पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान से सबक लेने की मांग हो रही है। लेकिन हमने अपने ही देश के लोगों से सबक लेना का ठान लिया है। कई राज्यों से खबर आई हैं कि कश्मीरियों को पीटा जा रहा है, उनकी दुकानें बंद की जा रही है। देहरादून में तो कश्मीरी छात्राओं ने अपने को एक कमरे में बंद कर लिया था। ऐसे ही घटनायें बिहार और पश्चिम बंगाल में भी हुई हैं। जिसके बाद एक फैसला सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आया और एक उत्तराखंड सरकार की ओर से।

उत्तराखंड में पढ़ने वाले कश्मीरी छात्रों के लिए सरकार क्या कर रही है?

SC का आदेश

पुलवामा आतंकी हमले पर कश्मीरियों की सुरक्षा को देखकर सुप्रीम कोर्ट ने एक नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा है, राज्य के नोडल ऑफिसर कश्मीरियों पर हो रहे हमले और अत्याचार को रोकें। इस मामले पर केन्द्र सरकार पहले ही राज्यों सरकार को ऐसे मामले को रोकने की एडवाइजिरी जारी कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है ये आदेश हर राज्य को बता दिया जाये।

गुरूवार को सुप्रीम कोर्ट ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, एलएन राव और संजीव खन्ना की पीठ ने इस बाबत पर बोला है कि ये छात्रों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। इस पर सरकार को और अधिकारियों को सोचना चाहिये। याचिका में कहा गया था कि दूसरे राज्य में पढ़ रहे कश्मीरियों की सुरक्षा को खतरा है। इस मामले पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कश्मीरियों पर हो रहे हमले के लिए नरेन्द्र मोदी से सवाल किया था।

‘प्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साहब क्या हम कश्मीरी छात्रों और अन्य को टारगेट कर किए जा रहे सुनियोजित हमलों की निंदा के कुछ शब्द सुनेंगे या आपकी चिंता कश्मीर तक विस्तारित नहीं होती है?’

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उत्तराखंड सरकार का फरमान

सुप्रीम कोर्ट का आदेश जहां कश्मीरियों की सुरक्षा को लेकर है तो एक फरमान उत्तराखंड सरकार का भी है। जिसमें कहा गया है कि राज्य में पढ़ने वाले सभी कश्मीरियों को अपनी पूरी जानकारी देनी होगी। जिसमें उनके और उनके परिवार की पूरी हिस्ट्री की जानकारी होगी। कश्मीरी स्टूडेंट्स को लोकल पुलिस से वेरीफिकेशन कराना होगा। उत्तराखंड सरकार ने ऐसा फैसला इसलिये लिया है क्योंकि पुलवामा अटैक के बाद कई कश्मीरी स्टूडेंट्स ने विवादित पोस्ट लिखी थीं।

Image result for kashmiri students in dehradunउन विवादित पोस्टों की वजह से देहरादून में लोगों ने अपना गुस्सा जाहिर किया था। जिसके बाद पुलिस ने देहरादून और रूड़की से इन छात्रों को गिरफ्तार किया था और सस्पेंड भी कर दिया गया। इस समय कश्मीरी स्टूडेंट्स को छुट्टी देकर घर भेज दिया गया है। अब कुछ ही संस्थान हैं जहां कश्मीरी स्टूडेंट्स हैं। छुट्टियां खत्म होने के बाद सभी कश्मीरी स्टूडेंट्स वापस आ जायेंगे। सरकार ने इस कदम को उठाकर एक सुरक्षित फैसला लिया है। जो आने वाले समय में माहौल को सही करेगा।

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