अयोध्या जमीन विवाद सुलझने में अभी और वक्त लग सकता है. दरअसल में साल 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या में 2.77 एकड़ की विवादित भूमि को तीन पक्षों सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर बांट दिया था. इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दायर की गई हैं. उसके बाद से ही अयोध्या विवाद का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है.

इसी दौरान विवाद के जल्द समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मामले में मार्च 2018 को एक मध्यस्थ समिति बनाई, इस मध्यस्थ समिति में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एफएमआई कलीफुल्ला, आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर तथा वरिष्ठ अधिवक्ता श्री राम पांचू का नाम शामिल है.

सुप्रीम कोर्ट के 8 मार्च के आदेश के बाद शुक्रवार को पहली सुनवाई हुई. 8 मार्च को कोर्ट ने कहा था कि मध्यस्थता प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर शुरू होगी और समिति चार सप्ताह के भीतर प्रोग्रेस रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी. कोर्ट ने समिति को इन-कैमरा प्रॉसिडिंग के साथ उसे आठ सप्ताह के भीतर पूरा करने के लिए कहा था. संवैधानिक पीठ ने कहा था कि विवाद के संभावित समाधान के लिए मध्यस्थता के संदर्भ में कोई ‘कानूनी बाधा’ नहीं है.

अयोध्या विवाद (प्रतीकात्मक तस्वीर), फोटो सोर्स- गूगल

शुक्रवार की सुनवाई में क्या हुआ?

मध्यस्थता कमेटी के गठन के बाद सुप्रीम कोर्ट में पहली बार इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को हुई. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा बेंच में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नज़ीर ने मामले की सुनवाई की. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मध्यस्थता कमेटी की रिपोर्ट मिल गई है. तीन सदस्यीय मध्यस्थता कमेटी ने इस मामले का समाधान निकालने के लिए और वक़्त मांगा है और अदालत ने इसकी मंज़ूरी दे दी है. मध्यस्थता कमेटी ने उम्मीद जताई कि वो 15 अगस्त तक इस मसले का समाधान ढूंढ लेंगे. पाँच जजों की पीठ ने इस पर सहमति जताते हुए मध्यस्थता कमेटी को 15 अगस्त तक का वक़्त दे दिया.

कमेटी ने मध्यस्थता के ज़रिये इस विवाद को सुलझाने में अभी तक जो काम किया है उसकी पूरी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सौंप दी गई है। चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान कहा कि मध्यस्थता पैनल और वक्त चाहता है, हम इसके लिए सहमत हैं. उन्होंने कहा कि मध्यस्थता की प्रक्रिया को लेकर हमने रिपोर्ट देखी है. पैनल ने 15 अगस्त तक वक्त मांगा है. ऐसे में समय दिया जा रहा है. हम नहीं चाहते हैं कि मध्यस्थता के बीच में आएं. चीफ जस्टिस ने कहा कि पैनल आशावादी है. हालांकि पैनल ने क्या प्रगति की है, हम बताना नहीं चाहते.

मध्यस्थता समिति के सदस्य श्री श्री रविशंकर, पूर्व जज एफएमआई कलीफुल्ला, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री राम पांचू, फोटो सोर्स- गूगल

आपको बता दे अदालत ने कहा था कि मध्यस्थता की कार्यवाही पर मीडिया रिपोर्ट नहीं कर सकेगा. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि मध्यस्थता की कार्यवाही ‘अत्यंत गोपनीयता’ के साथ की जानी चाहिए और मध्यस्थों सहित किसी भी पक्ष द्वारा व्यक्त किए गए विचारों को गोपनीय रखा जाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या से लगभग 7 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में मध्यस्थता का स्थान तय किया था और कहा था कि राज्य सरकार द्वारा मध्यस्थों के ठहरने के स्थान, उनकी सुरक्षा, यात्रा सहित सभी व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि कार्यवाही तुरंत शुरू हो सके.

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