इस बार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे रामविलास पासवान, एनडीए सरकार की बढ़ी मुश्किलें

चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की तारीख घोषित करने के बाद सभी राजनीतिक पार्टियों के बीच चुनाव को लेकर चर्चाएं शुरु हो चुकी हैं। 7 चरणों में होने वाले इस चुनाव में केवल तीन ऐसे राज्य है जहां सातों चरणों में चुनाव होगा जिसमें बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। अगर बात करें बिहार की तो इस बार का चुनाव पिछले चुनाव यानि 2014 में हुए चुनाव से बिल्कुल अलग होने वाला है।

पिछले चुनाव में बिहार के लोगों ने नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री के रुप में स्वीकार किया था जिसके लिए बिहार की कुल 40 लोकसभा सीटों में से एनडीए 22 सीटों पर जीत हासिल करने में सफल रही थी। बाकि अन्य पार्टियों में लोजपा को 6, राजद को 4, जदयू को 2, कांग्रेस को 2 और एमसीपी को 1 सीट पर जीत हासिल हुई थी। लेकिन इस बार का जो चुनावी दौर है वह कोई और ही कहानी बयां कर रहा है। इस बार के लोकसभा चुनाव में बीजेपी और जद-यू के साथ लोजपा शामिल तो है लेकिन जिस तरह की खबरें आ रही है उससे लोजपा की कठिनाइयां बढ़ सकती हैं।

सीटों के समीकरण को सुलझाने के बाद एनडीए-जदयू के बीच 17-17 सीटें तो वहीं लोजपा के खाते में 6 सीटें आई हैं। बिहार में इस बार की चुनावी रेस मोदी-नीतीश के एनडीए औऱ महागठबंधन के बीच होने वाली है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन एनडीए को कड़ी टक्कर देती दिखाई दे रही हैं। वहीं इस बार उपेन्द्र यादव और मुकेश निषाद ने महागठबंधऩ में शामिल हो कर इस लोकसभा चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है।

उपेन्द्र कुशवाहा और जहांनाबाद सांसद अरुण कुमार, फोटो सोर्स: गूगल

एक तरफ जहां जदयू ने लोकसभा सीटों को लेकर सवाल उठाएं थे तो वही क्षेत्रीय पार्टियों ने भी सीटों को लेकर सवालिया निशान खड़े कर दिए थे। आरएलएसपी प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा का कहना था कि पिछली बार की तरह इस बार भी उन्हें चार सीटें मिलनी चाहिए लेकिन जहांनाबाद सांसद अरुण कुमार के अलग पार्टी बनाने के बाद एनडीए ने यह साफ कर दिया कि आरएलएसपी को केवल 2 ही सीटें मिलेंगी। जिसके बाद उपेन्द्र कुशवाहा ने बीजेपी को छोड़कर महागठबंधन का दामन थाम लिया।

पार्टी में आए इस बदलाव के बाद लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान ने भी सीटों को लेकर आपत्ति जताई है और मोदी-नीतीश के सामने एक शर्त रखी है कि अगर पार्टी को 6 सीटें मिलती है तो वह लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, जिसके बाद एनडीए सरकार एक बार फिर से नए सिरे से सोचने पर मज़बूर हो गई है। ऐसा पहली बार होगा कि पिछले 50 सालों में पहली बार रामविलास पासवान चुनाव नहीं लड़ेंगे।

रामविलास पासवान, रीना पासवान और चिराग पासवान, फोटो सोर्स: गूगल

ऐसे में हाजीपुर से चुनाव कौन लड़ेगा? इस समस्या से भी पार्टी को निपटना होगा क्योंकि, चिराग पासवान पहले ही जमुई से चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं। पत्नी चुनाव लड़ना नहीं चाहती। इस तरह देखा जाए तो इस बार हाजीपुर लोकसभा सीट के लिए भी किस उम्मीदवार को चुना जाए, ये भी एक पार्टी के सामने चुनौती होगी। इन राजनीतिक आंकड़ों में उलझती दिख रही बिहार की राजनीति आगे कौन-सी करवट लेती है, यह देखना काफी दिलचस्प होगा।

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