कश्मीर से 370 हटने के बाद से लोग वहां ज़मीन खरीदना चाहते हैं. वहां की लड़कियों से शादी करना चाहते हैं. ये तो आप लोगों को पता ही होगा. मगर हमारे देशवासी कई और राज्यों में भी ज़मीन खरीदना चाहते हैं. वहां भी शादी करना चाहते हैं. वो राज्य हैं- नागालैंड, सिक्किम, मिज़ोरम, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम और मणिपुर. इन तमाम राज्यों को भी कश्मीर की तरह स्पेशल स्टेटस प्राप्त है.

जब से कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा है. उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया है. तभी से ये मांग भी उठने लगी है कि इन तमाम राज्यों से भी स्पेशल स्टेटस हटा लिया जाए. इसी को लेकर अब सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंग तमांग सामने आए हैं. जिन्हें आमतौर पर ‘पी.एस. गोले’ के नाम से जाना जाता है.

सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंग तमांग,फोटो सोर्स: गूगल
सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंग तमांग,फोटो सोर्स: गूगल

उन्होंने कहा है कि

हम केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को हटाने का समर्थन करते हैं, क्योंकि यह देश के हित में है. हलांकि, जहां तक अनुच्छेद 371एफ और इसी तरह के तमाम प्रावधानों का सवाल है. हमने गृह मंत्री अमित शाह को ये कहते हुए सुना है कि ये तमाम प्रावधान यूं ही कायम रहेंगे.

वो आगे कहते हैं कि अनुच्छेद 371एफ सिक्किम और सक्किम के लोगों का विशेष अधिकार है. इसे बदलने या हटाने का सवाल ही नहीं उठता है.

इसके अलावा उन्होंने सिक्किम और दार्जिलिंग को आपस में मिलाने की किसी भी संभावना से पूरी तरह इंकार कर दिया है और कहा है कि सिक्किम को संविधान के अनुच्छेद 371एफ के तहत सुरक्षा प्रदान की गई है. जो 1975 में भारत सरकार, सिक्किम के राजा और तमाम क्षेत्रिय पार्टियों के बिच हुए एग्रीमेंट का नतीजा है.

दरअसल, भारत के साथ सिक्किम का विलय कराते वक्त एक एग्रीमेंट साइन किया गया था. इसे ही अनुच्छेद 371एफ कहा जाता है. इसके तहत सिक्किम के पास पूरे राज्य की जमीन का अधिकार है, चाहे वह जमीन भारत में विलय से पहले किसी की निजी जमीन ही क्यों न हो. यहां किसी भी तरह के जमीन विवाद में देश के सुप्रीम कोर्ट या संसद को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है. इसी प्रावधान के तहत सिक्किम की विधानसभा का कार्यकाल 4 साल का होता है.

उन्होंने दार्जिलिंग को गोरखालैंड बनाए जाने को लेकर उठ रही मांगों पर भी अपनी बात कही है. उनका कहना है कि यह लोगों का संवैधानिक अधिकार है कि वह इसकी मांग करें. यह केंद्र सरकार पर निर्भर करता है कि वह इस मांग को पूरा करें की नहीं. हालांकि, सिक्किम में इसके विलय के लेकर कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है.

दार्जिलिंग, फोटो सोर्स:गूगल
दार्जिलिंग, फोटो सोर्स:गूगल

दरअसल, दार्जिलिंग के लोग लंबे समय से दार्जिलिंग को बंगाल से अलग कर के एक अन्य राज्य बनाने की मांग कर रहे हैं. इसी बीच भौगोलिक कारणों की वजह से कई लोग सिक्किम के साथ भी इसको मिलाने की मांग करते रहे हैं.

लेकिन, जब से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग करके दो केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है. तब से दार्जिलिंग की राजनितिक पार्टियों ने भी इसे अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग तेज कर दी है.

वहीं सिक्किम के इन्फोर्मेशन और पब्लिक रिलेशन डिपार्टमेंट ने 8 अगस्त को जारी किए गए अपने प्रेस स्टेटमेंट में कहा था कि मुख्यमंत्री पी.एस. गोले ने हाल ही में अपने दिल्ली दौरे के दौरान, तमाम राजनेताओं से निवेदन किया था कि वो अनुच्छेद 371एफ को बचाने के लिए कुछ करें.

वहीं सुमित टाइम्स के सिनियर जर्नलिस्ट एंड कंसल्टिंग एडिटर पेमा वांगचुक ने कहा है कि अनुच्छेद 371एफ महज एक कानूनी प्रावधान नहीं है. यह सिक्किम के लोगों की भवनाओं के साथ जुड़ा हुआ है. यही वजह है कि तमाम नेशनल और क्षेत्रीय पार्टीयां इसकी आवश्यकता पर जोर दे रहीं हैं.

उन्होंने कहा है कि अनुच्छेद 371एफ भारत के साथ सिक्किम के विलय की एक बेहद अहम कड़ी है.

अब देखना होगा कि क्या वाकई मोदी सरकार कश्मीर की तरह, बाकी राज्यों से भी उसका स्पेशल स्टेटस का दर्जा छीन लेती है या अमित शाह अपनी बात पर कायम रहते हैं. हालंकि, उम्मीद कम है कि वो अपनी बात पर कायम रहेंगें. वैसे भी कश्मीर को लेकर मोदी जी कहते थे. पहले कश्मीरियों का दिल जीतेंगे और फिर अनुच्छेद 370 पर कोई फैसला लेंगे. मगर हुआ इसका उल्टा, उन्होंने आर्मी भेज कर कश्मीर में कब्जे की कार्रवाई शुरू कर दी और अपनी जीत का ढिंढोरा पिटवा दिया.