अगर आप भारत में रह रहे हैं और चुनावी साल में अगर आप चाहते हैं कि आपको देश, दुनिया और आस-पास की खबरें मिलें तो अपनी चाहत बदल लीजिये साहब. अपने परिवार को समय दिजिये कहीं घूम फिर कर आइये कहीं एकांत में जाइये जहां सच में एकांत हो. जहां 50-50 रुपये में फोटो खींचने वाले आपके पीछे न पड़ें. क्या एकांत वर्ड सुन कर आपको एकांत में गए मोदी जी की याद तो नहीं आ गयी. हम असली वाले एकांत की बात कर रहे हैं.

सात चरण का चुनाव डेढ़ महीने में खतम हो जाता है लेकिन न्यूज़ वालों का चुनावी ज्ञान पूरा साल चलता रहता है. आज तक जब भी आप स्कूल में एग्जाम देकर आए हैं, अगले दिन स्कूल जाने पर किसी मास्टर ने आपको कहा है कि ‘मुझे अनुमान है कि फलाना बच्चा फलाने बच्चे से इतना अंक आगे रहेगा’ नहीं ना! एग्जाम के बाद रिज़ल्ट का दिन आता है उस दिन पता चल जाता है कौन पास हुआ और कौन फ़ेल. उसी प्रकार चुनाव आयोग ने 23 मई का दिन क्यों रखा है? चुनाव का रिज़ल्ट आएगा सबको पता लग जाएगा कौन जीता.

पोल रिज़ल्ट फोटो सोर्स- गूगल

ऊपर आपको इतना ज्ञान इसलिए दिया गया है क्योंकि हमारे भाई बंधु ही अपना काम वफादारी से नहीं कर रहे हैं. न्यूज़ वाले चुनाव के परिणाम जबरदस्ती लोगों को पकड़-पकड़ कर दिखा रहे हैं. एक और नई चीज़ देखेंगे आप. 5 साल तक यह कुछ बंदों को अंडरग्राउंड रखते हैं जैसे ही चुनाव का समय आता है ये कहीं बंकरों से बाहर निकल आते हैं न्यूज़ एंकर्स इन्हें चुनाव के एक्स्पर्ट कहकर बुलाते हैं. ये एक्सपर्ट्स, चुनाव में कौन जीतेगा इसका अनुमान लगाते हैं. अगर इनका अनुमान इतना ही सटीक होता है तो चुनाव आयोग काउंटिंग में इतना खर्च क्यों करती है? चुनाव के बाद ऐसे ही 10-20 लोगों को देश भर में भेज कर सर्वे करा लेने चाहिए उसके बाद यह सर्वे का विश्लेषण करके यही लोग नतीजा बता देंगे. ये भी 5 साल तक बेरोजगार नहीं रहेंगे, सरकार के पास रोजगार देने का एक और माध्यम आ जाएगा.

सारा मीडिया एक ही भेड़ चाल में लगा है कि जीतेगा कौन? आएगा कौन?

सोर्स-गूगल

हर व्यक्ति जो भी वोट देकर आता है वह यही सोचता है कि उसने जिसको वोट दिया है वही जीतेगा. इसके पीछे लॉजिक भी है. फ्रेंडसर्कल के सारे लोग भी एक ही पार्टी के आस पास होते हैं. ऐसे लोग वोट देने के बाद उंगलियों में ही गिन लेते है कि हमारे सभी दोस्त तो फलाने पार्टी को वोट कर रहे हैं तो वही जीतेगा और यही सोचकर खुश हुआ रहता है. सब अपने नशे में धुत है. मतलब आप चार गली बदल लो चुनाव नतीजा बदल जाता है. उदाहरण के तौर पर बताए तो एक गली में जहां बीजेपी जीत रही होती है चार गली छोड़कर कांग्रेस जीत रही होती है, फिर दो गली बदलते ही आम आदमी पार्टी जीत जाती है.

फोटो सोर्स- गूगल

मुझे तो लगता है एकांत वास का सहारा जो मोदी जी ने लिया है वह चैनलों के डर से लिया है. उन्हें डर था कि अपना नाम सुन सुन कर पक न जाएं इसलिए खुद वह पहाड़ों की ओर चल पड़े. जब पूरा देश जानता है कि कौन आएगा तो चैनल वाले किसको बताने की कोशिश कर रहे हैं?

पता तो सबको है कि आएंगे तो……….

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