2019 लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद से ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस्तीफा देने पर अड़े थे. क्योंकि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की बुरी हार हुई थी. कांग्रेस को सिर्फ 52 सीटें ही मिली थीं. तब से लेकर अब तक हर रोज राहुल गांधी के इस्तीफे को लेकर रोज खबरों का आना-जाना लगा हुआ था. लेकिन राहुल गांधी ने आखिरकार बुधवार को इस्तीफा दे दिया. राहुल गांधी ने ट्वीटर पर चार पन्नों में अपनी बात को रखते हुए इस्तीफा दिया है. उन्होंने कहा,

‘पार्टी को बिना किसी देरी के नए पार्टी अध्यक्ष के बारे में सोचना चाहिए. मैं इस प्रक्रिया में कहीं नहीं हूं. मैं पहले ही इस्तीफ़ा दे चुका हूं, मैं अब पार्टी अध्यक्ष नहीं हूं. कांग्रेस की कार्यसमिति को जल्द से जल्द बैठक कर इस बारे में निर्णय लेना चाहिए.’

खबरों के मुताबिक उनके इस्तीफे के बाद शुरू हुई खींचतान के बीच कांग्रेस ने मोतीलाल वोहरा को पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया है.

राहुल गांधी, फोटो सोर्स- गूगल

राहुल ने इस्तीफे वाले पन्नों में क्या लिखा है?

उन्होंने लिखा कि 2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी को मिली हार की मैं जिम्मेदारी लेता हूं. हमारी पार्टी के विकास के लिए जवाबदेही महत्वपूर्ण है. इस कारण से मैंने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने आगे लिखा कि कांग्रेस अध्यक्ष पद पर रहना मेरे लिए गर्व की बात है. पार्टी को फिर से बनाने के लिए कड़े फ़ैसले लेने की ज़रूरत है. 2019 में हार के लिए कई लोगों की जवाबदेही तय करने की ज़रूरत है. यह अन्याय होगा कि मैं दूसरों की जवाबदेही तय करूं और अपनी जवाबदेही की उपेक्षा करूं. कांग्रेस पार्टी के कई सहयोगियों ने मुझसे कहा कि मैं अगले अध्यक्ष का चुनाव करूं. पार्टी का जो भी नया अध्यक्ष होगा, उसे मैं चुनूं यह मेरे लिए ठीक नहीं होगा. हमारी पार्टी का विशाल इतिहास और विरासत है. मैं इसके संघर्ष और मर्यादा का आदर करता हूं. यह हमारे मुल्क की बनावट के साथ गुँथा हुआ है.

मेरा भरोसा है कि पार्टी नेतृत्व के मामले में बिल्कुल सही फ़ैसला लेगी और नया नेतृत्व पार्टी को साहस, प्रेम और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ाएगा. इस्तीफ़ा देने के तत्काल बाद मैं कांग्रेस वर्किंग कमिटी में अपने सहकर्मियों को सलाह देता हूं कि वो नए अध्यक्ष चुनने की ज़िम्मेदारी एक ग्रुप को दें. वही ग्रुप नए अध्यक्ष की खोज शुरू करे. मैं इस मामले में मदद करूंगा और कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन बहुत ही आसानी से हो जाएगा.

मेरा संघर्ष महज सत्ता पाने के लिए नहीं रहा है. बीजेपी के ख़िलाफ़ मेरे मन में कोई नफ़रत नहीं है लेकिन उनके ‘आइडिया ऑफ इंडिया’ के खिलाफ हैं. उन्होंने कहा, यह कोई नई लड़ाई नहीं है, हमारी यह लड़ाई हजारों सालों से चल रही है. जहां उन्हें असमानता दिखती है, मुझे समानता दिखती है, जहां वे नफरत देखते हैं, मैं वहां प्यार देखता हूं. वे जिससे डरते हैं, मैं उसे गले लगता हूं.

राहुल ने आगे कहा,

हमारे देश और संविधान पर हो रहे हमले हमारे देश के ताने-बाने को नष्ट करने के लिए हैं. मैं इसके खिलाफ अपनी लड़ाई से किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटूंगा.

राहुल ने चुनाव को लेकर कहा,

स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए देश के संस्थानों के निष्पक्ष होने की ज़रूरत होती है, कोई चुनाव स्वतंत्र प्रेस, स्वतंत्र न्यायपालिका और एक पारदर्शी चुनाव आयोग, जो तटस्थ हो, के बिना निष्पक्ष नहीं हो सकता. न ही चुनाव तब स्वतंत्र हो सकता है जब आर्थिक संसाधनों पर एक ही पार्टी का एकाधिकार हो. उन्होंने आगे कहा, ‘हमने 2019 का चुनाव किसी एक राजनीतिक पार्टी से नहीं बल्कि भारत सरकार की पूरी मशीनरी, जिसके हर संस्थान को विपक्ष के खिलाफ खड़ा किया गया था, उससे लड़ा है. यह अब शीशे की तरह साफ है कि बरसों से संजोई गयी हमारी सांस्थानिक निष्पक्षता अब देश में नहीं बची है.

उन्होंने आरएसएस के बारे में कहा,

देश की संस्थागत संरचना पर कब्जा करने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के घोषित उद्देश्य अब पूरे हो चुके हैं. हमारा लोकतंत्र बुनियादी तौर पर कमजोर हुआ है. असली खतरा अब शुरू हुआ है, जहां चुनाव देश के भविष्य के निर्धारक होने के बजाय महज रस्म अदायगी होकर रह जायेंगे.

राहुल गांधी ने कहा मैं कांग्रेसी पैदा हुआ था, यह पार्टी हमेशा मेरे साथ रही है और मेरे जीवन का खून है और हमेशा के लिए यह बनी रहेगी.

जाहिर है कि 2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की बुरी हार के बाद राहुल गांधी ने नतीजों के दिन ही साफ कर दिया था कि वे अपने पद से इस्तीफा देना चाहते हैं और हार के लिए खुद को जिम्मेदार मानते हैं. इसके बाद से ही कांग्रेस के कई बड़े नेता उन्हें मनाने की कोशिश कर रहे थे.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here