सनी देओल देश के जाने-माने चेहरा हैं. देश में सनी देओल के चाहने वालों की कमी नहीं है. सनी देओल पहले सिर्फ अभिनेता थे लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव के बाद से सनी नेता भी बन गये हैं. सनी देओल ने 2019 लोकसभा चुनाव में पंजाब के गुरदासपुर से चुनाव लड़ा और जनता ने उन्हें जिताया भी. लेकिन सनी देओल ने अब जो कारनामा किया है इससे उनके चाहने वाले काफी नाराज हैं और कह रहे हैं ‘हमलोग अपने नेता को लोकप्रियता के आधार पर तो चुनते हैं लेकिन ये लोग अपनी जिम्मेदारी नहीं लेते हैं. अगर ये नेता ऐसे ही करेंगे तो भारत का विकास क्या खाक होगा?’

सनी देओल की 2019 लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान की तस्वीर, फोटो सोर्स- गूगल

सनी देओल ने ऐसा क्या कर दिया है?

दरअसल, सनी देओल गुरदास पुर से सांसद हैं. और अब उन्होंने एक लेखक को अपने संसदीय क्षेत्र गुरदासपुर का सांसद ‘प्रतिनिधि’ नियुक्त किया है. गुरदासपुर सांसद के लेटरहेड पर जारी एक पत्र में देओल ने गुरप्रीत सिंह पल्हेरी को अपना ‘प्रतिनिधि’ नियुक्त किया है जो बैठकों एवं अन्य कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे.

देओल की ओर से जारी पत्र में लिखा गया है,

“मैं, गुरप्रीत सिंह पल्हेरी, पुत्र सुपिंदर सिंह, निवासी पलहेरी गांव, जिला मोहाली, पंजाब को अपना प्रतिनिधि नियुक्त करता हूं . वह संबंधित अधिकारियों के साथ मेरे संसदीय क्षेत्र गुरदासपुर निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित बैठकों और अन्य कार्यक्रमों में शिकरत करेंगे.”

सनी देओल ने जिनको अपनी सांसद की कुर्सी पर बिठाया है, उनके बारे में

सनी देओल ने जिनको अपनी सांसद की कुर्सी पर बिठाया हैं उनका नाम गुरप्रीत सिंह पल्हेरी है. पल्हेरी पेशे से लेखक और लाइन प्रोड्यूसर हैं. इस पद को पाने के बाद पल्हेरी ने बताया कि यह पत्र 26 जून को जारी हुआ है. उन्होंने कहा, ‘यह (नियुक्ति) स्थानीय मुद्दों के लिए है. यह गुरदासपुर के लोगों की 24 घंटे की सेवा में होने जैसा है.’ हालांकि, उन्होंने दावा किया कि गुरदासपुर के सांसद और भाजपा, लोकसभा क्षेत्र के सार्वजनिक मुद्दों का ध्यान रख रहे हैं. पल्हेरी ने कहा कि देओल हर महीने गुरदासपुर संसदीय क्षेत्र का दौरा करेंगे.

विपक्षी पार्टी का इस मुद्दे पर क्या कहना है?

पंजाब के कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने प्रतिनिधि की नियुक्ति पर देओल की आलोचना करते हुए इसे निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं के साथ धोखा करार दिया. गुरदासपुर लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाले डेरा बाबा नानक विधानसभा क्षेत्र के विधायक रंधावा ने कहा, ‘सनी देओल ने प्रतिनिधि की नियुक्ति कर गुरदासपुर की जनता को धोखा दिया है. मतदाताओं ने सनी देओल को अपना सांसद चुना है, न कि उनके प्रतिनिधि को चुना है.’ विपक्षी पार्टी के नेताओं का कहना है कि सनी देओल गुरदासपुर की जगह मुबंई में रहना चाहते हैं इसलिए उन्होंने यह फैसला किया है.

प्रधानमंत्री मोदी के साथ में सनी देओल, फोटो सोर्स- गूगल

सनी देओल के द्वारा लिए गए इस फैसले पर भसड़ मचना तो तय है. अब तो वही बात हो गई कि ‘खाना कोई और खाएगा और पेट सनी देओल का भर जाएगा’. चुनाव से पहले गुरदासपुर के लोगों को कितने सपने दिखाए गए लेकिन सब पर पानी फिरता दिख रहा है.

लोगों को कहां पता था कि सनी देओल का जनता की सेवा और देशभक्ति सिर्फ पर्दे तक ही सीमित रह जाएगी. सनी ने अपनी सांसद की कुर्सी किराए पर दे दी है या यूँ कहिए की बेच दी है, असल जिंदगी में उनके द्वारा जनता को दिखाए गए सारे सपनों का दिवाला निकल गया है.

जनता को भी समझने में समय नहीं लगेगा कि जनता की सेवा करना और डॉयलग बोलने में जमीन-आसमान का फर्क है. सनी देओल को अगर यही सब करना था तो उन्हें चुनाव ही नहीं लड़ना चाहिए था. अगर ऐसे ही सारे सांसद अपनी नौकरी को भाड़े पर देने लगे, तो बन गया न्यू इंडिया. कल्पना कीजिए अगर प्रधानमंत्री भी अपने पद को भाड़े पर दे, तो क्या मंजर होगा?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here