एक काम करिए अपने आस-पास कोई प्रिंटिंग प्रेस की दुकान खोजिये. वहां जाइए और ‘दक़ियानूसी’ लिखवा कर कम से कम 100 पर्चियाँ छ्पवा लीजिये. इसके बाद हैदराबाद का टिकट कटवाइए और पहुँच जाइए सेंट फ्रांसिस गर्ल्स कॉलेज. वहाँ मौजूद कॉलेज प्रशासन के पास जाइए और वो सारी पर्चियाँ उन्हें देकर कहिए कि इसे वो अपने-अपने माथे पर चिपका लें.

आप सोच रहे होंगे हम ये सब क्यों कह रहे हैं? हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि हैदराबाद का सेंट फ्रांसिस गर्ल्स कॉलेज, दक़ियानूसी गर्ल्स कॉलेज है. दक़ियानूसी अरबी भाषा का एक शब्द है. जिसका हिंदी में मतलब होता है पुराने ख़याल वाला या पुराने विचारों का समर्थन करने वाला. अब इससे पहले आप ये कहे कि भला पुराने विचारों को मानने में क्या बुराई है? ये मामला जान लीजिये.

मामला ये है कि,

हैदराबाद के सेंट फ्रांसिस गर्ल्स कॉलेज में पढ़ने वाली लड़कियों को उनके कपड़ों की लंबाई चेक करने के बाद एंट्री दी जाती है. अगर किसी लड़की ने स्लीवलेस, घुटनों से ऊपर या कोई शॉर्ट ड्रेस पहन रखी हैं तब उसे कॉलेज में घुसने नहीं दिया जाएगा. इसके लिए कॉलेज के मेन गेट पर बाकायदा सिक्युरिटी गार्ड्स/वार्डन को तैनात किया गया है. कॉलेज आने वाली तमाम लड़कियों को गेट पर रोक कर उनके कपड़ों को नीचे खींच कर लंबाई चेक की जाती है.

1 अगस्त से कॉलेज वालों ने लड़कियों के लिए एक ड्रेस कोड तय किया है. जिसके अनुसार उन्हें पूरी बांह के, घुटनों से नीचे तक लंबे कुर्ते पहन कर आने के लिए कहा गया है. इसके अलावा किसी भी प्रकार के कपड़े पहन कर आने वाली लड़कियों को कॉलेज में नहीं घुसने दिया जा रहा है.

Guys, remember the day you came to this college for your admission? Y'all had a sense of admiration for the college and…

Posted by Zanobia Tumbi on Friday, September 13, 2019

वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे घुटने से जरा-सी भी ऊपर कुर्ती पहने हुई लड़कियों को कॉलेज गेट पर ही रोक कर रखा गया है.

पहले एक बार को लगा कि कॉलेज ने ड्रेस कोड तय किया है इसलिए सभी को ड्रेस में आने के लिए कहा जा रहा है. पर नहीं, ऐसा बिलकुल भी नहीं है. दरअसल कॉलेज ने इस ड्रेस कोड को लागू करने के लिए एक ‘तर्क’ दिया है. तर्क ये कि अगर लड़कियां घुटने से ऊपर छोटे कपड़े पहनती हैं तो उनकी जांघों का साइज दिखाई देगा जिसके कारण पुरुषों का ध्यान भटकेगा. छोटे कपड़े पहनने से उनके साथ छेड़छाड़ की घटनाएं होंगी. अगर लड़कियां पूरी बांह के, घुटनों से नीचे तक लंबे कुर्ते पहनेंगी तो उनके लिए अच्छे रिश्ते आएंगे.

कॉलेज के बाहर विरोध प्रदर्शन करती हुई छात्राएँ, फोटो सोर्स- गूगल
कॉलेज के बाहर विरोध प्रदर्शन करती हुई छात्राएँ, फोटो सोर्स- गूगल

2 अगस्त को छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन के इस फैसले का विरोध किया. जिसके जवाब में कॉलेज प्रशासन का कहना था कि यहा नियम पहले से बना हुआ था उसे बस अभी लागू किया है. छात्राओं ने ड्रेस कोड के नाम पर इस जबरदस्ती के खिलाफ प्रशासन से बात करने की कोशिश की पर कॉलेज वालों नें उनको सुने बगैर ही दूसरा फरमान सुना दिया कि जिन्हें इस नियम का पालन नहीं करना है वो दूसरे कॉलेज में एडमिशन ले लें.

कॉलेज के इस दक़ियानूसी फैसले पर दक़ियानूसी तर्क सुनने के बाद स्टूडेंट्स कुछ हद तक फैसला मानने को तैयार भी हो गई. उन्होने कहा कि क्रॉप टॉप या डिस्ट्रेस जींस को कॉलेज में बैन करना एक बार के लिए मन मार कर माना जा सकता है पर सिर्फ और सिर्फ कुर्ती पहनने के लिए मजबूर करना साफ-साफ तानाशाही जैसा है, जो कि बिलकुल भी मंजूर नहीं है.

धरने पर बैठी छात्राएँ, फोटो सोर्स- गूगल
धरने पर बैठी छात्राएँ, फोटो सोर्स- गूगल

इस फैसले का विरोध किया ही जाना चाहिए

भारत एक आज़ाद देश है, लोकतांत्रिक देश है. देश के हर नागरिक को बोलने, कहने और अपने तरीके से रहने की पूरी आज़ादी है. इस आज़ादी में सबका हिस्सा है. सबका में महिलाएं और लड़कियां भी आती हैं. पर ये बात सिर्फ देश के संविधान में लिखी है. पर समाज का एक बहुत बड़ा हिस्सा; उदाहरण के लिए सेंट फ्रांसिस गर्ल्स कॉलेज के प्रशासन, ये मानने से इंकार कर देता है. उसने आज़ादी की अपनी परिभाषा बना रखी हैं. जहां लड़कियों को पढ़ने के लिए कॉलेज भेजा जा सकता है पर तय कपड़ों में. लड़कियों को अपने तरीके, अपने मन के कपड़े पहनने की आज़ादी नहीं है.

आज़ादी की परिभाषा का एक हिस्सा इस तस्वीर में है, फोटो सोर्स - TOI
आज़ादी की परिभाषा का एक हिस्सा इस तस्वीर में है, फोटो सोर्स – TOI

आज़ादी छोड़िए बल्कि उन्हें वैसे ही कपड़े पहनने पड़ेंगे जैसे तय किए गए हैं. घुटनों से नीचे तक. घुटनों से ऊपर कपड़े पहनने पर, खुली बांह के कपड़े पहनने पर पुरुषों की आज़ादी खतरे में पड़ रही है. लड़कियों ने अपने हिस्से की लड़ाई लड़नी शुरू कर दी है. उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बात कहनी शुरू कर दी है. अपनी क्लासेस छोड़ कर कॉलेज के खिलाफ खड़े होकर विरोध कर रही हैं. इन सबके बाद कहीं जाकर कॉलेज ने अपना फरमान वापस लिया है.

अपनी आज़ादी की लड़ाई लड़ती हुई छात्राएँ,फोटो सोर्स- TOI
अपनी आज़ादी की लड़ाई लड़ती हुई छात्राएँ,फोटो सोर्स- TOI

अगर कॉलेज प्रशासन के फैसला वापस लेने को गलत मान कर चल रहे हैं रहे हैं तो एक काम करिए किसी दिन वक़्त निकाल कर एक गड्ढा खोदिए और अपने आस-पास मौजूद सारी टेक्नॉलजी से लैस चीजों को उस गड्ढे में भर कर पाट दीजिएगा. आपके पास जितने भी फैशनेबल कपड़े हो उनका ढेर बना कर उस ढेर पर आग लगा दीजिए. उसके बाद कुछ सालों तक अधिक से अधिक इतिहास की किताबें इकट्ठी कीजिए और फिर एक बार वक़्त निकाल कर उन सारी किताबों में ‘था’ की जगह ‘है’ लिख दीजिये. और मान लीजिये कि हम अभी भी 16वीं सदी में ही अटके हैं.

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