26 मई 2014 की वह शाम, जब नरेंन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रुप में शपथ ली। एक उम्मीद के साथ कई सारे सवाल और उन सवालों के बीच एक नाम नरेन्द्र मोदी। कहने के लिए तो बहुत सारे लोगों ने कहा भी था औऱ खासकर खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि अब अच्छे दिन आयेंगे। क्योंकि जिस तरह से भ्रष्टाचार अपने चरम सिमा पर था शायद यह पंक्तियां उस वक्त काफी पसन्द आई होंगी। लेकिन 2017 आते-आते विपक्षी पार्टियों का सब्र टूट गया और बीएसपी प्रमुख मायावती ने कहा भी था,

बीजेपी के पास नए वादे करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि 2014 में किए गए वादों को पूरा करने में बीजेपी असफल रही है। आम जनता को अच्छे दिन का सपना दिखाकर बीजेपी ने गुमराह करने के साथ-साथ जनता के भावनाओं के साथ खेला है।

खैर, कुछ लोगों का मानना था कि विपक्ष में रहने के कारण मायावती का यह बोल स्वभाविक है। लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि बीजेपी के 5 साल पूरे होने के बाद उन्होंने जो वादे किए थे उनका क्या हुआ ? अब समय आ गय़ा है कि बीजेपी से एक सवाल ज़रुर पुछा जाना चाहिए कि जिन वादों के साथ बीजेपी ने 2014 में लोकसभा का सफर शुरु किया था उनमें कितने वादें पूरे किए गए।

2019 के लोकसभा चुनाव में बस कुछ ही दिन शेष रह गए हैं औऱ खासकर सभी पार्टियों ने अपनी-अपनी तैयारी भी शुरु कर दी हैं। कुछ पार्टियां अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी कर चुकी हैं, तो वही कुछ राजनीतिक पार्टियां अभी भी सिटों के समीकरण को सुलझाने में लगी हुई है। लोकसभा चुनाव के इस सियासी दौर में भारत पूरी तरह सर्जिकल स्ट्राइक में लगा हुआ है। पूरा भारत इस समय सरकार के साथ खड़ा है। लेकिन अब विपक्ष से एक सवाल जो निकल कर आ रहा है कि क्या सर्जिकल स्ट्राइक बीजेपी की कोई राजनीतिक चाल तो नहीं?

यहां याद दिलाना भी ज़रुरी है जब 2014 में बीजेपी पार्टी सरकार में आने से पहले भ्रष्टाचार, राम मंदिर और भी कई सारे मुद्दों पर काम करने का वादा कर रही थी जो शायद लोगों को अपनी तरफ रिझाने की एक सोची समझी रणनीति थी। क्योंकि जिस तरह से कांग्रेस सरकार के दौरान अन्ना हज़ारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अवाज उठाई थी। शायद लोगों का अन्ना हज़ारे का साथ मिला देख बीजेपी भी भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे को लाकर वोट बैंकिंग का खेल खेल गयी

बीजेपी के सरकार बनने के बाद कई ऐसे मुद्दे थे जो उसके सामने चुनौती बनकर खड़े थे। आइए एक-एक कर उन सारे चुनौतियों पर गौर फरमाते हैं और देखते है कि बीजेपी सरकार अपने पांच साल पूरे होने के बाद क्या कुछ कर पाई है।

राम मंदिर:-

बीजेपी जिन मुद्दों को लेकर 2014 में अपनी सरकार बनाने में कामयाब रही उसमें सबसे अहम योगदान राम मंदिर का रहा। जिस राम मंदिर पर एक समय बीजेपी को अपनी सरकार तक गवानी पड़ी थी। 6 दिसंबर 1992 में बाबरी विध्वंस के बाद कल्याण सिंह ने अपनी कुर्सी तक त्याग दी थी। उन्होने कहा था ये सरकार राम मंदिर के नाम पर बनी थी और अब उसका मकसद पूरा हुआ। लेकिन 2014 के बाद की कहानी कुछ और ही बयान कर रही है। जिस राम मंदिर को लेकर बीजेपी ने अपनी सरकार तक त्याग दिया था आज उसी राम मंदिर को लेकर एक बार फिर सरकार बनाने के फिराक में है। क्योकि 2014 के बाद जिस तरह से राम मंदिर पर विवाद समय दर समय उठता रहा यह वाकई विचार के लायक मुद्दा है।

बीजेपी द्वारा इस मुद्दे पर कई बातें कही गई। किसी ने राम मंदिर को लेकर कहा कि यह मामला कोर्ट का है इसलिए कोर्ट ही निपटारा करेंगी तो वही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि अगर इस मामले में सुप्रिम कोर्ट नहीं कुछ कहती है तो मै केवल 24 घंटे में इसका निपटारा कर दुंगा। समय की हकिकत को समझकर एक नियमित अंतराल पर इस मुद्दे को लोगों के सामने लाया गया। हालांकि विपक्ष भी इस मामले को औऱ ज्यादा हाईलाइट करने में कोई कसर नहीं छोड़ा।

किसी ने भगवान राम की तो किसी ने हनुमान की जाति पर कई तरह के सवाल खड़े किए जो उनकी मानसिकता को दर्शाता है और यह दिखाता है कि ये लोग राजनीति के लिए किसी भी स्तर पर जा सकते है। जिसे जिस जाति का ज्ञान था उसने उससे भगवान राम और हनुमान को नवाजा। यहां तक की योग गुरु बाबा रामदेव भी इस मामले में पीछे नहीं रहें। उन्होने कहा था हनुमान जी राम भक्त है और वो क्षत्रीय है। वोट के लिए नेताओं का अपने आराध्यों पर किया जाने वाला रिसर्च कार्य कितना सही है आप खुद सोच सकते है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने रामभक्त के काट में अपने आप को देवी भक्त बताया था।

मुल्य वृद्धि दर को रोकना:-

वैसे देखा जाए तो इस मामले में बीजेपी ने काफी हद तक प्रयास किया, GST और नोटबंदी जैसे काम किया। जिसके बाद आम जनता खूब परेशान भी हुई। लोकिन सरकार को इसमें भी अपनी जीत दिखाई दे रही है।

न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करना:-

बीजेपी सरकार में आने से पहले यह आरोप लगाते हुए देखी गई कि भारतीय कानून व्यवस्था काफी लचर स्थिति में है लेकिन जब बीजेपी सरकार में आई तो राम मंदिर जैसे मुद्दे पर देखा गया कि रात भर में ही सुप्रिम कार्ट के जजों के बेंच में बदलाव कर दिया गया। फिर ऐसा पहली बार हुआ था कि जज ने खुद फैसला देने तक से इन्कार कर दिया था।

संस्कृति विरासत:-

2014 के शुरुवाती दिनों में इस मामले में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला लेकिन 2017 के बाद यह बदलाव निरंतर देखने को मिला है। इस मामले में अगर देखा जाए तो बीजेपी को सबसे ज्यादा सफलता मिली है जिसमें सबसे बड़ा योगदान अगर किसी ने किया तो वो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ है। क्योंकि जिस तरह से योगी आदित्यनाथ ने एक-एक कर शहरों के नाम बदलें और यहां तक की रेलवे स्टेशन को भी नहीं छोड़ा। यह बीजेपी की संस्कृति विरासत में बदलाव का एक नमूना है।

इस तरह से देखा जाए तो बीजेपी 2019 के लोकसभा चुनाव में एक और नए हथकंडे अपनाने में सफल रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बीजेपी द्वारा राम मंदिर को लेकर किए गए सारे वादे अब अंधेर बस्ती में जाता दिख रहा है। क्योंकि 2019 के लिए एक और नया मशाला जो मिल गया है। एक बात गौर करने वाली है कि जब पुलवामा हमला नहीं हुआ था तो उसके पहले कई बार राम मंदिर को लेकर चर्चाएं हुई। कई सारे वादे किए गए और तो और मंदिर की नींव तक रख दी गई थी। लेकिन पुलवामा हमले के बाद उन सारे वादों पर काला साया छा गया ।

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