मानो या ना मानो लेकिन, दुनिया में सबसे कम बेरोजगारी दर भारत में है.

ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि, इंटरनैशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (ILO) ने एक रिपोर्ट जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि भारत दुनिया के सबसे कम बेरोजगारी दर वाला देश है. वैसे तो इस आंकड़े पर यकीन करना बहुत ही मुश्किल काम है लेकिन, इंटरनैशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन दुनिया की एक सम्मानित संस्था है जो दुनिया में रोजगार तथा बेरोजगारी को लेकर आंकड़े पेश करती है. इसलिए ILO ने भारत में बेरोजगारी को लेकर जो आंकड़े पेश किये हैं, वो सच भी हो सकता है. क्योंकि इस बात की पुष्टि भारत सरकार में श्रम और रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने राज्यसभा में बुधवार को को यह जानकारी दी है.

प्रतीकात्मक तस्वीर ( फोटो सोर्स गूगल)

अभी हाल ही में अप्रैल महीने में हफिंगटन पोस्ट ने ‘स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2019′ द्वारा जारी एक रिर्पोट को प्रकाशित किया था जिसके मुताबिक नोटबंदी के कारण 50 लाख लोग बेरोजगार हो गये थे. रिपोर्ट के अनुसार साल 1999 से 2011 तक बेरोजगारी दर दो से तीन फीसदी के आसपास रहने के बाद यह 2015 में बढ़कर पांच फीसदी हुई और 2018 में छह फीसदी से अधिक हो गई. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018 में पूर्ण बेरोजगारी दर छह फीसदी के आसपास रही, जो 2000 से 2011 की तुलना में दोगुनी है.

क्या सच में दुनिया में सबसे कम बेरोजगारी भारत में है?

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आइएलओ) के मुताबिक भारत में बेरोजगारी की दर दुनिया में सबसे कम है. श्रम और रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने बुधवार को राज्यसभा में इस आंकड़े पर जानकारी दी है. संतोष गंगावर ने बुधवार को राज्यसभा में बताया कि सरकार इस आंकड़े से संतुष्ट नहीं है. मंत्री ने प्रश्नकाल के दौरान कहा कि आइएलओ की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में बेरोजगारी की दर 3.5 फीसद दर्ज की गई है. यह दर चीन में 4.7 फीसद और एशिया प्रशांत में 4.2 फीसद है.

मंत्री ने कहा कि चुनाव से पहले जो आंकड़े उछाले गए हैं, वो सही नहीं हैं. आइएलओ की रिपोर्ट के आधार पर भारत में बेरोजगारी की दर सबसे कम है. भारत की स्थिति अन्य देशों से बेहतर है. लेकिन हम इससे संतुष्ट नहीं है. प्रधानमंत्री देश में सुधारों के बारे में बात कर रहे हैं. देश में रोजगार का कोई अभाव नहीं है. लेकिन लोग स्थायी और सरकारी नौकरी चाहते हैं.

अनौपचारिक क्षेत्र में रोजगार में गिरावट के सवाल पर उन्होंने कहा कि अनौपचारिक क्षेत्र में गिरावट पर हमारे पास कोई सूचना उपलब्ध नहीं है. सत्ता में आने के बाद से ही सरकार ने इस क्षेत्र में काफी बढ़-चढ़कर काम किया है. सरकार रोजगार देने को लेकर काफी सक्रिय है. औपचारिक क्षेत्र में हर साल एक करोड़ रोजगार पैदा हो रहे हैं.

राज्यसभा में बेरोजगरी पर आंकड़ा पेश करते श्रम और रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार (फोटो सोर्स गूगल)

उनसे यह सवाल भी पूछा गया कि सरकारी नौकरियों की कुछ श्रेणी के लिए इंटरव्यू प्रक्रिया खत्म करने का फायदा क्या वाकई बेरोजगारों को मिल रहा है? इसके जवाब में मंत्री ने कहा कि ‘D’ कैटिगरी के पदों के लिए इंटरव्यू की प्रक्रिया खत्म की गई है और इसका फायदा हो रहा है. हर साल 10-12 फीसद पद खाली हो रहे हैं और हम उन पर बहाली करने को लेकर काम कर रहे हैं. इस प्रक्रिया में नौकरी देने में एक साल लग जाता है.

देश में रिक्तियों और संभावित बहाली के आंकड़े रखने के लिए एक संस्थानिक प्रणाली बनाने की मांग वाले सवाल पर मंत्री ने कहा कि सरकारी नौकरियों के मामले में एक निश्चित प्रणाली मौजूद है. पिछले पांच साल में यूपीएससी और एसएसई के तहत 2,45,470 सरकारी नौकरियों दि गई हैं. इसके अलावा, सरकार पदों को भरने के लिए एजेंसियां भी नियुक्त कर रही है. हमारा प्रयास रहता है कि हम समय-समय पर नियुक्तियों के बारे में जानकारी देते रहें.

2019 लोकसभा चुनाव के समय विपक्ष ने बेरोजगारी का मुद्दा जमकर उठाया था. लेकिन जिस तरह से विपक्षी पार्टियों को हार मिली है, इससे तो लगता है कि विपक्ष जनता को समझाने में नाकाम रहा या जनता इसे समझना ही नहीं चाहती है. लेकिन, जिस तरह से एक के बाद एक आकंड़े आ रहे हैं, इससे समझना बहुत ही मुश्किल है कि क्या सच में बेरोजगारी बढ़ रही है या घट रही है. ऐसा इसलिए क्योंकि जमीनी स्तर पर तो कुछ और ही दिखता है.