मार्च 2017 से लेकर 31 अप्रैल 2019 तक जापान में एक कार्यक्रम चलाया गया। इस कार्यक्रम का नाम दिया गया  ‘टोक्यो 2020 मेडल प्रोजेक्ट’ जिसमें, जितने भी घर में बेकार पड़े इलेक्ट्रॉनिक सामान थे उसे आयोजक समिति को दान दिया गया। फिर आयोजक समिति ने उन सामानों को रिसाइकल किया और उससे ही ओलंपिक 2020 का मेडल तैयार कर दिया। इस पूरे टूर्नामेंट में 5,000 मेडल दिए जाएंगे। चलिए ये तो हो गई जापान की बात लेकिन, इस बीच भारत सरकार ने ओलंपिक में भाग लेने वाले खिलाड़ियों के पैसे ही कम कर दिए हैं।

खेल मंत्री किरण रिजिजू, फोटो सोर्स: गूगल

खेल मंत्री किरण रिजिजू, फोटो सोर्स: गूगल

टोक्यो ओलंपिक में सिर्फ 9 महीने कम हैं लेकिन, इसकी तैयारी में जुटे खिलाड़ियों के खाने और फूड सप्लीमेंट के पैसे कम कर दिए गए हैं। अलग-अलग सेंटरों में तैयारी कर रहे देश के जाने-माने खिलाड़ियों को सप्लीमेंट देना बंद कर दिया गया है। कोचेज और खिलाड़ियों ने सेंटर के इंचार्जों से सप्लीमेंट दिए जाने की अपील की है। ओलंपिक खेलों में अभी तक 1440 (690+750) रुपये प्रतिदिन के हिसाब से खिलाड़ियों को खाना और फूड सप्लीमेंट दिया जाता है, जिसे अब महज 375 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है।

खेल मंत्रालय और साई (Sports Authority of India) का तर्क है कि 690 रुपये खाने के लिए ज्यादा हैं। अब तक खिलाड़ियों को जितनी रकम दी जाती थी, उसे खिलाड़ी इधर-उधर कर दिया करते थे।

खेल मंत्री किरण रिजिजू जब खेल मंत्री बने थे तो, उस वक्त उनसे पूछा गया कि क्या आप राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के कामों को ही आगे बढ़ाएंगे? इस सवाल पर उनका जवाब था कि

निरंतरता नाम की भी कोई चीज़ होती है। उनके द्वारा किए गए कामों को ही मैं आगे बढ़ाऊंगा लेकिन, साथ ही खेलो इंडिया, जिसे पीएम मोदी ने शुरु किया था, उस प्रोग्राम को भी आगे बढ़ाने का प्रयास करुंगा। ताकि आधुनिक खेलों के साथ पारंपरिक खेलों को बढ़ावा दिया जा सके। हमारा ध्यान पारंपरिक खेल प्रतियोगिताओं से लेकर राष्ट्रीय खेल, एशियाई खेल और ओलंपिक पर होगा। 

खेल मंत्री किरण रिजिजू का दिया यह बयान कि ओलंपिक खेलों को भी आगे बढ़ाया जाएगा, हो सकता है कि चरमराती अर्थव्यवस्था के आगे ढीले पड़ गए होंगे। पहले संसद भवन में चलने वाले मेस को बंद करने के बाद अब खिलाड़ियों के खाने पर भी ध्यान चला गया। लेकिन, यहां मंत्री महोदय को यह बिल्कुल समझना चाहिए कि संसद भवन में चल रहे मेस में वो लोग भी आते थे जो, नेताओं के साथ केवल घूम कर मुफ्त की रोटियां तोड़ते थे लेकिन, इन खिलाड़ियों को तो पहले नाम रजिस्टर किया जाता है तब जाकर खाना उपलब्ध करवाया जाता है। ऐसे में इस तरह का फैसला कितना तार्किक है, यह फिलहाल समझ से परे है।

खिलाड़ियों के रुम में पाया गया है बाहरी सप्लीमेंट

एथलेटिक्स, वेट लिफ्टिंग, बॉक्सिंग, कुश्ती, वूशु जैसे पॉवर खेलों के अलावा अन्य खेलों में Sports Authority of India यानि SAI की ओर से नेशनल कैंप के दौरान खाना और फूड सप्लीमेंट दिया जाता है। जिसके बाद SAI की ओर से एक आदेश जारी किया गया जिसके अनुसार, असीमित उच्चस्तरीय खाने और सप्लीमेंट के लिए 375 रुपये प्रतिदिन और साल में 320 दिनों के लिए 1 लाख 20 हज़ार रुपये निर्धारित किया गया है। पहले यही 70 किलो से ऊपर के खिलाड़ियों के लिए 690 रुपये प्रतिदिन खाने पर और 750 रुपये सप्लीमेंट के रुप में मिलते थे। 70 किलो से नीचे के खिलाड़ियों के लिए 430 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से फूड सप्लीमेंट दिया जाता था।

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल

जब सप्लीमेंट देना बंद कर दिया गया है तो, सभी खिलाड़ियों ने बाहर से ही सप्लीमेंट लेना शुरु कर दिया है। मतलब सप्लीमेंट जिस वजह से बंद किया गया है, वहीं और ज्यादा खुले तौर पर वही चीज़ खिलाड़ियों ने शुरु कर दिया है। पहले एक समय था जब SAI कैटरर्स को बाहर से अनुबंधित किया करती थी लेकिन, अब खिलाड़ियों के लिए खाना खुद ही तैयार कर रही है। इतना ही नहीं SAI ने शेफ़ भी अनुबंधित किए हुए हैं। अब यह काफी शर्मनाक है Sports Authority of India के लिए कि उसे खिलाड़ियों को खाने पर खर्च करने के लिए जितनी रकम मिलती थी, उसमें भी वह घोटाला कर रहे हैं।

आज पूरे भारत को यही उम्मीद है कि इस बार ओलंपिक में भारत पहले से बेहतर प्रदर्शन करेगा। हर भारतीय अपने खिलाड़ियों से गोल्ड की ही उम्मीद कर रहा है लेकिन, जब खिलाड़ियों की बेसिक ज़रुरत ही नहीं पूरी होगी तो, कैसे देश में मेडल आएगा? आज के समय में ऐसा लगता है कि भारत केवल क्रिकेट के पीछे ही खर्च करता है लेकिन, अन्य खेलों को क्रिकेट की तुलना में कुछ ज्यादा तवज्जों नहीं दी जाती है। क्रिकेटर्स की पानी की बोतल 700-1900 रुपये तक होती है लेकिन, ओलंपिक के खिलाड़ी जिनको पॉवर के बल पर ही मैच जीतना है, उन्हें खाने के लाले पड़े हैं।