कवि विनीत चौहान ने देश की सुरक्षा में शहीद होने वाले जवानों और नेताओं की राजनीति पर एक शानदार कविता लिखी है। जिसकी कुछ पंक्तियां इस तरह हैं-

तूने दस-दस लाख दिए हैं वीरों की विधवाओं को, सोचा कीमत लौटा दी है वीर प्रसूता मांओं को,
लो मैं बीस लाख देता हूं तुम किस्मत के हेटों को हिम्मत है तो मंत्री भेजे लड़ने अपने बेटों को।

यह महज कुछ पंक्तियों की कविता नहीं है बल्कि हमारे समाज की एक कड़वी सच्चाई है। सेना, अर्धसैनिक बल और देश भर में तैनात पुलिस जवानों के नाम पर राजनीति करने वाले नेताओं को देश की सुरक्षा में लगे इन जवानों के मां-बाप के दर्द का एहसास नहीं होता है। ये बात साध्वी प्रज्ञा ने अपने बयानों से साबित कर दी है।

दरअसल, साध्वी प्रज्ञा ने शहीद करकरे पर आरोप लगाया है कि 26/11 हमले में शहीद हुए एटीएस चीफ हेमंत करकरे को उनके कर्मों की सजा मिली है। साध्वी का यह बयान आज के नेताओं के असली चेहरे को उजागर करता है।

हेमंत करकरे हमारे लिए शहीद हैं। देश की हिफ़ाजत में करकरे ने बिना अपनी मां, पत्नी और बच्चों की परवाह किए अपने प्राण की आहुति दे दी। देश भर के लोगों को करकरे के बलिदान पर फ़क्र और गर्व है। हेमंत हमारे लिए मरे नहीं हैं बल्कि अमर हो गए हैं।

उस रात मुंबई में यदि हेमंत जैसे ईमानदार और काबिल पुलिस अधिकारी नहीं होते तो आतंकी घटना की पीड़ा और भी गहरी हो सकती थी। हेमंत ने आतंकियों से लड़ते हुए अपनी जान गंवाई है।

साध्वी प्रज्ञा ने जो कहा है वो सिर्फ शहीद करकरे की बेदाग छवि पर उछाला गया कीचड़ नहीं है बल्कि वह कीचड़ इस मुल्क के आम-आवाम के चेहरे पर लगा है। अपने चेहरे पर लगे कीचड़ को हटाना हम सबों के लिए इतना आसान भी नहीं होगा क्योंकि हमारे समाज ने ही इन जैसे जाहिल नेताओं को अपने सिर पर बिठा रखा है। कभी धर्म के नाम पर तो कभी शहीदों की लाश पर राजनीति की रोटी सेंकने वाले ये नेता अब शहीदों के दामन पर दाग लगाने की जहमत भी उठाने लगे हैं।

पिछले दिनों भोपाल में मीडिया से मुखातिब होते हुए साध्वी प्रज्ञा ने कहा – ‘एटीएस मुझे 10 अक्टूबर 2008 को सूरत से मुंबई लेकर गई थी। वहां 13 दिन तक बंधक बनाकर रखा गया। पुरुष एटीएस कर्मियों ने इस दौरान मुझे खूब प्रताड़ित किया। पूर्व एटीएस चीफ हेमंत करकरे को संन्यासियों का श्राप लगा और मेरे जेल जाने के करीब 45 दिन बाद ही वह 26/11 के आतंकी हमले का शिकार हो गए।’

फोटो सोर्स- गूगल

साध्वी का यह बयान बेहद निचले स्तर का है। साध्वी को इतना तो समझना ही चाहिए कि अपनी ड्यूटी निभाते हुए कोई जवान किसी के श्राप की वज़ह से शहीद नहीं होता है। बल्कि वह अपने मुल्क और तिरंगे की शान को बचाए रखने के लिए शहीद होता है।

देश के अंदर और देश की सीमा पर शहीद होने वाले देशभक्त क्या किसी साधू के श्राप से मरते हैं? ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। वो देश के करोड़ों लोगों और लाखों परिवारों की हिफ़ाज़त के लिए शहीद होते हैं। ऐसे में साध्वी द्वारा यह कहना कि ‘बुरे कर्मों की वज़ह से करकरे मरे’ ये न सिर्फ ग़लत बल्कि घटिया है।

साध्वी के इस बयान के बाद भाजपा को सफाई देनी पड़ी है। भाजपा ने जो कहा वो किसी भी तरह से पर्याप्त नहीं है। भाजपा का ओर से सफाई में मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने कहा कि हमारी पार्टी ने हेमंत करकरे को हमेशा शहीद माना है। साध्वी प्रज्ञा ने जो कहा वो उनका निजी बयान है।भाजपा ने जो अपनी सफाई में कहा है नीचे उसे आप खुद पढ़िए।

इसके साथ ही एक बात जो स्पष्ट हो गई वो ये है कि देश की राष्ट्रवादी पार्टी होने का ढोल पीटने वाले भाजपा के नेता शहीदों का सम्मान करना नहीं जानते हैं। कायदे से साध्वी के इस बयान के बाद अमित शाह को साध्वी का टिकट वापस ले लेना चाहिए। यह कैसे हो सकता है कि सेना के नाम पर चुनाव में वोट भंजाने वाली पार्टी ही, शहीद के दामन पर दाग लगा रहे एक नेता को टिकट देकर लोकतंत्र के मंदिर में पहुंचा दे। यदि जीतकर साध्वी संसद तो उस रोज संसद के ऊपर लहरा रहे तिरंगे को भी दर्द होगा। तिरंगे को भी लगेगा कि हमारी हिफ़ाज़त के लिए जिसने जान दी उस शहीद को गाली देने वाली नेता आज लोकतंत्र के मंदिर में बैठी हुई है।

शहीद हेमंत करकरे की शव यात्रा के दौरान की तस्वीर, फोटो सोर्स – गूगल

ये है पूरा मामला

मालेगांव ब्लास्ट केस में साध्वी प्रज्ञा आरोपी है। इस मामले में जमानत मिलने के बाद रिहा हुई साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने कांग्रेस और एटीएस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। साध्वी का आरोप है कि कांग्रेस ने उन्हें पूरी तरह से खत्म करने का षडयंत्र रचा था। साध्वी ने एटीएस पर भी उन्हें प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।

साध्वी प्रज्ञा शहीद करकरे पर इसलिए गुस्सा करती है क्योंकि हेमंत करकरे मालेगांव ब्लास्ट मामले में जांच करने वाले एटीएस दल के अधिकारी थे। हेमंत करकरे बेहद ईमानदार ऑफिसर साध्वी मामले में भी उन्होंने बेहद सख्ती बरती थी। यही वजह है कि शहीद करकरे के नाम भर से साध्वी गुस्से में आ जाती हैं।

बता दें कि साल 2008 में हुए 26/11 मुंबई हमले में मारे गए 166 लोगों के अलावा आतंकियों की गोलियों से मुंबई एटीएस चीफ हेमंत करकरे, एसीपी अशोक कामटे और एनकाउंटर विशेषज्ञ विजय सालस्कर सहित 17 पुलिसकर्मी भी शहीद हो गए थे।

ये सब चुनावी ड्रामा से ज्यादा कुछ नहीं

2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले इंजीनियर डिग्रीधारी दिग्विजय सिंह को भोपाल से टिकट दिया है तो भाजपा ने जवाब में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को उतारा है। प्रज्ञा सिंह ठाकुर मालेगांव विस्फोट मामले की आरोपी हैं और सबूतों के अभाव में अप्रैल 2017 से जमानत पर हैं। दिलचस्प यह है कि इंजीनियर दिग्विजय के मुकाबले में उतरी प्रज्ञा इतिहास की विद्यार्थी रही हैं और लोकसभा चुनाव 2019 में दिग्विजय को उनका इतिहास भी जोरदार चुनौती देगा।