बीते सोमवार को देश में कहीं बाढ़ से जान गंवाने का दुख था, तो कहीं ईद-उल-अज़हा की खुशी। मीडिया में भी कश्मीर और बाढ़ ही छाया रहा। बाढ़ पीड़ितों के लिए जगह-जगह एनडीआरएफ़ और सैनिकों द्वारा मदद जारी है। इसी बीच कर्नाटक से एक पॉज़िटिव ख़बर आई है। जो दिल को सुकून भी देगी और मन को तसल्ली।

क्या है पूरा मामला?

असल में मॉनसून सीज़न में इस आसमानी आफत से न सिर्फ कई गाँव, शहर बल्कि गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल जैसे राज्य बाढ़ में डूबे हुए हैं। इसी आफत से बिहार और असम राज्य भी परेशान था। अभी इन उत्तर और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों के लोग बाढ़ के क़हर से सही से संभले भी नहीं थे कि, दक्षिण और पश्चिम भारत के कई राज्य इसकी चपेट में आ गए। यह इलाके बुरी तरह से बाढ़ की मार झेल रहे हैं।

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बाढ़ की तस्वीर, फोटो सोर्स; गूगल

इन राज्यों की कई नदियां उफ़ान पर हैं और कई बांधों के ऊपर से पानी बह रहा है। ऐसा ही कुछ हाल कर्नाटक का भी है। इसी कर्नाटक में बेलगावी नाम का एक ज़िला है। जहां के रायबाग तहसील में शिरगुर नाम का एक गांव है। यह गांव भी बाढ़ की चपेट से कश्मकश में है।

तो हुआ कुछ यूं कि बाढ़ के मद्देनजर 10 और 11 अगस्त यानि शनिवार और रविवार के दिन मराठा रेजिमेंट के सैनिकों ने यहां पर राहत अभियान चलाया। इस राहत अभियान में सैनिकों ने करीब सौ से भी ज़्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया था। जो कि क़ाबिल-ए-तारीफ काम था।

सोमवार को पूरे देश में ईद का त्योंहार मनाया गया लेकिन, कर्नाटक राज्य के इस गांव के लोगों ने गंगा-जमना की मिसाल को कायम करते हुए इन मराठा रेजिमेंट के सैनिकों को ईद की दावत दी। यह दावत बाढ़ से राहत अभियान में अच्छा काम करने की ख़ुशी में दी गई थी और सैनिकों ने भी इसे हंस कर कुबूल किया।

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सैनिकों के साथ ईद मानते हुए गांव के लोग, फोटो सोर्स; डिफेंस प्रो बेंगलुरु

सभी ने एक साथ ईद मनाई। सभी ने मिल कर दुआ की और फिर सेवइयां और बिरयानी भी एक साथ खाई। इस पूरे क़िस्से पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने वाली टीम की अगुवाई करने वाले मेजर राजपाल सिंह राठौर ने बीबीसी को बताया कि,

“हमारी टीम मराठा रेजिमेंट सेंटर बेलगाम से आई है। हमने पिछले दो दिनों में 100 से ज़्यादा लोगों को रेस्क्यू किया। इसके बाद हम रुके हुए थे कि कहीं फिर ज़रूरत न पड़े। लोगों ने हमें ईद का न्योता दिया था. हम गए, हमने दुआ की और फिर सेवइयां और बिरयानी भी खाई”

मेजर राजपाल की रेस्क्यू टीम में पूरे 40 सदस्य हैं। उन्होंने लोगों की भी तारीफ की और पूरी टीम के अनुभव को बयां करते हुए कहा कि पूरी टीम को बहुत अच्छा लगा।

कर्नाटक में बाढ़

खैर, ये तो रही सैनिकों के काम से ख़ुशी का इज़हार करने और शुक्रिया कहने की बात। लेकिन अब भी इस राज्य में हालात सुधरे नहीं हैं। बल्कि कर्नाटक के कई इलाक़ों में स्थिति अब भी काफी ख़राब है। सोमवार शाम तक कम से कम 42 लोगों के मौत की पुष्टि हो चुकी थी। वहीं जलधाराओं में उफ़ान के कारण बांधों से भी पानी छोड़ना पड़ रहा है, जो कि एक खतरे की घंटी है। क्योंकि अगर जल्द से जल्द बारिश नहीं रुकी तो और मुश्किलें बाढ़ सकती हैं।

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बाढ़ से प्रभावित इलाके, फोटो सोर्स; गूगल

बाढ़ से हालात इतने खराब है कि नदियों के किनारे तले रहने वालों को एक सेफ जगह पर जाना पड़ रहा है। तो वहीं निचले इलाकों में पानी भर जाने से यातायात के लगभग सभी साधन ठप पड़ गए हैं। लगातार हुई बारिश की वजह से संचार भी ठप पड़ गया है। वहीं बारिश के कारण ज़मीन खिसकने और उनसे होने वाले हादसे भी ख़ूब हो रहे हैं।