुकी है. और कुछ दिनों में शायद उन्हें ‘ठिकाने’ भी लगा दिया जाएगा तो क्यों न प्रधानमंत्री जी अब देश को बचाने की भी बात कर लें?

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दरअसल, किसी भी इकोनॉमिस्टस, सोशिऑलोजिस्ट की रिसर्च में ये सामने नहीं आया है कि केवल भाषणबाजी से या आरोप लगाने से देश बच जाता है. यदि ऐसा होना ही होता तो जिस हिसाब से पिछले पांच सालों में मोदी जी ने कांग्रेस पर कीचड़ फेंका है, अब तक तो देश की इकोनॉमी कागज़ों की बजाय सच में 5 ट्रिलियन डॉलर हो चुकी होती।