दुर्गा पूजा का समय चल रहा है। पूरा देश मां दुर्गा की पूजा करने में व्यस्त है। लेकिन, साथ ही एक सवाल भी है कि क्या वास्तव में दुर्गा पूजा ही हो रही है? सवाल इसलिए भी करना पड़ रहा है क्योंकि, दुर्गा पूजा को बंगाल से लेकर बिहार तक राजनीति दलों ने अपनी पार्टी के प्रचार का जरिया बना लिया है।

बंगाल में पिछले साल तृणमूल कांग्रेस ने लगभग 28 हजार दुर्गा पूजा समितियों को 10-10 हज़ार रुपये का योगदान दिया था लेकिन, इस बार यह रकम कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। इसके पीछे कारण है बीजेपी। बीजेपी भी इस दुर्गा पूजा में बंगाल के लोगों को रिझाने का पूरा इंतजाम कर चुकी है। ऐसे में ममता बनर्जी की सरकार ने इस साल लगभग 28 हज़ार दुर्गा समितियों को 25-25 हज़ार रुपये देने के अलावा क्लब कमिटियों को भी 2-2 लाख रुपये का योगदान दिया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल
प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल

फिलहाल बंगाल में तो पैसों से ही राजनीति की जा रही है लेकिन, झारखंड में राजनीति करने का एक अलग ही तरीका अपनाया गया है। झारखंड की राजधानी रांची में नामकुम एक जगह है। नवयुवक संघ नाम की पूजा समिति यहां दुर्गा पूजा की पूरी तैयारी कर रही है। इसी तैयारी में मां दुर्गा की प्रतिमा के अलावा दो और मूर्तियां भी पंडाल में दिखाई दे रही हैं। ये मूर्ति किसी देवी-देवता की नहीं है बल्कि, यह मूर्ति है बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी की। दोनों मूर्तियों के ऊपर पोस्टर भी लटकाया गया है। लालू यादव की मूर्ति पर जो पोस्टर लटक रहा है, उस पर लिखा है- गरीबों के मसीहा लालू प्रसाद यादव। दूसरी मूर्ति राबड़ी देवी की है, उस पर लटके पोस्टर पर लिखा है- राजमाता राबड़ी देवी।

इन दोनों मूर्तियों को राष्ट्रीय जनता दल ने अपनी ट्विटर हैंडिल से ट्वीट भी किया है। राजद ने ट्वीट करते हुए लिखा है-

रांची, झारखंड के नवयुवक संघ को राजद परिवार तहेदिल से आभार प्रकट करता है कि आपने ग़रीबों, उपेक्षितों, उत्पीडितों, उपहासितों, वंचितो के मसीहा लालू जी के सामाजिक कार्यों को कला के माध्यम से रेखांकित करने का सराहनीय कार्य किया है। आप इसके लिए बधाई के पात्र हैं। आपको ढेर सारी शुभकामनाएँ।

राजद के इस ट्वीट के बाद राजनीति छिड़ गई है। लोग नवयुवक संघ पूजा कमिटी से सवाल पूछने लगे हैं कि आखिर क्यों लालू यादव और राबड़ी देवी की मूर्ति दुर्गा पूजा वाले पंडाल में रखा गया है? बवाल इस कदर हुआ है कि नवयुवक संघ को इस बारे में सामने आकर जवाब देना पड़ा है।

पूजा आयोजक ने दी सफाई

पूजा पंडाल के आयोजक और आरजेडी महासचिव विनय सिंह का कहना है कि जब मंदिर में गोडसे की पूजा हो सकती है तो गरीबों के मसीहा लालू प्रसाद यादव की क्यों नहीं? हमने कोई राजनीति करने की कोशिश नहीं की हैं। हमनें तो हाथ जोड़े लालू और राबड़ी देवी जी की प्रतिमा लगाई हैं। हम चाहते हैं कि लालू जी जल्द से जल्द ठीक हो जाए। इसके लिए हमने नवरात्रि के दसवें दिन एक यज्ञ का आयोजन किया है।

मां दुर्गा के पंडाल में लालू-राबड़ी की मू्र्तियां, फोटो सोर्स: गूगल
मां दुर्गा के पंडाल में लालू-राबड़ी की मू्र्तियां, फोटो सोर्स: गूगल

विनय सिंह ने यह बयान तो दे दिया लेकिन, शायद उन्हें यह बात समझनी चाहिए कि किसी इंसान की मूर्ति को भगवान के बगल में खड़े करके उसके स्वस्थ होने की कामना नहीं की जाती है। और भी कई सारे तरीके हैं इसके लिए। विनय सिंह के बयान पर बवाल होता देख आरजेडी ने उसका जवाब भी दिया। अब इसे जवाब कहे या फिर इस पर और भसड़ मचाने का इंतजाम। क्योंकि जिस तरह से आरजेडी का जवाब आया है वो कई सारे सवाल खड़े कर रहा है

आरजेडी ने ट्वीट करते हुए लिखा-

आसाराम की पूजा की जा सकती है। राम-रहीम की पूजा की जा सकती है। चिन्मयानंद की पूजा की जा सकती है। पर विवाद तब उठता है जब हाथ जोड़ दुर्गा के सामने खड़े लालू जी और राबड़ी देवी जी की प्रतिमा लगा दी जाती है। विवाद तब उठता है जब कमल की जगह सजावट के लिए पंडाल में लालटेन लगा दिया जाता है।

शायद राजद का यह ट्वीट करने से पहले उन नेताओं का परिणाम के बारे में जानकारी नहीं इकट्ठा कर पाई है जिनका नाम उन्होंने ट्विटर में लिया है। ‘आसाराम, राम-रहीम, चिन्मयानंद ये सभी नेता इस वक्त जेल में है। ऐसे में यह बयान देना कितना सही है आप समझ सकते हैं।

एक तरफ राजद यह कह रही है कि हम कोई राजनीति नहीं कर रहे हैं लेकिन, दूसरी तरफ कमल के जगह लालटेन लगाना और यह कहना कि कमल पर कभी राजनीति नहीं होती है, राजनीति केवल लालटेन की सजावट पर शुरु होती है। तो राजद को समझना चाहिए कि कमल होता ही है सजाने के लिए। अब अगर राजनीतिक एंगल से न देखा जाए तो, लालटेन और कमल का क्या काम है यह बखूबी सभी जानते हैं। ऐसे में इस तरह का तर्क देना कही से भी सही नहीं लगता।

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