भारतीय टीम अगले साल यानि जनवरी में शुरु हो रहे वर्ल्ड कप खेलने जा रही है। इसके लिए टीम का ऐलान कर दिया गया है। अंडर-19 वर्ल्ड कप के लिए प्रियम गर्ग को कप्तान बनाया गया है। 17 जनवरी से 9 फरवरी तक चलने वाले इस टूर्नामेंट के लिए 15 सदस्यों में किसी के पिता कारगिल युद्ध में लड़ चुके हैं तो, किसी की मां बस कंडक्टर हैं। किसी के पिता ड्राइवर हैं तो खुद यशस्वी गोलगप्पे बेचते हैं। ऐसे में इन 15 सदस्यों के ऊपर ही खिताब बचाने की जिम्मेदारी होगी। भारतीय टीम अभी तक अंडर-19 वर्ल्ड कप का खिताब सबसे अधिक चार बार जीत चुकी है।

हमेशा से अंडर-19 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम में जो भी कप्तान बना है, उसने जबरदस्त खेला भी है। इसलिए इस बार भी भारतीय कप्तान प्रियम गर्ग से सभी यही उम्मीद कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मेरठ से ताल्लुक रखने वाले प्रियम 8 साल की उम्र में ही क्रिकेट खेलना शुरु कर दिया था। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से पिता साइकिल से घूम-घूम कर दूध बेचा करते थे। गांव के लोगों का कहना था कि उनका बेटा अच्छी बल्लेबाजी करता है। इसलिए उन्हें अपने बेटे का एडमिशन मेरठ क्रिकेट एकडेमी में करवानी चाहिए। उस वक्त तक प्रियम घर की आर्थिक स्थिति को समझने के लिए काफि छोटे थे।

प्रियम गर्ग, भारतीय अंडर-19 के कप्तान, फोटो सोर्स: गूगल

प्रियम गर्ग, भारतीय अंडर-19 के कप्तान, फोटो सोर्स: गूगल

जब गांव वालों ने ज्यादा दवाब बनाया तो, पिता ने प्रियम का एडमिशन मेरठ क्रिकेट एकेडमी में करवा दिया। इस बीच साल 2011 में प्रियम की मां कुसुम का बिमारी की वजह से देहांत हो गया। प्रियम इस सदमें को बर्दाश्त नहीं कर सके और क्रिकेट खेलना छोड़ दिया। लेकिन, जब पिता ने समझाया तो, फिर से खेलना शुरु किया। फिर देखते-देखते जब उनका चयन राज्य की टीम में हुआ तो, घर की स्थिति में सुधार आया। फिर पिता ने दूध बेचना छोड़ स्वास्थ्य विभाग में ड्राइविंग करना शुरु कर दिया।

प्रियम गर्ग अपना पहला फर्स्ट क्लास मैच नवंबर 2018 में खेला था। लेकिन, अपने अंडर-16 मैच में उन्होंने दो डबल सेंचुरी और अंडर-19 में एक डबल सेंचुरी लगा चुके हैं। इंडिया कैंप और नेशनल क्रिकेट एकेडमी में भी एक-एक दोहरा शतक जड़ चुके हैं। कूचबिहार व रणजी ट्रॉफी में प्रियम ने मध्य प्रदेश के खिलाफ 200, छत्तीसगढ़ के खिलाफ 202, त्रिपुरा के खिलाफ 206, गुजरात के खिलाफ 206, रायपुर, दिल्ली व हरियाणा के खिलाफ 200 रनों की शानदार पारी खेल चुके हैं। प्रियम ऐसे खिलाड़ी हैं जिनके नाम शतक से ज्यादा दोहरा शतक है। अभी तक उन्होंने 6 दोहरा शतक जड़ा है। प्रियम ने पिछले रणजी ट्रॉफी के 10 मैच खेलकर 814 रन बनाए थे। 67.83 के एवरेज के साथ वह यूपी के दूसरे सर्वाधिक स्कोरर रहे। इस साल उन्हें यूपी रणजी टीम का कप्तान बनाया गया है।

साल 2008 में अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के कप्तान विराट कोहली थे, फोटो सोर्स: गूगल

साल 2008 में अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के कप्तान विराट कोहली थे, फोटो सोर्स: गूगल

12 फस्र्ट क्लास, 15 लिस्ट-ए और 11 टी-20 मैच अब तक प्रियम ने खेले हैं। एक बार फिर सभी को उनसे पृथ्वी शॉ की तरह खीताब जीताने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। प्रियम के अलावा टीम के उप कप्तान ध्रुव जुरेल हैं। उत्तर प्रदेश के आगरा के रहने वाले धु्रव विकेटकीपर हैं और उनके पिता नेम सिंह 1999 में करगिल युद्ध में लड़ चुके हैं। उन्होंने इसी साल इंग्लैंड दौरे पर त्रिकोणीय सीरीज में टीम इंडिया को जिताने में अहम रोल निभाया था। साथ ही अंडर-19 एशिया कप के लिए उन्हें कप्तानी दी गई थी। इसके बाद अथर्व महाराष्ट्र के रहने वाले हैं और बायें हाथ के स्पिनर हैं। उनकी मां मुंबई में सरकारी बस में कंडक्टर हैं। अर्थव उस वक्त चर्चा में आए थे जब 9 साल पहले एक अभ्यास मैच में उन्होंने सचिन तेंदुलकर को आउट कर दिया था।

अंडर-19 वर्ल्ड कप का इतिहास भी अजीब रहा है। साल 1988 में शुरु हुआ इस टूर्नामेंट में भारत के पहले कप्तान रहे म्य्लुअहनन सेंथिल्नाथान।  भारत उस टूर्नामेंट में 6वें नंबर पर रहा था। इसके बाद इस टूर्नामेंट का आयोजन 10 साल बाद 1998 में हुआ। भारतीय कप्तान थे अमित पागनिस। भारतीय टीम में उस वक्त हरभजन सिंह और वीरेन्द्र सहवाग थे। अच्छे प्रदर्शन के बाद भी भारतीय टीम फाइनल में जगह नहीं बना पाई। फिर साल 2000 में भारत पहली बार मोहम्मद कैफ की कप्तानी में यह टूर्नामेंट जितने में सफल रहा था। उस टीम में युवराज सिंह भी शामिल थे। साल 2002 में पार्थिव पटेल की कप्तानी में भारतीय टीम अंडर-19 वर्ल्ड कप खेली थी लेकिन, कुछ खास नहीं कर पाई। इसके बाद साल 2004 के वर्ल्ड कप में भारत को पाकिस्तान के हाथों हार झेलनी पड़ी थी। उस वक्त टीम की कप्तानी कर रहे थे अंबाती रायडू।

साल 2012 में उन्मुक्त चंद ने भारत को अंडर-19 वर्ल्ड कप में जीत दिलाई थी

साल 2012 में उन्मुक्त चंद ने भारत को अंडर-19 वर्ल्ड कप में जीत दिलाई थी

साल 2006 में भारतीय अंडर-19 टीम के कप्तान थे रविशंकर शुक्ला। जिनका करियर अभी तक के सभी कप्तानों में सबसे खराब रहा। उनकी कप्तानी में भारत फाइनल तक तो पहुंचा लेकिन, जीत नहीं सका। इस अंडर 19 टीम में रवींद्र जडेजा, रोहित शर्मा, चेतेश्वर पुजारा और पीयूष चावला जैसे खिलाड़ी भी थे। इसके बाद साल 2008 में भारत के कप्तान थे विराट कोहली जिनकी कप्तानी में भारतीय टीम को दूसरी बार यह खीताब नसीब हुआ। इसके बाद साल 2012 में उन्मुक्त चंद ने अपनी कप्तानी में भारत को विजेता बनाया था।

साल 2018 में पृथ्वी शॉ ने भारत को चौथी बार विजेता बनवाया था

साल 2018 में पृथ्वी शॉ ने भारत को चौथी बार विजेता बनवाया था

इसके बाद साल 2016 में भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे थे इशान किशन। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम फाइनल में तो पहुंची लेकिन, वेस्टइंडीज से हार गई। इसके बाद पिछले साल यानि 2018 में भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे थे पृथ्वी शॉ। जिन्होंने भारत को एक बार फिर खीताब दिलाया। इस सीरीज में शुभमन गील ने भी काफी शानदार बैटिंग की थी। अब ऐसे में प्रियम गर्ग से भी सभी को यही उम्मीद है कि वे मोहम्मद कैफ, विराट कोहली, उन्मुक्त चंद और पृथ्वी शॉ की कहानी को दोहराए।