2019 की चुनाव तारीखों का ऐलान होते ही संग्राम शुरु हो गया है. हो भी क्यों न आख़िर चुनाव के दौरान रमज़ान जो पड़ रहा है। 10 मार्च को चुनाव तारीखों की घोषणा करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने बताया कि इस बार सात चरणों में लोकसभा चुनाव कराए जाएंगे. 11 अप्रैल को पहले चरण की वोटिंग के बाद 18 अप्रैल, 23 अप्रैल, 29 अप्रैल, 6 मई, 12 मई और 19 मई को बाकी चरणों की वोटिंग होनी है.

रमज़ान के दौरान चुनाव पर राजनैतिक पार्टियों का बड़बोलापन

धार्मिक मुद्दों को लपकने में नेताओं को महारथ हासिल हैं, अब पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ही देख लिजिए, उन्होंने चुनावी तारीख को बीजेपी का गेम प्लान बता दिया. इसके बाद ममता सरकार में मंत्री फिरहाद ने कहा रमज़ान के दौरान चुनाव करवाना कहीं अल्पसंख्यकों को वोट देने से वंचित करने की बीजेपी की साजिश तो नहीं हैं, लेकिन हम इससे चिंतित नहीं हैं। लोग भाजपा हटाओ-देश बचाओं को लेकर प्रतिबध्द हैं. जनाब जब चिंतित नहीं हैं तो बेकार में इतना ज्ञान काहे दे दिए?  ये ज्ञान अगर अपने पूर्व कमिश्नर को दिए होते तो सीबीआई विवाद नहीं हुआ होता।

गनीमत ये रही कि रमज़ान में मतदान को लेकर जारी विवाद के बीच AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि कुछ लोग बेवज़ह विवाद पैदा कर रहे हैं. रमज़ान में चुनाव तारीखों का स्वागत करता हूं. उन्होंने कहा कि हम रमज़ान में रोज़ा रखेंगे और वोट भी डालेंगें।

केंद्र सरकार ने चुनाव के तारीखों का स्वागत करते हुए इसे ‘लोकतंत्र का महापर्व’ बताया। साथ ही निर्वाचन आयोग के सात चरणों में मतदान कराए जाने के फैसले का स्वागत भी किया है। वहीं आप के विधायक अमानतुल्लाह खान ने कहा-

12 मई को दिल्ली में मतदान और रमज़ान साथ पड़ने से मुसलमान वोट कम करेंगे इसका सीधा फायदा बीजेपी को होगा.

जनाब ने लगता है जैसे मुसलमानों के वोटों पर कॉपीराईट करवा रखा है।

 रमज़ान को लेकर चुनाव आयोग का ज्ञान

रमज़ान के दौरान मतदान पर चुनाव आयोग ने कहा शुक्रवार और त्योहारों के दिन मतदान नहीं हैं. आयोग ने कहा पूरे महीनें को नहीं छोड़ा जा सकता था। शुक्र है कि आयोग ने नेताओं के ज्ञान को ग्रहण नहीं किया क्योंकि यही तो खूबसूरती है भारतीय चुनाव की. 23 मई को चुनाव परिणाम घोषित होते ही 30 को लोकसभा चुनाव के महापर्व का समापन हो जाएगा।

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