इस वक्त महाराष्ट्र में कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना की गठबंधन सरकार है. उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री हैं. सत्ता संभालते उद्धव ठाकरे ने एक अहम कदम उठाया. उन्होंने सबसे पहले पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस द्वारा लिए गए तमाम फैसलों को निरस्त कर दिया. जिसमें मेट्रो के निर्माण के लिए आरे फॉरेस्ट को काटा जाना भी शामिल था.

आरे फॉरेस्ट को कटने से बचाने के लिए हजारों की तादाद में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए थे. हालांकि, विरोध के बावजूद आरे के 2,134 पेड़ कट गए थे. उस समय भी शिवसेना ने इसका विरोध किया था. इसलिए जैसे ही उनकी सरकार बनी उन्होंने आरे को लेकर पूर्व-सीएम फडणवीस का फैसला पलट दिया.

पूर्व-सीएम देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस, फोटो सोर्स: गूगल

पूर्व-सीएम देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस, फोटो सोर्स: गूगल

हालांकि, इसी बीच एक खबर सामने आई की आरे को काटने से बचाने वाली शिवसेना. खुद औरंगाबाद में 1,000 पेड़ काटने जा रही है. ताकि शिवसेना बाला साहब ठाकरे मेमोरियल बना सके. शिवसेना पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगने लगा. पूर्व-सीएम देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने ट्वीट किया कि

पाखंड एक बिमारी है. जल्दी ठीक हो जाओ शिवसेना. पेड़ों की कटाई अपनी सुविधा से या तब, जब आपको कमीशन मिले पेड़ों को काटने की इजाजत देना माफी योग्य अपराध नहीं है. अमृता ने अपनी ट्वीट के साथ टाइम्स न्यूज़पेपर की फोटो भी शेयर की है.

शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी, फोटो सोर्स: गूगल

शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी, फोटो सोर्स: गूगल

अमृता के इस दावे पर शिवसेना ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट किया है कि

आपको निराश करने के लिए खेद है लेकिन, सच्चाई यह है कि स्मारक के लिए एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा. मेयर ने भी इसकी पुष्टि की है. इसके अलावा मैं यह भी साफ कर दूं कि अनिवार्य रूप से झूठ बोलना बड़ी बीमारी है. जल्द ठीक हो जाइए, पेड़ों को काटने के लिए कमीशन महाराष्ट्र BJP के नेताओं द्वारा प्रैक्टिस की जाने वाली नई पॉलिसी है.

औरंगाबाद के मेयर नंद कुमार गडेले का कहना है कि

प्रशासन ठाकरे स्मारक के लिए पेड़ों की कटाई के लिए इजाजत नहीं देगा. हम यह सुनिश्चित करने जा रहे हैं कि स्मारक के निर्माण के लिए कोई पेड़ न काटा जाए.

इससे यह साफ जाहिर होता कि यह मात्र एक कोरी अफवाह है कि शिवसेना औरंगाबाद में बाला साहब ठाकरे मेमोरियल बनाने के लिए 1000 पेड़ काटने वाली है. आज के इस सोश्ल मीडिया में कब कौन सा झूठ सच हो जाए. यह कहा नहीं जा सकता है. मगर नेताओं से और उनके परिवार वालों से इतनी उम्मीद तो की ही जा सकती है कि वो कम से कम अफवाहों को हवा न दें. वरना ये तो सिर्फ पेड़ काटने की अफवाह थी. कई बार देखा गया है कि अफवाहों के चक्कर में दंगे हो जाते हैं.