देश की राजधानी दिल्ली हर रोज अख़बारों के पहले पन्ने पर आने का कोई न कोई कारण ढूंढ ही लेती है. कारण अच्छा या बुरा कैसा भी हो सकता है. इस बार भी दिल्ली ने एक नया कारण ढूंढ लिया है.

साल 2018 में दिल्ली वालों ने 38.3 टन गांजा फूंका, ऐसा जर्मनी की एक डाटा इकट्ठा करने वाली एक कम्पनी ने अपनी रिसर्च में पाया। यदि दुनिया के बाकी बड़े शहरों से तुलना की जाए तो, दिल्ली सबसे ज़्यादा गांजा फूंकने की लिस्ट में तीसरे पायदान पर आती है. मुंबई भी इस लिस्ट में ज़्यादा पीछे नहीं है. 32.4 टन गांजा फूंक कर मुम्बईकर छठे पायदान पर खड़े हैं.

टॉप दस की लिस्ट में भारत के दो ही शहर हैं. जबकि संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के तीन शहर. 77.4 टन गांजा फूंक कर न्यू यॉर्क सबसे बड़ा गंजेड़ी शहर बना है. अमेरिका के ही लॉस एंजेलेस और शिकागो चौथे और आठवें स्थान पर हैं. पड़ोसी पाकिस्तान भी इस दौड़ में पीछे नहीं है. पाकिस्तान की राजधानी कराची हर साल 41.95 टन गांजा धुआं कर देती है.

Report on marijuana consumption
सोर्स- ABCD एजेंसी

यह डाटा ABCD नाम की डाटा इकट्ठा करने वाली मीडिया कंपनी ने छापा है. दुनिया के अधिकतर देशों में गांजा (marijuana) लेना अभी गैर-क़ानूनी है. ABCD कम्पनी गांजा फूंकने को क़ानूनी रूप से वैध करने के पक्ष में है.

गांजे को लीगल करने के पक्ष में ABCD ने अपनी तरफ से दलीलें भी दी हैं. यदि गांजे को लीगल कर दिया जाता है तो राज्य सरकारें मोटा टैक्स कमा सकती हैं.

यदि दिल्ली में गांजे को लीगल कर दिया जाए और उस पर सिगरेट के बराबर टैक्स लगा दिया जाए तो अकेली दिल्ली ही $101.2 मिलियन (725 करोड़ रूपये) कमा सकती है. मुंबई सरकार के खाते में भी गांजा लीगल करने के बाद एक साल में $89.38 मिलियन (641 करोड़ रूपये) आ जाएंगे।

गांजे की एक्सपर्ट दिल्ली पुलिस

ऐसा नहीं है कि गांजे को लीगल करने का ये आईडिया पहली बार किसी ने दिया है. दुनिया में कुछ जगहें ऐसी भी हैं जहाँ गांजा पीना लीगल है. कनाडा में इलेक्शन जीतने के साथ ही जस्टिन ट्रूडो ने कनाडा की संसद में गांजे को लीगल करने वाला बिल ला दिया था. अमेरिका में भी कई राज्य ऐसे हैं जहाँ गांजे को न केवल मेडिकल इस्तेमाल के लिए, बल्कि नशे के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

वैसे, सबसे ज़्यादा पीने वाले टॉप दस शहरों में से सबसे सस्ता गांजा भारत के दोनों शहरों में ही मिलता है. दिल्ली में गांजा 4.38 अमेरिकन डॉलर प्रति ग्राम मिलता है, मुंबई में गांजा 4.57 अमेरिकन डॉलर प्रति ग्राम मिलता है. इसकी तुलना में न्यू यॉर्क में गांजा 10.76 अमेरिकन डॉलर प्रति ग्राम मिलता है.

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पश्चिमी देशों में गांजे पर कानूनों पर काफी चर्चा होती है. यहाँ तक कि चुनावों में प्रतियोगियों को गांजे को लेकर अपना स्टैंड भी बताना पड़ता है. लेकिन, भारत में ऐसा कुछ नहीं है. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद शायद लोगों को ये जरूरत महसूस हो कि छुप कर तो सब पीते ही हैं, क्यों न गांजे पर बात ही कर ली जाए?