चंद्रयान-2 मिशन, भारत और इसरो(Indian Space Research Organisation) के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण था. अगर ये मिशन पूरा हो जाता तो, भारत भी रूस, अमेरिका और चीन की तरह चांद पर उतरने वाला देश बन जाता. हालांकि, ऐसा कुछ हुआ नहीं. लैंडर विक्रम से संपर्क टूटने के बाद सारे मंसूबों पर फानी फिर गया. इसके बाद कई तरह की बाते सामने आती रहीं. कभी कहा गया कि संपर्क स्थापित कर लिया गाया है तो, कभी कहा गया बस विक्रम लैंडर चांद पर उतरने ही वाला हैं.

हालांकि, इन कयासों पर पूर्ण विराम तब लग गया, जब न इसरो और न ही नासा विक्रम लैंडर से संपर्क स्थापित कर पाए. वहीं, अब नासा को विक्रम लैंडर का मलवा मिला है. इसे ढूंढने में उनकी मदद की है भारत के एक इंजीनियर ने.

इंजीनियर षणमुग सुब्रमण्यन, फोटो सोर्स: गूगल

इंजीनियर षणमुग सुब्रमण्यन, फोटो सोर्स: गूगल

इस इंजीनियर का नाम है, षणमुग सुब्रमण्यन. षणमुग चेन्नई के लिनक्स इंडिया टेक्नोलॉजी सेंटर में टेक्निकल आर्किटेक्ट हैं. उन्होंने विक्रम की गति और स्थिति की अंतिम जानकारी के आधार पर एक जगह कुछ सफ़ेद धब्बों को देखा, जो पहले की तस्वीरों में नहीं दिखती थी. इसी के आधार पर उन्होंने 27 सितंबर, 28 सितंबर, 3 अकटूबर और 17 नवंबर को नासा को टैग करते हुए ट्वीट किया. इन्हीं ट्वीट्स में 3 अकटूबर को किया गया उनका ट्वीट निर्णायक साबित हुआ. जिस पर नासा ने ध्यान दिया.

षणमुग सुब्रमण्यन ने जहां विक्रम लैंडर गिरा था, उस जगह की पहले और बाद की तस्वीरों के साथ ट्वीट किया, क्या ये विक्रम लैंडर है? (लैंडिंग की जगह से 1 किलोमीटर दूर) लैंडर शायद चंजद्रमा पर रेत के नीचे दबा हो?

नासा ने 3 दिसंबर को इस बात की पुष्टी कर दी कि, षणमुग सुब्रमण्यन का अंदाजा बिल्कुल सही था. ये विक्रम लैंडर का ही मलबा है. इतना ही नहीं, नासा ने बकायदा बयान जारी करके षणमुग सुब्रमण्यन को इसका श्रेय दिया है. नासा ने कहा है कि,

इन मलबों(विक्रम लैंडर) को सबसे पहले षणमुग ने उस जगह से लगभग 750 मीटर दूर ढूंढ निकाला जहां वो गिरा था और ये उसकी एकमात्र स्पष्ट तस्वीर थी.

षणमुग ने अपने ट्वीटर हैंडल पर लिखा है कि

नासा ने चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर को खोजने के लिए मुझे श्रेय दिया है.

दरअसल नासा का एक यान- LRO प्रोजेक्ट (लुनर रिकॉनाएसंस ऑरबिटर) सितंबर से ही कई बार उस जगह के ऊपर से गुज़र रहा था. मगर उसे भी कोई साफ़ तस्वीर नहीं मिल रही थी.

विक्रम लैंडर को ढूंढने को लेकर इंजीनियर षणमुग सुब्रमण्यन ने नयूयॉर्क टाइम्स को बताया है कि,

विक्रम के क्रैश करने से न केवल मुझे बल्कि, मेरे जैसे कई लोगों को चांद को लेकर दिलचस्पी हुई. मुझे लगता है विक्रम अगर सही तरीके से लैंड करता तो शायद इतनी दिलचस्पी न होती. इसके बाद मैं तस्वीरों को स्कैन करने लगा.

आखिरकार विक्रम लैंडर का रहस्य भी सुलझ गया. अब बस ये उम्मीद की जा सकती है कि ISRO चंद्रयान-2 मिशन के फेल होंने से सीख लेकर, एक नई रणनीति तैयार करेगा और एक न एक दिन भारत का चांद पर उतरने का सपना जरूर सच साबित होगा.