साल 1982, इसी साल भारत में एशियन गेम्स हुए और लोगों ने इस बार रंगीन टी.वी. में मैच देखा। उसके अगले ही साल 1983 में तीसरा क्रिकेट वर्ल्ड कप हुआ। ये वर्ल्ड कप भारत के लिए यादगार रहा, लोगों ने लॉर्ड्स में फिसड्डी माने जानी वाली भारतीय टीम को जीतते भी देखा और कप्तान कपिल देव को वर्ल्ड कप ट्रॉफी पकड़े हुए भी। वो तस्वीर भारतीय क्रिकेट के लिए यादगार बन गई। क्योंकि दोबारा उस मुकाम तक पहुंचने के लिए कई वर्ल्ड कप का इंतजार करना था। क्रिकेट के इस महाकुंभ के सफर में आज कहानी 1983 वर्ल्ड कप की।

फोटो सोर्स- गूगल

भारत में रंगीन टी.वी. आ गया था लेकिन मैच अब भी रंगीन नहीं हुए थे। पिछले दो वर्ल्ड कपों से इस बार भी बहुत कुछ नहीं बदला था। मैच लाल गेंद से हो रहे थे, मैच भी 60-60 ओवरों के होने थे। इस बार वर्ल्ड कप में 30 यार्ड सर्किल का प्रयोग किया गया। जिसके तहत घेरे के अंदर कम से कम चार खिलाड़ी फील्डिंग करने चाहिए। तीसरे वर्ल्ड कप की मेजबानी इंग्लैंड ही कर रहा था। दूसरे वर्ल्ड कप की तरह ये वर्ल्ड कप भी ‘प्रूडेंशियल’ के नाम से आयोजित किया गया।

इस बार भी आठ टीमों ने हिस्सा लिया। चार-चार के दो ग्रुपों में टीमों को बांटा गया। इस बार अंतर ये हुआ कि अब ग्रुप की टीमों को आपस में एक-एक नहीं बल्कि दो-दो मैच खेलने थे। वाइड और बाउंसर गेंदों के लिए भी नियम कड़े कर दिए गए थे। ग्रुप ‘ए’ में इंग्लैंड, पाकिस्तान, न्यूजीलैंड और श्रीलंका जैसी टीमें थीं तो ग्रुप ‘बी’ में वेस्टइंडीज, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जिम्बाब्वे थी।

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ग्रुप ‘ए’ में इंग्लैंड की टीम ने जबरदस्त प्रदर्शन किया और ग्रुप में टाॅप पर रही। वहीं दूसरी टीम के लिए रेटिंग का सहारा लेना पड़ा क्योंकि पाकिस्तान और न्यूजीलैंड दोनों ने ही 3-3 मैच जीते थे। पाकिस्तान की रेटिंग अच्छी थी इसीलिए पाकिस्तान को सेमीफाइनल में जगह मिली। ग्रुप ‘बी’ से वेस्टइंडीज और भारत सेमीफाइनल में पहुंची। जब वर्ल्ड कप शुरू हो रहा था तो भारत को कोई भी वर्ल्ड कप का दावेदार नहीं मान रहा था। वजह थी भारत का पिछले दोनों वर्ल्ड कप में खराब प्रदर्शन।

1983 के वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे थे, कपिल देव। वर्ल्ड कप शुरू हुआ तो भारत मैच जीतती गई और सेमीफाइनल में पहुंच गई। भारत ने अपने पहले ही मैच में विश्व चैम्पियन वेस्टइंडीज को 34 रनों से हराया। भारत ने ऑस्ट्रेलिया और जिम्बाब्वे को भी मात दी। भारत ने छह में से चार मैच जीते और वेस्टइंडीज के साथ सेमी फाइनल में पहुंची। ग्रुप मैचों में वेस्टइंडीज के विंस्टन डेविस ने बेहतरीन गेंदबाजी का प्रदर्शन किया। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 51 रन देकर सात विकेट चटकाए।

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सेमीफाइनल की जंग

पहला सेमीफाइनल भारत और इंग्लैंड के बीच हुआ, इंग्लैड ने पहले बैटिंग की। भारत की ओर से कपिल देव, रोजर बिन्नी और मोहिंदर अमरनाथ ने बेहतरीन बाॅलिंग की ओर इंग्लैंड को सिर्फ 213 रनों पर समेट दिया। जब बल्लेबाजी की बारी आई तो संदीप पाटिल, यशपाल शर्मा और अमरनाथ ने बैटिंग में जलवा दिखाया।

भारत ने सेमीफाइनल मैच 55वें ओवर में ही 6 विकेट से जीत लिया और भारत ने पहली बार वर्ल्ड कप में अपनी जगह बनाई। दूसरे सेमीफाइनल में वेस्टइंडीज ने पाकिस्तान को बुरी तरह से हराया। पहले बैटिंग करते हुए पाकिस्तान ने 60 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर बनाये 180 रन। वेस्टइंडीज ने लाजवाब बैटिंग की ओर 8 विकेट से मैच को जीत लिया। विवियन रिचर्डस ने इस मैच में नाबाद 80 रन बनाए।

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फाइनल

25 जून 1983 को लगातार तीसरी बार वर्ल्ड कप का फाइनल हो रहा था। जिसमें लगातार तीनों बार वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचने वाली टीम, भारत के सामने थी। वेस्टइंडीज लगातार तीसरी बार वर्ल्ड कप को जीतना चाहती थी और भारत तो बस अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिश में था।

भारत ने पहले बैटिंग की और पूरी टीम सिर्फ 183 रनों पर आउट हो गई। भारत का कोई भी बल्लेबाज अर्धशतक तक नहीं लगा पाया था। भारत की ओर से ज्यादा रन श्रीकांत ने बनाये थे। श्रीकांत ने फाइनल मैच में 38 रन बनाये थे, जिसमें उन्होंने 7 चौके और 1 छक्का भी लगाया था। वहीं मोहिंदर अमरनाथ ने 26 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली। भारत ने अपने आखिरी 7 विकेट 93 रनों के भीतर खो दिए थे।

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184 रनों के लक्ष्य के जवाब में वेस्टइंडीज की शुरूआत अच्छी हुई थी। वेस्टइंडीज के समर्थक जब जश्न मनाने लगे। जब वेस्टइंडीज के 50 रन पर सिर्फ 1 विकेट ही गिरा था। सबको भारत की हार पक्की लग रही थी लेकिन यहीं से मैच पलटने वाला था। यहां से लाला मोहिंदर अमरनाथ और मदन लाल ने शानदार गेंदबाजी की और मैच का पासा ही पलट दिया। हेंस और रिचर्ड्स का अहम विकेट मदन लाल को मिला तो रोजर बिन्नी की गेंद पर क्लाइव लॉयड का बेहतरीन कैच लपका कपिल देव ने।

बाद में दुजो और मार्शल ने पारी संभालने की कोशिश की। लेकिन दोनों को मोहिंदर अमरनाथ आउट किया, यहां से वेस्टइंडीज के हाथ से मैच निकल गया। अमरनाथ ने होल्डिंग को एलबीडब्लू आउट किया और भारत ने ये मैच जीत लिया। वेस्टइंडीज ने अपने आखिरी नौ विकेट 90 रनों के भीतर खोए। वेस्टइंडीज की पूरी टीम 140 रन बनाकर आउट हो गई और भारत पहली बार वर्ल्ड कप चैंपियन बन गया। इस मैच में बल्ले और गेंद दोनों से कमाल करने वाले मोहिंदर अमरनाथ को मैन आफ द मैच मिला। अमरनाथ ने 26 रन बनाने के साथ-साथ, महत्वपूर्ण 3 विकेट भी लिए थे।

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फाइनल का मजेदार किस्सा

जाते-जाते उसी वर्ल्ड कप का मजेदार किस्सा सुनते जाइए। वेस्टइंडीज ने सोचा था कि वे भारत को आराम से हरा देंगे। इसलिए उन्होंने जश्न के शैम्पेन की बोतलें पहले ही खरीद ली थीं। लेकिन जब वेस्टइंडीज हार गई तो उनके ड्रेसिंग रूम का माहौल निराशा से भरा हुआ था। कपिल देव मैच के बाद वेस्ट इंडीज के ड्रेसिंग रूम में सभी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने पहुंचे। कमरे में सन्नाटा पसरा हुआ था, वेस्टइंडीज को यकीन नहीं हो रहा था कि वो सच में वर्ल्ड कप हार चुके हैं। कमरे में कपिल देव को शैम्पेन की बोतलें दिखाई दीं। भारत ने कोई शैम्पेन नहीं मंगवाई थी, ये बोतलें वेस्टइंडीज के लिए किसी काम की नहीं थीं।

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कपिल देव ने लॉयड से पूछा, “क्या मैं आपके कमरे से शैम्पेन की कुछ बोतलें ले जा सकता हूं? हमने एक भी नहीं मंगवाई है।” क्लाइव ने कपिल को बस इशारा भर किया और जाकर एक कोने में बैठ गए। कपिल और मोहिंदर अमरनाथ ने बोतलें उठाईं और टीम इंडिया ने पूरी रात जीत का जश्न मनाया। ये 1983 वर्ल्ड कप की कहानी है, यहां से भारत के लिए एक अलग नजरिया बनने लगा। भारत को अब हर वर्ल्ड कप में खिताब का दावेदार माने जाना था। आगे अब देखेंगे भारत का सफर और इस महाकुंभ का सफर।

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