चांद की सतह पर विक्रम लैंडर के गिरने के बाद भी इसरो ने अभी तक हार नहीं मानी है. दरअसल विक्रम लैंडर अपने निर्धारित जगह से करीब 500 मीटर दूर चांद की जमीन पर पड़ा हुआ है. बड़ी बात यह है कि उसमें कोई टूट-फूट नहीं हुई है और पूरा भाग चांद की सतह पर थोड़ा टेढ़ा पड़ा है जो इसरो समेत पूरे देश के लिए अच्छी खबर है. अगर लैंडर विक्रम से संपर्क पुर्नस्थापित हो जाता है तो उसे फिर से अपने पैरों पर खड़ा किया जा सकता है.

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स - गूगल
प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स – गूगल

इसरो से मिली जानकारी के अनुसार, चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर में जो उन्नत टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया है उसकी वजह से लैंडर विक्रम गिरने के बाद भी खुद को खड़ा कर सकता है. लेकिन, ये तभी संभव है जब इसरो का लैंडर विक्रम के कम्युनिकेशन सिस्टम से संपर्क हो जाए जिससे कि वो कमांड रिसीव कर सके.

इसरो मुख्यालय का कमांड सेंटर, फोटो सोर्स - गूगल
इसरो मुख्यालय का कमांड सेंटर, फोटो सोर्स – गूगल

हालांकि, इस असंभव से दिखने वाले काम के सफल होने की उम्मीद सिर्फ 1% ही है लेकिन, इसरो वैज्ञानिकों के लिए ये 1% की उम्मीद असंभव को संभव बनाने के लिए काफी है.

इसरो ने कहा है कि, एक प्रतिशत ही सही, लेकिन उम्मीद तो है.

बता दें कि विक्रम लैंडर में ऑनबोर्ड कंप्यूटर है. जिसकी वजह से ये खुद कई काम कर सकता है. विक्रम लैंडर के गिरने की वजह से उसमे लगा एंटीना दब गया है. इसी एंटीना के जरिए लैंडर विक्रम के कम्युनिकेशन सिस्टम को कमांड भेजा जा सकता था.

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स - गूगल
प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स – गूगल

जब से लैंडर विक्रम की लोकेशन पता लगी है तब से इसरो के वैज्ञानिक लगातार इसी कोशिश में लगे हुए हैं कि किसी तरह उस एंटीना के जरिए विक्रम लैंडर को वापस अपने पैरों पर खड़ा होने का कमांड दिया जा सके.

चाँद का चक्कर लगता चंद्रयान ऑर्बिटर, फोटो सोर्स - गूगल
चाँद का चक्कर लगता चंद्रयान ऑर्बिटर, फोटो सोर्स – गूगल

अब आप सोच रहे होंगे कि गिरा हुआ विक्रम लैंडर खुद-ब-खुद अपने पैरों पर कैसे खड़ा होगा. क्या कोई उसे वहां उठाएगा.

इसरो सूत्रों के अनुसार, विक्रम लैंडर के नीचे की तरफ पांच थ्रस्टर्स लगे हैं. इहनी थ्रस्टर के मदद से विक्रम को चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी. इसके अलावा, लैंडर विक्रम के चारों तरफ भी थ्रस्टर्स लगाए गए हैं, जो लैंडर विक्रम कि अंतरिक्ष यात्रा के समय दिशा तय करने के लिए ऑन किए जाने थे. ये थ्रस्टर्स अभी भी पूरी तरह सुरक्षित हैं.

वहीं चाँद की सतह पर पड़े लैंडर विक्रम के जिस हिस्से में कम्युनिकेशन एंटीना दबा है, उस भाग में भी थ्रस्टर्स लगे हुए हैं. पृथ्वी पर स्थित ग्राउंड स्टेशन से भेजे गए कमांड सिग्नल को अगर लैंडर विक्रम के नीचे दबे हुआ एंटीना रिसीव कर लेता है तो उसमें लगे थ्रस्टर्स को ऑन किया जा सकता है. थ्रस्टर्स ऑन होने पर विक्रम को एक तरफ से वापस उठाकर चारों पैरों पर खड़ा किया सकता है. अगर ऐसा हुआ तो ये चंद्रयान 2 मिशन के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं होगा. चंद्रयान 2 मिशन से जुड़े वो सारे प्रयोग किए जा सकेगे जो पहले से इसरो ने प्लान किए थे.

इसरो के पूर्व चीफ माधवन नायर ने कहा कि, अब भी 60 से 70 प्रतिशत संभावनाएं हैं कि लैंडर विक्रम से दोबारा संपर्क साधा जा सकता है.

इसरो के पूर्व चीफ माधवन नायर , फोटो सोर्स - गूगल
इसरो के पूर्व चीफ माधवन नायर , फोटो सोर्स – गूगल

वहीं, वैज्ञानिक और डीआरडीओ के पूर्व संयुक्त निदेशक वीएन झा ने भी कहा कि, किसी भी दिन इसरो सेंटर का लैंडर विक्रम से संपर्क जुड़ सकता है.

हालांकि, इसरो के एक दूसरे वैज्ञानिक का कहना है कि, अगर चाँद की सतह से टकराने के दौरान अगर विक्रम का एक भी पुर्जा खराब हुआ होगा तो संपर्क बनाना लगभग नामुमकिन रहेगा. लेकिन, वैज्ञानिकों ने लैंडर विक्रम की यथास्थिति को ‘अच्छा’ बताया लेकिन, उम्मीद बहुत कम है.

गौरतलब है कि 6-7 सितंबर की रात जब विक्रम लैंडर चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के लिए आगे बड़ रहा था तभी अचानक उसका इसरो से संपर्क टूट गया था. जिस वक्त संपर्क टूटा उस वक्त लैंडर विक्रम चांद की सतह से सिर्फ 2.1 किलोमीटर्स दूर था. तब से इसरो वैज्ञानिक लैंडर विक्रम से दोबारा संपर्क जोड़ने की कोशिश में जुटे हुए हैं.

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