आपने गीता फोगाट और बबीता फोगाट की लाइफ को भले ही नजदीक से न देखी हो लेकिन, दंगल फिल्म तो जरुर देखी होगी। इस फिल्म में दिखाया गया है कि जैसे-जैसे गीता और बबीता बड़ी होती है लोग ताने मारने शुरु करते हैं। ताने सिर्फ इसलिए क्योंकि दोनों, लड़कियों जैसी कोई काम नहीं करती और न ही उनकी ड्रेस भी लड़कियों जैसी होता है। दंगल फिल्म की चर्चा इसलिए नहीं कर रहे हैं कि आप फिल्म याद करें बल्कि इसलिए क्योंकि उसी फिल्म की कहानी एक महिला क्रिकेटर से काफी मिलती-जुलती है। एक ऐसी खिलाड़ी जिसने हाल ही में क्रिकेट में डेब्यू किया है और अपने दूसरे ही मैच में दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी है।

शेफाली वर्मा, फोटो सोर्स: गूगल
शेफाली वर्मा, फोटो सोर्स: गूगल

टी-20 में भारत की सबसे कम उम्र की खिलाड़ी जिसने डेब्यू किया है वो शेफाली वर्मा है। शेफाली उस वक्त चर्चा में आई जब उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ सूरत में अपने करियर के दूसरे ही मैच में 46 रनों की धमाकेदार पारी खेली। पहले मैच में वे बिना कोई रन बनाए आउट हो गई थी। लेकिन, दूसरे मैच में जिस तरह से वह साउथ अफ्रीका के गेंदबाजों पर बरसी, वह देखने लायक था।

शेफाली वर्मा हरियाणा के रोहतक से हैं। 15 साल की उम्र में भारतीय महिला क्रिकेट टीम में डेब्यू करने वाली शेफाली का सफर इतना आसान नहीं रहा और वो भी उस रोहतक में जहां कोई क्रिकेट एकडमी नहीं है। अगर कोई एकेडमी भी है तो उसमें लड़कियों को खेलने की इजाजत नहीं।
फोटो सोर्स :गूगल
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आज से 6 साल पहले यानि साल 2013 में लाहली के मैदान पर एक 10 साल की लड़की रणजी मैच देखने आई। यह मैच सभी क्रिकेट प्रेमियों के लिए खास था। ऐसा इसलिए क्योंकि सचिन तेंदुलकर संन्यास से पहले अपना अंतिम रणजी मैच खेल रहे थे। सचिन ने दो दिन तक बड़े आराम से बैटिंग करते हुए 79 रनों की नाबाद पारी खेली और मुंबई को 4 विकेट से जीत दिलाई। सचिन को देखने के लिए लाहली के मैदान में भीड़ तो थी ही, स्टेडियम के बाहर भी भीड़ उनके बाहर आने का इंतजार कर रही थी। मैच देखने आई 10 साल की लड़की को यह देख कर महसूस हुआ कि भारत में क्रिकेटर बनना कितना अच्छा है और उसमें भी जब आप सचिन जैसे बनते हो। बस उसी दिन से उस लड़की ने अपनी क्रिकेट करियर की शुरुआत कर दी।

उस छोटी बच्ची ने क्रिकेट खेलने की बात सबसे पहले अपने पिता संजीव वर्मा को बताई। संजीव वर्मा ने भी बेटी की बात को माना और उसके लिए घर में तैयारियां शुरु हो गई। सबसे पहले ये सोचा गया कि किसी एकेडमी में एडमिशन कराया जाए ताकि वो क्रिकेट के गुण सीखें। अब एक-एक कर एकेडमी घूमना शुरु किया गया लेकिन, किसी ने लड़की को एडमिशन देने से इंकार कर दिया। कई एकेडमी के ऑनर के सामने संजीव वर्मा ने मिन्नतें भी मांगी लेकिन, किसी ने एक न सुनी। जब एडमिशन नहीं मिला तो बेटी ने अब लड़को जैसे बाल छोटे कर लिए। तब जाकर एकेडमी में एडमिशन मिल पाया क्योंकि अब सभी को वो लड़का नज़र आने लगी थी।

फोटो सोर्स: गूगल
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शेफाली के पिता की रोहतक में ही ज्वैलरी की शॉप है। पिता संजीव वर्मा कहते है कि एकडेमी में एडमिशन होने के बाद लड़को के सामने खेलना इतना आसान नहीं था। कई बार गेंद उसके हेलमेट पर लगी। कई बार तो गेंद के लगने से हेलमेट की जाली टूट गई। मोहल्ले वाले ताने देने लगे कि लड़को के साथ लड़की को नहीं भेजना चाहिए। लड़कियों का क्रिकेट में कोई करियर नहीं है।  

लेकिन शेफाली ने खेलना जारी रखा। समय बीतता गया और समय के साथ क्रिकेट में शेफाली खुद को और मजबूत करती गई। धीरे-धीरे समय आया साल 2018-19, अंतर्राज्यीय महिला टी-20 का आयोजन किया गया और उसमें शेफाली को भी चुना गया। लेकिन, नागालैंड के खिलाफ हुए मैच ने शेफाली की लाइफ बदल दी। नागालैंड के खिलाफ खेले गए मैच में 56 गेंदों पर 128 रन बना डाले थे। इसके बाद इसी साल आईपीएल के दौरान महिला टी-20 चैलेंज में उन्होंने 31 गेंदों में 34 रन बनाए थे। आईपीएल के बाद घरेलू सीरीज में शेफाली ने जम कर रन बनाए। 6 शतक और तीन अर्धशतकों के साथ 1923 रन बनाए। अब बस इंतजार था इंडियन टीम में एंट्री कर धमाका करने का।

जैसे ही एंट्री मिली तो साउथ अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने दिखा भी दिया कि वह अब केवल आगे बढ़ने आई है। अब जो लोग ताने मार रहे थे उन्हें आज जवाब जरुर मिल गया होगा। मतलब म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के।

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