सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को श्रीसंत पर लगे आजीवन बैन को हटा दिया है. 2013 में आईपीएल के स्पॉट फिक्सिंग मामले में श्रीसंत पर बीसीसीआई ने बैन लगाया था. अदालत ने क्रिकेट बोर्ड से कहा कि वह अगले तीन महीनों के भीतर पूर्व भारतीय तेज़ गेंदबाज के लिए नई सजा पर विचार करें और उनपर लगे आजीवन बैन को हटा दें. कोर्ट ने श्रीसंत कि दलील को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होने खुद को इस केस से बरी होने की बात कही थी.

एस श्रीसंत फोटो सोर्स गूगल

जस्टिस अशोक भूषण और के.एम. जोसेफ ने कहा कि एक क्रिकेटर के लिए बहुत बड़ी राहत है. आजीवन प्रतिबंध “बहुत कठोर दंड है”. सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि कोर्ट के सुनवाई का असर उन पर चल रहे आपराधिक कार्यवाही पर नहीं पड़ेगा. श्रीसंत के साथ-साथ और कुछ क्रिकेटरों पर दिल्ली हाइ कोर्ट में मैच फिक्सिंग मामले में केस चल रहा है. ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में सभी क्रिकेटरों को डिस्चार्ज कर दिया था पर दिल्ली पुलिस ने ट्रायल कोर्ट के इस निर्णय को हाई  कोर्ट में चैलेंज किया था जहां अब भी यह केस चल रहा है.

अक्टूबर 2017 में, केरल के उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने बीसीसीआई की एक याचिका के बाद श्रीसंत पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था. इससे पहले, अदालत ने प्रतिबंध को रद्द कर दिया था और बीसीसीआई को प्रतिबंध हटाने का आदेश दिया था.

श्रीसंत के वकील सलमान खुर्शीद ने दलील देते हुए कहा-

“मोहम्मद अजरुद्दीन पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया गया था. पाकिस्तान के सलीम मलिक पर भी लगे प्रतबंध को कोर्ट ने खारिज कर दिया था और हैंसी क्रोन्ये के साथ भी यही हुआ था. ऐसा यह पहली बार नहीं है और पहले भी कोर्ट ने बीसीसीआई के फैसले को पलटा है.” 

सलमान खुर्शीद /फोटो सोर्स गूगल

खुर्शीद ने तर्क देते हुए कहा कि प्रतिबंध और अपने करियर का सबसे अच्छा हिस्सा खोने के बावजूद, श्रीसंत बीसीसीआई के प्रति वफादार रहे हैं और बोर्ड के साथ “फिर से जुड़ना” चाहते हैं. खुर्शीद ने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस के हांथों उनके क्लाईंट को काफी यातनाएं सहनी पड़ी है.

सलमान खुर्शीद ने यह भी कहा-

“यह एक तथ्य है कि उन्होंने एक तौलिया का इस्तेमाल किया. कई खिलाड़ी करते हैं. उनका कोई आपराधिक इरादा या बेईमानी नहीं थी. आखिरकार कोर्ट ने सही फैसला सुनाया.”       

 

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