आप पढ़ रहे हैं हमारी सीरीज़ सेक्स और गाँव-ग्रामीण महिलाओं की सेक्स लाइफ, जिसके पार्ट-1 में आपने सुनीता और उसकी सेक्स लाइफ के बारे में पढ़ा, जिसमें उसके नज़रिए और उसके अनुभवों को साझा किया गया था. आज हम आपको बताएंगें कि महाराष्ट्र के एक गांव में रहने वाली सुनीता सेक्स बारे में क्या कहती है और गांव की महिलाएं शादी से पहले अपनी सेक्शुअल डिज़ायर्स कैसे पूरी करती हैं. इसके साथ उन महिलाओं के बारे में भी बात करेगें जिन्होने अपनी पतियों को इसलिए छोड़ दिया क्योंकि उनकी ज़िंदगी में सेक्स उनके हिसाब से नहीं हो रहा था.

हमारे समाज में सेक्स को एक अलग ही तरह से देखा जाता है. उसे पवित्रता और इज़्जत के साथ जोड़ कर रखा जाता है, जबकि ये प्राकृतिक है. उतना ही प्राकृतिक जितना आपको प्यास लगना या अलग-अलग समय अलग-अलग चीज़े महसूस करना.

सुनीता से जब सेक्स के बारे में पूछा गया तो उसने कहा-

“जब हमें खाने की इच्छा के बारे में बात कर सकते हैं तो सेक्स की इच्छा के बारे में क्यों नहीं?”

“आपको कोई न कोई चाहिए होता है जो आपको मानसिक और शारीरिक संतुष्टी दे सके. एक औरत का जीवन बस खेतों और घर के भीतर काम करना, दो टाईम का खाना खाकर आखिर में बिस्तर पड़ जाना नहीं है.”

सेक्स हमारे जीवन की बेसिक ज़रूरतों में शामिल है. अब इस पर आप कितने भी पर्दे चढ़ाए या कितना भी इसे इज़्जत के साथ जोड़कर रखे. इस बात को नहीं झुठला सकते की सेक्स हमारे दिमाग के साथ-साथ हमारे जीवन को भी मज़बूत बनाता है. स्ट्रेस कम करता है.

सेक्स,डिज़ायर्स, शारीरिक ज़रूरतें ये सब ऐसे विषय है जिन पर औरतों के संदर्भ में कभी बात ही नहीं की जाती. हम अपनी आधी आबादी की सेक्स की ज़रूरतों पर तो बात करते हैं लेकिन बची आधी आबादी के बारे में भूल जाते हैं और ये बची आधी आबादी हैं महिलाएं. वही महिलाएं जिनकी डिज़ायर्स बंद दरवाज़ों के पीछे बिस्तर पर कहीं छिपी पड़ी होती हैं.

एक सरकारी सर्वे में पाया गया है कि शहरों की महिलाओं के मुकाबले गांव की महिलाएं पहले सेक्स कर लेती हैं. लगभग दो साल पहले. इनके सेक्शुअल पार्टनर्स भी शहरों की महिलाओँ के मुकाबले अधिक होते हैं.

शादी से पहले की शारीरिक ज़रूरतें

सुनीता के घर से थोड़ी दूर कुछ औरते एक साथ बैठी थी और हाल ही में हुए एक वाकये पर हंस रही थी. हुआ ये था कि एक 27-28 साल की अविवाहित एक लड़की को सेक्स करने का मन हुआ और क्योंकि किसी पुरूष के साथ सेक्स करके वो ‘कोई पाप’ नहीं करना चाहती थी तो उसने अपनी वजाइना में मसाले कुटने वाला पत्थर डाल कर खुद को प्लेज़र देने की कोशिश की. लड़की ने ये बात अपने पड़ोस की एक महिला को बताई और उस महिला ने तुरंत सबको ये बता दिया. 32 साल की शालू कहती हैं कि उसे आराम मिला तो उसने किया लेकिन सारा गांव उस पर हंसता रहा.

ऐसे ही एक औरत ने अपनी वजाइना में बैंगन डालने की कोशिश की जिसके चलते बैंगन का तना उसकी वजाइना में ही टूट गया. उसे अस्पताल ले जाया गया और पूर गांव को पता लग गया.

प्रतीकात्मक तस्वीर. फोटो सोर्स- गूगल

इस गांव की महिलाओं के समूह में ऐसी औरतों को नीची नज़र से नहीं देखा जाता बल्कि उसके साथ सुहानूभूति प्रकट की जाती है. 43 साल की सरोज कहती हैं कि किसी को इच्छा हो तो क्या करे? इतनी तकलीफ होती है. सरोज के पास ऐसी समस्याओं के कई समाधान होते हैं जब महिलाओं को ऐसी उत्सुकता होती है. जिनमें से एक है वजाइना के आस-पास के एरिया की नारियल के तेल से मसाज करना.

इन गांवों में महिलाओं की सेक्स डिज़ायर्स को लेकर बात-चीत करना इतना आम है कि लोग ये डिज़ायर्स के बारे में बात करते हैं कि उसने क्या किया बजाय इसके कि उसने क्यों किया. ये सारी घटनाएं महाराष्ट्र के कुछ गांवों की हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर. फोटो सोर्स- गूगल

शादी के बाद शारीरिक इच्छाएं पूरा न होना

  • यहां एक औरत ने अपने पति को सिर्फ इसलिए छोड़ दिया क्योंकि वो रात को काम पर जाता था और दिन में उसे सेक्स करने के लिए मजबूर करता था.
  • एक और औरत ने अपने पति को छोड़ दिया क्योंकि “ वो बहुत जल्दी-जल्दी सेक्स चाहता था”
  • एक महिला ने अपने पति को छोड़ा क्योंकि वो उसे ओरल सेक्स के लिए मजबूर करता था और महिला नॉर्मल सेक्स चाहती थी. महिला ने सिर्फ अपने पति को हीं नहीं छोड़ा बल्कि पूरे परिवार को इसका असली कारण भी बताया कि वो ऐसा क्यों कर रही है.
  • इसके अलावा एक और केस है जिसमें एक लड़की अपनी बहन के यहां आई थी. बच्चा पैदा होने में अपनी बहन की मदद करने. लेकिन उसने अपने जीजा के साथ सेक्स किया और प्रेग्नेंट हो गई. इसमें गांव वाले कहते हैं कि लड़की का जीजा एक अच्छा आदमी था क्योंकि उसने उस लड़की से शादी कर ली थी.

ग्रामीण महिलाओं के ये वाकये न ही हमें सिर्फ उनके अनुभव के बारे में बताते हैं बल्कि सेक्स के बारे में उनकी जानकारी के आभाव को भी दर्शाते हैं. मास्ट्रबेट करना बेहद आम है. लेकिन उसके बारे में सही जानकारी होना भी बेहद ज़रूरी है. अपनी वजाइना में पत्थर या बैंगन डालना मास्ट्रबेट करने का सही तरीका नहीं है. इससे कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं. जिसकी गंभीरता शायद गांव की ये महिलाएं नहीं जानती.

दूसरी तरफ सेक्स के लिए अपने पतियों को छोड़ देना उनके सशक्त होते रूप को दिखाता है. जिस तरह महिलाएं सामाजिक प्रतिष्ठा के बदले अपनी ज़रूरतों को महत्व दे रही हैं, वो बड़ी बात है

 

इस आर्टिकल के इनपुट्स अंग्रज़ी वेबसाइट livemint से लिए गए हैं

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