भारत के युवा स्टार खिलाड़ी पृथ्वी शॉ बड़ी मुश्किल में फंस गए हैं। भारत के सलामी बल्लेबाज और उभरते सितारे डोपिंग टेस्ट में 8 महीने के लिए प्रतिबंधित कर दिए गए हैं। उनके प्रतिबंधन को लेकर कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं। कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि जब उन्हें बीसीसीआई द्वारा 8 महीनों के लिए सस्पेंड किया गया है तो फिर उनका यह प्रतिबंध 15 नवंबर को ही कैसे खत्म हो जाएगा?

बीसीसीआई ने क्यों सस्पेंड किया?

दरअसल, पृथ्वी शॉ जब मार्च में सैय्यद मुश्ताक अली ट्रॉफी खेल रहे थे तो उस वक्त उनको लगा कि शायद उन्हें खांसी हो गई है। इसके लिए उन्होंने खांसी की दवाइयाँ व सीरप ले लिया। लेकिन जब आप क्रिकेटर होते हैं तो बिना किसी सलाह के आप कोई भी दवा का इस्तेमाल नहीं कर सकते। एक और नियम है कि किसी भी मैच के शुरु होने से पहले सभी खिलाड़ियों का डोपिंग टेस्ट होता है। इसमें यूरिन टेस्ट भी किया जाता है। 22 फरवरी को बीसीसीआई ने शॉ का यूरिन सैम्पल लिया था और उसे जब अभी के यूरिन सैंपल से जब मिलाया गया तो दोनों में अंतर मिला।

पृथ्वी शॉ, फोटो सोर्स: गूगल
पृथ्वी शॉ, फोटो सोर्स: गूगल

बीसीसीआई ने पाया कि मार्च में जो पृथ्वी शॉ के यूरीन का सैंपल लिया गया था उसमें एक ‘टरबुटैलाइन’ नाम का एक्स्ट्रा पदार्थ पाया गया। जो अमूमन खांसी के सिरप में पाया जाता है। जिसके बाद उनको 15 मार्च से 15 नवंबर तक के लिए बैन कर दिया गया है। इस बीच वह बीसीसीआई द्वारा कराए जाने वाले किसी भी टूर्नामेंट का हिस्सा नहीं होंगे।

पृथ्वी शॉ ने क्या कहा?

पृथ्वी शॉ पर जब यह प्रतिबंध लगा तो इसके बाद उन्होंने एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने यह माना कि हां मैंने गलती की है। शॉ का कहना है कि इस ख़बर ने उन्हें अंदर तक झकझोर कर रख दिया है। लेकिन वह और मजबूत होकर वापसी करेंगे। मैं अभी पिछले टूर्नामेंट में लगी चोट से उबर रहा हूं और इस बीच यह ख़बर मुझे पूरी तरह तोड़ दिया है।

शॉ अकेले नहीं फंसे हैं!

पृथ्वी शॉ के अलावा विदर्भ के क्रिकेटर अक्षय दुल्लारवार, राजस्थान के दिव्य गजराज को भी डोपिंग के लिए सस्पेंड किया गया है। पृथ्वी ने आखिरी इंटरनेशनल टेस्ट मैच 23 अक्टूबर, 2018 को वेस्टइंडीज के खिलाफ हैदराबाद में खेला था इसके बाद हमेशा चोट के कारण टीम से बाहर ही रहे। कभी टीम के साथ जुड़े भी लेकिन फिर बाहर हो गए।

क्या कहता है डोपिंग नियम?

बीसीसीआई ने पृथ्वी शॉ के बारे में कहा है कि शॉ ने अपनी गलती मान ली है इसलिए बीसीसीआई एडीआर के अनुच्छेद 10.10.2 के मुताबिक यह प्रावधान है कि जब कोई खिलाड़ी अपनी गलती को मान लेता है तो उसके निलंबन का समय तब से गिना जाएगा जब खिलाड़ी का ब्लड या यूरिन सैंपल लिया गया था। शॉ के लिए एक अच्छी ख़बर यह भी है कि बीसीसीआई एडीआर के अनुच्छेद 10.11.2 के मुताबिक जिस खिलाड़ी को निलंबित किया जाता है तो वह निलंबन के आखिरी दो महीनों या एक तिहाई हिस्से में टीम के साथ या क्लब में अभ्यास के लिए लौट सकता है।

पृथ्वी शॉ, फोटो सोर्स: गूगल
पृथ्वी शॉ, फोटो सोर्स: गूगल

ऐसे में पृथ्वी शॉ पर जो बैन लगा है वह 15 नवंबर को खत्म हो रहा है। तो अगर शॉ चाहते हैं तो सितंबर में ही टीम के साथ अभ्यास करने के लिए जुड़ सकते हैं। लेकिन यह तो अब तय है भारत में वेस्टइंडीज से होने वाले घरेलू सीरीज के लिए शॉ उपलब्ध नहीं रहेंगे।

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