वाराणसी लोकसभा सीट से महागठबंधन प्रत्याशी तेज बहादुर ने चुनाव आयोग द्वारा नामांकन रद्द किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरावाजा खटखटाया था। शायद इस उम्मीद से कि सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें इस बारे में कुछ पॉजिटिव रिसपॉन्स मिलेगा। लेकिन वहां भी तेज बहादुर को निराशा ही हाथ लगी है। चुनाव आयोग द्वारा जब नामांकन रद्द हुआ तो तेज बहादुर की तरफ से वकिल प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। जिसमें कहा गया था कि तेज बहादुर का नामांकन गलत और गैरकानूनी तरीके से रद्द किया गया है।

रंजन गोगोई, फोटो सोर्स: गूगल
रंजन गोगोई, फोटो सोर्स: गूगल

जिसपर सुनवाई की जाए और 19 मई को चुनाव लड़ने की इजाजत दी जाए। उन्होंने आगे कहा कि वो इस तरह की अपील करके चुनाव को रोकना नहीं चाहते हैं बल्कि, वो बस ये चाहते हैं कि इस चुनाव में तेजबहादुर को भी चुनाव लड़ने दिया जाये। इस मामले की सुनवाई रंजन गोगोई की पीठ कर रही थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिय़ा कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है।

अखिलेश यादव ने इस मामले पर क्या कहा?

एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि अगर बनारस से फौजी को चुनाव लड़ने का मौका मिल जाता तो शायद इससे दिलचस्प मुकाबला कोई नहीं होता। तेज बहादुर के नामांकन रद्द करने के बाद जनता भी कई तरह के सवालों का जवाब चाहती है। मान लीजिए, एक सरकार जो कि आतंकवाद से लड़ना चाहती है वही सरकार वाराणसी में एक फौजी से घबरा गयी।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव। फोटो सोर्स: गूगल
सपा प्रमुख अखिलेश यादव। फोटो सोर्स: गूगल

इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तेज बहादुर की शिकायत पर सुनवाई करते हुए चुनाव आय़ोग को निर्देश दिया था कि तेज बहादुर के हर बिन्दु पर गौर किया जाए और गुरुवार तक कोर्ट में जवाब दाखिल किया जाए। जिसके बाद चुनाव आयोग की ओर से राकेश द्विवेदी ने अपना पक्ष रखा और इस दौरान उन्होंने आरपी एक्ट सहित पुराने फैसलों का हवाला दिया। फिर दोनों पक्षों के फैसले सुनने के बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

1 मई को हुआ था नामांकन रद्द

सपा ने वाराणसी से पहले शालिनी यादव को टिकट दिया था लेकिन फिर प्रत्याशी बदलकर तेज बहादुर को टिकट दे दिया था। वाराणसी के निर्वाचन अधिकारी (आरओ) ने तेज बहादुर यादव के जरिए दाखिल नामांकन के दो सेटों में विसंगति को लेकर नोटिस जारी किया था। 24 अप्रैल को अपने दाखिल दस्तावेज में तेज बहादुर ने कहा था कि उसे सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) से बर्खास्त किया गया था लेकिन, 29 अप्रैल को समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर दाखिल अपने दूसरे सेट में इस सूचना का जिक्र तेज बहादुर द्वारा नहीं किया गया।

तेज बहादुर, फोटो सोर्स: गूगल
तेज बहादुर, फोटो सोर्स: गूगल

साथ ही तेज बहादुर को बीएसएफ से अनापत्ति प्रमाण पत्र(एनओसी) भी जमा करना था, जिसमें बर्खास्तगी के कारण बताए जाने थे। इसके लिए चुनाव आयोग ने 30 अप्रैल को शाम 6 बजे नोटिस जारी किया था। जिसके अनुसार तेज बहादुर को 11 बजे तक यह प्रमाण लाने को कहा गया। लेकिन तेज बहादुर नाकाम रहे थे। जिसके बाद उनका नामांकन रद्द कर दिया गया था।

नामांकन रद्द होने के बाद महागठबंधन के सामने समस्या आ गई थी कि वो अब वाराणसी से किसको अपने प्रत्याशी के तौर पर उतारेगा। इस दौड़ में शालिनी यादव सबसे आगे थी इसलिए सपा ने उन्हें ही पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए उतार सकती है। 23 मई को परिणाम आने हैं और वाराणसी में सबसे अन्तिम चरण में मतदान होने वाला है। इसलिए अब सपा के पास काफी कम समय बचा है कि वो अपने प्रत्याशी की घोषणा करें जो पीएम मोदी को कड़ी टक्कर दे सके।

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