शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में विवादित बाबरी-राम मंदिर वाली जमीन के पास की जगह पर पूजा करने की इजाज़त मांगने की याचिका खारिज कर दी है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस याचिका को फ़ाइल करने वाले पंडित अमरनाथ नाथ मिश्रा को फटकार लगते हुए कहा कि ‘आप जैसे लोग इस देश को शांति से नहीं रहने देंगे….किसी न किसी को हमेशा इस मामले में छेड़खानी करनी ही होती है।

फोटो सोर्स: गूगल

दरअसल हुआ यूँ कि पंडित अमरनाथ मिश्रा इलाहाबाद हाई कोर्ट से खारिज हुई अपनी याचिका को चुनौती दी थी। अमरनाथ पहले भी इलाहाबाद हाई कोर्ट में विवादित जगह पर पूजा करने की याचिका दाखिल की थी जिसको हाई कोर्ट ने खारिज करने के साथ-साथ उनपर 5 लाख का जुर्माना भी लगाया था। अमरनाथ मिश्रा ने कोर्ट में अपनी दलील दी थी कि “अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि है, जिसे लेकर लोगों के मन में आस्था है। विवादित जगह के आस-पास की 67.7 एकड़ अधिग्रहित ज़मीन पर विवाद नहीं है। ऐसे में यहाँ लोगों को यहाँ पूजा करने की अनुमति दें।

जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने हाई कोर्ट के फैसले का समर्थन करते हुए अमरनाथ की याचिका खारिज करदी और हाई कोर्ट द्वारा 5 लाख के फाइन को भी नहीं हटाया। चीफ जस्टिस गोगोई ने कहा कि उस ज़मीन पर पहले से ही कार्यवाही चल रही है। एडवोकेट वीके बीजू जो कि अमरनाथ मिश्रा के वकील हैं उन्होने कोर्ट से अपील की कि उनके क्लाईंट कई मुस्लिम समुदायों के पास इस बात पर समर्थन के लिए जा चुके हैं और सभी संस्थाओं ने कहा है कि गैर विवादित ज़मीन पर बने मंदिरों में पूजा करने से उन्हे कोई आपत्ति नहीं है।

विवादित ज़मीन का मैप। फोटो सोर्स:गूगल

तमाम दलीलों के बाद भी सुप्रीम कोर्ट अपने लिए फैसले पर बना रहा और याचिका खारिज कर दी।

इस बात को धार्मिक मोड़ देने के लिए इसे ‘हिंदुओं के साथ हुयी नाइंसाफी’ ‘राम जन्म भूमी में अब पूजा भी नहीं कर सकते हिन्दू’ जैसी बाते करके विवादित खबर भी बनाया जा सकता है। लेकिन ऐसा नहीं है कि यह पहली बार है। पिछले साल इलाहबाद कोर्ट ने इसी तरह की एक याचिका को खारिज किया था जहाँ एक मुस्लिम व्यक्ति ने विवादित ज़मीन पर नमाज़ पढ़ने की इजाज़त की मांग की थी। कोर्ट ने उसे चीप पब्लिसिटी बताते हुए याचिका खारिज कर दिया था और साथ ही 5 लाख का फाइन भी लगाया था।

सुप्रीम कोर्ट की बात को अगर समझा जाए तो फैसला बिलकुल सही नज़र आता है। जो जगह धर्म और आस्था को लेकर पहले ही विवाद में है उस जगह पर पूजा और नमाज़ पढ़ने की इजाज़त मांगने का क्या मतलब है? सही माइनों में तो आस्था मन में होती है मंदिर या मस्जिद में नहीं।

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