यूँ तो चुप रहना लगभग हर जगह पर ही भला होता है. रिश्तेदारों की बहस में चुप रहना. बॉस की डांट के सामने चुप रहना. मूर्खों की भीड़ में फंसे होने पर चुप रहना. लेकिन, आज कल चुप रहने का एक नया और ठोस कारण देश में पैदा हुआ है. चुप रहिए, क्योंकि पाकिस्तान सुन रहा है. और वो आपके सुने को UN को बता देगा.

ये शब्द हैं सत्यपाल मलिक के, भारत के अटॉर्नी जनरल के और खुद कांग्रेस पार्टी के. दो दिनों से उन्होंने यही रट लगा रखी है; चुप रहिए. पाकिस्तान सुन रहा है, वो UN को बता देगा !

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राहुल गांधी ने अपनी पार्टी के नेता को संसद में चुप नहीं करवाया. अब उस नेता के भाषण को पाकिस्तान UN में ले गया.

पूरा मामला:

अधीर रंजन चौधरी लोकसभा में कांग्रेस के लीडर हैं. 6 अगस्त को उन्होंने एक बहस के दौरान लोकसभा में कहा था कि कभी कश्मीर के मुद्दे में UN आ जाता है, कभी यह दुतरफ़ा मामला हो जाता है तो कभी इंटर्नल. हमें समझाइये कि चल क्या रहा है?

कांग्रेस के इसी बयान को पाकिस्तान UN में ले गया. विपक्ष ने मुद्दा उठा लिया और कांग्रेस को भी लगने लगा कि उसने कुछ गुनाह कर दिया है. कांग्रेस डिफेंडिंग पोजीशन में आती है और क्लियर करती है कि वो कश्मीर को भारत का आंतरिक मुद्दा मानती है.

Adhir Ranjan Chaudhary
लोकसभा में बोलते हुए अधीर रंजन चौधरी, फोटो सोर्स- गूगल

सबसे सही वो हिस्सा रहा जब अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा में विपक्ष के विरोध के बाद डिफेंड होकर कहा,

“Congress wants to be enlightened by you”

“कांग्रेस चाहती है कि आप उसे ज्ञान दें”

सुप्रीम कोर्ट भी?

केवल मलिक नहीं, भारत सरकार के अटॉर्नी जनरल को भी यही लगता है कि हमें चुप रहना चाहिए। चुप रहने की ये हिदायत उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की बेंच तक को दे दी.

बुधवार को जब सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 370 हटाए जाने से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हो रही थी तो सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अपील दी कि कोर्ट इस मामले में सरकार को कोई नॉटिस न भेजे. क्योंकि पाकिस्तान सुन रहा है, वो UN को बता देगा! सुनवाई कर रही बेंच में चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया और देश के सबसे वरिष्ठ जजों में से दो जज शामिल थे. लेकिन, अटॉर्नी जनरल को जरूरत महसूस हुई कि कांग्रेस के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट को भी ‘enlightenment’ की जरूरत है.

वेणुगोपाल साहब की नसीहत सुप्रीम कोर्ट को पसंद नहीं आई और जवाब में कोर्ट ने कहा, “हमें पता है कि हमें क्या करना है”. अच्छा है कि सुप्रीम कोर्ट कांग्रेस नहीं है, वरना तीनों जजों की बेंच भी डिफेंडिंग पोजीशन में आ जाती।

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आज से लगभग 7 दशक पहले मशहूर शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ने जेल में रहते हुए लिखा था,

बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे
बोल ज़बाँ अब तक तेरी है

लेकिन, याद रहे कि ये लिखते हुए फैज़ साहब जेल में थे. आप भी जेल में जाना चाहते हैं? नहीं ना? तो चुप रहिए. लाल गमछा गले में डालकर चिल्लाना आसान है कि बोल कि लब आज़ाद हैं. लेकिन देश को बचाना है, तो आपको चुप रहना होगा. क्यों? क्योंकि, पाकिस्तान सुन रहा है, वो UN को बता देगा !