देश भर में डर का माहौल है. CAB को लेकर देश भर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. असम, नागालैंड और मेघालय में इसको लेकर प्रदर्शन जारी है. ऐतिहातिन पुलिस ने स्कूल-कॉलेज बंद कर रखे हैं. स्थिति इतनी खराब है कि बिल पेश करने वाले अमित शाह अपने किए हुए कुकर्म या कर्म, आप जो ठीक समझें. उसे देखने के लिए अरुणाचल प्रदेश और मेघालय नहीं जा पा रहे हैं. दौरा रद्द कर दिया गया है. अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने अपने नागरिकों को एडवाइजरी जारी कर दी है. कहा है, इन राज्यों का दौरा न ही करें, तो बेहतर हैं.

ये तो उन राज्यों का हाल है. जहां इस बिल का सबसे ज्यादा असर पड़ा है. हालांकि, दूसरे राज्यों की हालत भी इससे कुछ अलग नहीं है. देश भर में बिल का विरोध हो रहा है. जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय समेत देश भर के कई विश्वविद्यालयों ने इस बिल का जमकर विरोध किया है. जामिया में तो पुलिस और छात्रों को बीच जमकर हाथा-पाई भी हुई है. कई छात्रों को गंभीर चोटें भी लगी हैं.

CAB को लेकर लगातार हिसंक प्रदर्शन जारी हैं, फोटो सोर्स: गूगल

CAB को लेकर लगातार हिसंक प्रदर्शन जारी हैं, फोटो सोर्स: गूगल

वहीं अर्थव्यवस्था को लेकर भी चिंताएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. इसकी बदहाली को लेकर भी आवाज़ उठाई जा रही है. सरकार जो अपने ऐतिहासिक कदमों को लेकर फूले नहीं समा रही है. उसे बताया जा रहा है कि इन कदमों को उठा कर क्या तीर मार लोगी, जब देश ही नहीं बचेगा.

Former Economic Advisor अरविंद सुब्रमण्यन, फोटो सोर्स: गूगल

Former Economic Adviser अरविंद सुब्रमण्यन, फोटो सोर्स: गूगल

देश के पूर्व आर्थिक सलाहकार (Former Economic Adviser) अरविंद सुब्रमण्यन का कहना है कि

  • भारत इस वक्त भारी आर्थिक संकट से जूझ रहा है. अर्थव्यवस्था ICU में पहुंच गई है. जिसके लिए TBS (Twin Balance Sheets) जिम्मेदार है.
  • TBS यानि Twin Balance Sheet Problems. इसमें एक का संबंध भारतीय कंपनियों की बैलेंस शीट से है. वहीं दूसरे का संबंध बैंकों के बैलेंस शीट से है.
  • FCA अरविंद सुब्रमण्यन ने ये सारी बातें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट के एक ड्राफ्ट वर्किंग पेपर में कही हैं. जिसे उन्होंने IMF (International Monetary Fund) के भारत स्थित पूर्व-प्रमुख जोश फेलमैन के साथ मिल कर तैयार किया है.

इस पेपर में TBS को दो भागों में बांटा गया है. TBS-1 और TBS-2.

  • TBS-1 साल 2004 से 2011 के बीच बैंक कर्ज का है, जब निवेश चरम पर था. बैंकों ने स्टील, बिजली और बुनियादी ढांचा क्षेत्र (Basic Infrastructure Area) को खूब कर्ज बांटे थे.
  • TBS-2 में नोटबंदी के बाद से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को शामिल किया गया है. जिसमें NBFCs (Non-Banking Financial Companies) और रियल स्टेट की बदहाली के बारे मे बताया गया है.
  • कहा गया है कि नोटबंदी के बाद भारी मात्रा में कैश बैंक पहुंचे. जिसे NBFCs ने रियल स्टेट में लगा दिया. 2017-18 तक रियल स्टेट के 5,00,000 करोड़ रुपये के बकाया लोन (Outstanding Loan) के आधे हिस्से के लिए NBFCs जिम्मेदार है.
  • इसमें बताया गया है कि सितंबर 2018 में IL&FS (Infrastructure Leasing & Financial Services Limited) का डूबना एक बेहद दुर्घटना थी. इसके लिए न सिर्फ कंपनी का 90,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज जिम्मेदार था बल्कि, इसने NBFCs के पुनर्मूल्यांकन की ओर भी ध्यान आकर्षित किया था.
  • दरअसल, NBFCs एक ऐसी कंपनी होती है जो कर्ज, सरकारी बॉन्ड आदि के लेन-देन के जरिए मुनाफा कमाती है. इनका रजिस्ट्रेशन भी कंपनी एक्ट 1956 के तहत होता है.

मंदी को लेकर FCA अरविंद सुब्रमण्यन का कहना है कि

मौजूदा मंदी सिर्फ इसलिए चिंता पैदा करने वाली नहीं है कि 2019-2020 की दूसरी तिमाही में GDP वृद्धि दर 4.5% रही है. इसमें चिंता वाली बात यह है कि इसके आंकड़े अलग-अलग हैं.

पूर्व-प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व-वित्त मंत्री पी चिदंबरम और पूर्व-गवर्नर रघुराम राजन, समय-समय पर भारत की गिरती अर्थव्यवस्था को लेकर अपनी चिंता पहले ही जता चुके हैं.

देश विरोधी बिल CAB के खिलाफ छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं, पुलिस उन पर डंडे बरसा रही है. दुनिया भर में भारत की अर्थव्यस्था को लेकर चिंता जताई जा रही है. एक्सपर्ट्स चीख-चीख कर थक चुके हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था ICU में पहुंच गई है. अगर जल्द से जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो सब तबाह हो जाएगा. महिलाओं को लेकर क्या स्थिति है, वो जग जाहिर हो चुकी है.

पर हमारे प्रधानसेवक के कानों पर जू तक नहीं रेंग रही है. देश में बढ़ते रेप, गिरती अर्थव्यवस्था और न ही खुद के द्वारा लाए गए इस CAB रूपी ज़हर को लेकर, अभी तक उन्होंने कोई परिपक्व बात कही है और न ही कोई ठोस कदम उठाया है. हां! विपक्ष को जरूर झाड़ दिया है कि हमनें जो कह दिया और कर दिया है, उसे चुप-चाप मान लो.

काश भाजपा की महिला सांसद, राहुल गांधी की बजाय अपने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसद में घेरतीं और पूछतीं कि आपके रहते देश की इतनी बुरी हालत कैसे हो गई? महिलाओं का रेप क्यों नहीं रूक रहा है? छात्रों पर लाठी-डंडे क्यों बरसाए जा रहे हैं? CAB जैसा धर्मविरोधी बिल आपने कैसे पास करा लिया? शायद तब जाके मोदी जी को थोड़ी शर्म आती और वो कोई ठोस कदम उठाते. न उनसे सवाल किया और न ही उन्होंने खुद कोई ठोस कदम उठाया. उल्टा मिथुन चक्रवर्ती की कहनियां सुना रहे हैं. यह कोई मज़ाक नहीं है.

संसद भवन प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल

संसद भवन प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल

बाकायदा ख़बर छपी है. संसद का शीतकालीन सत्र समाप्त हो गया है. शुक्रवार को उप-प्रधानमंत्री वेंकैया नायडू संसद के अपने चैंबर में थे. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 से ज्यादा अन्य दलों के नेताओं के साथ वहीं मौजूद थे. वेंकैया नायडू ने तभी एक आदिवासी महिला सांसद सरोजनी हेंब्रम को पीएम मोदी से मिलाया. जिन्होंने 67 साल के संसदीय इतिहास में पहली बार संथाली भाषा में अपना संबोधन दिया था. पीएम मोदी ने पहले तो महिला सांसद का अभिवादन किया. फिर अचानक से उन्हें मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म मृगया की शूटिंग की कहानी सुनाने लगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फोटो सोर्स: गूगल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फोटो सोर्स: गूगल

इस फिल्म के बारे में पीएम मोदी ने बताया कि

  • जब फिल्म के अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने जब अंगूठे की सहायता से तीर-धनुष चलाना चाहा तब वहां मौजूद आदिवासी समुदाय ने इसका विरोध कर दिया था.
  • जिसके बाद आदिवासी समुदाय ने उन्हें एकलव्य की कहानी बताई, जिसमें एकलव्य ने गुरू द्रोणाचार्य के कहने पर अपना अंगूठा काट कर उन्हें दान कर दिया था. आदिवासियों ने कहा, धनुष चलाने के लिए अंगूठे का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, तब मिथुन ने बिना अंगूठा लगाए तीर-धनुष चलाने की प्रैक्टिस शुरू कर दी.
  • 1976 में आई इसी फ़िल्म के लिए पहली बार मिथुन चक्रवर्ती को नेशनल अवॉर्ड मिला था.

ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मोदी जी इस कहानी के जरिए ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि मैं तुम्हारा गुरु द्रोणाचार्य हूँ और तुम मेरे एकलव्य हो. मैं जो कुछ कह रहा हूँ तुम्हें उसे करना है. चाहे मैं तुम्हारा सर ही क्यों न काट लूं. वैसे भी द्रोणाचार्य और एकलव्य को स्वार्थी गुरू और एक अंध भक्त शिष्य की कहानी के तौर पर भी याद किया जाता है.