भारत-फ्रांस की बढ़ती दोस्ती को और मज़बूत करने के लिए दोनों देशों की नौ-सेनाएं हिंद महासागर में संयुक्त सैन्य अभ्यास में भाग ले रही हैं. रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिन्द महासागर के समुद्री रास्तों पर दुनिया भर के देशों की नज़रें रहती हैं. लेकिन देखा गया है कि पिछले कुछ सालों से हिन्द महासागर में चीन लगातार घुसपैठ करने कोशिशें करता रहा है. साथ ही चीन के बढ़ते आर्थिक प्रभावों और दक्षिणी चीन सागर में विवाद पैदा करने वाले चीन के क्षेत्रीय दावों को लेकर भारत फ्रांस समेत दुनिया के तमाम देश चिंतित हैं.

साझा सैन्य अभ्यास, फोटो सोर्स- गूगल

चीन की बढ़ती दादागिरी पर लगाम लगाने के लिए अमेरिका सहित कई देशों की नौ सेनाएं अक्सर साउथ चाइना-सी में संयुक्त सैन्य अभ्यास करती हैं. बीते शुक्रवार ऐसा ही एक सैन्य युद्ध अभ्यास हिंद महासागर में फ्रांस और भारत की नौ सेना के बीच हुआ है. दोनों देशों के इस कदम को चीन के लिए एक कड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है.

इस युद्धाभ्यास में फ्रांस का एक मात्र जंगी विमान वाहक भाग ले रहा है. जिस पर भारत को फ्रांस से मिलने वाले लड़ाकू विमान राफेल भी तैनात किए गए हैं. जो इस साल के अंत तक फ्रांस से की गई राफेल डील के तहत भारत को मिलने वाले हैं.

फोटो सोर्स- गूगल

इस संयुक्त युद्धाभ्यास पर फ्रांस के बेड़े की कमान संभाल रहे रियर एडमिरल ओलिवियर लेबास ने कहा- हमें लगता है कि हम इस क्षेत्र में ज्यादा स्थिरता ला सकते हैं. जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं और जिसमें वह विशेष रूप से अंतराष्ट्रीय कारोबार को लेकर तमाम देशों का बहुत कुछ दाव पर लगा हुआ है. एशिया, यूरोप और पश्चिम एशिया के देशों के बीच ज़्यादातर व्यापार इसी समुद्री रास्ते से होता है.

भारत के गोवा राज्य के तट पर यह 17वां सालाना युद्धाभ्यास शुरू हुआ है जिसमें फ्रांस की तरफ से भाग लेने वाला करीब 42 हजार टन का विमान वाहक युद्धपोत ‘चार्ल्स डि गॉले’ 12 युद्धपोतों और पनडुब्बियों में से एक है.

फ्रांस का सबसे बड़ा युद्धपोत ‘चार्ल्स डि गॉले’, फोटो साभार- गूगल

इन दोनों देशों के 6-6 युद्धपोत और सबमरीन्स इस युद्धाभ्यास में भाग ले रहे हैं. इस अभ्यास में फ्रांस ने अपने जंगी लड़ाकू विमान ‘राफेल’ को भी शामिल किया है. फ्रांस के अधिकारियों का कहना हैं साल 2001 में शुरू हुए इस सालाना नवल एक्सरसाइज में ये अब तक का सबसे बड़ा साझा सैन्य अभ्यास है.

सैन्य आभास में शामिल हुआ आईएनएस वरुना, फोटो सोर्स – गूगल

हिन्द महसागर में भारत के पारंपरिक दबदबे को चुनौती देता चीन

फ्रांस के अधिकारियों का मानना है कि हिंद महासागर में भारत के पारंपरिक दबदबे को चीन की बढ़ती दखलअंदाजी का सामना करना पड़ रहा है. चीन ने समुद्री मार्गों के पास अपने युद्धपोतों और पनडुब्बियों की तैनाती की हुई है. इसके अलावा ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ योजना के जरिए चीन ने कमर्शियल इन्फ्रास्ट्रक्चर का एक बड़ा नेटवर्क बना लिया है, जिसका भारत ने कड़ा विरोध किया है.

इस क्षेत्र के बारे में फ्रेंच मेरीटाइम फोर्सेज के हेड रियर एडमिरल डिडिएर मालटरे का मानना है कि चीन हिंद महासागर में उतना आक्रामक नहीं है. जितना कि साउथ चाइना सी में है. उन्होंने कहा, ‘चीन आसपास के लगभग पूरे समुद्री क्षेत्र पर अपना दावा ठोकता है, इस समुद्री क्षेत्र में पड़ने वाले अनेक द्वीपों को चीन अपना मानता है, कई द्वीपों पर तो उसका कब्जा भी है, पर चीन की इस तरह की आक्रामकता हिंद महासागर में देखने को नहीं मिलती हैं.’

पिछले महीने फ्रांस ने ताइवान के जलडमरुमधे में अपना एक युद्धपोत भेज दिया था जिसके कारण चीन, फ्रांस से नाराज हो गया था. चीनी नेवी ने फ्रांस के युद्धपोत को इंटेर्सेप्ट किया था जिसके बाद पेइचिंग ने अपनी आपत्ति को लेकर फ्रांस से एक आधिकारिक विरोध जताया था. हालांकि चीन की इस आपत्ति पर फ्रांस ने अपने जवाब में कहा था कि वह अपनी नौवाहन स्वतंत्रता का इस्तेमाल कर रहा था.

पिछले महीने घटी इस घटना को लेकर फ्रांस के अधिकारियों ने साफ कहा कि उस घटना का हिन्द महासागर में भारत के साथ होने वाले साझा सैन्य आभास से कोई लेनदेना नहीं है.

Facebook Comments

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here