हम सभी ने आठवी कक्षा में मौलिक अधिकारों के बारे में पढ़ा है. उस दौरान एक नया-नया शब्द सुनाई दिया था. धर्मनिरपेक्ष. मैडम ने अलग से 20 मिनट लेकर इसके बारे में बताया था. हमको मोटा-मोटी समझ आ गया था कि जिस देश में हम रहते हैं वो धर्मनिरपेक्ष है यानि जहां लोगों को अपना धर्म चुनने की आज़ादी है और उस धर्म के आधार पर उसके साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जा सकता.

इन दिनों देश में धर्म को लेकर जो माहौल है वो किसी से छुपा नहीं है. इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने कुछ ऐसा किया है, जो इस माहौल में कुछ सकारात्मक्ता लेकर आया है.

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें भारत के सभी मुसलमानों को देश छोड़कर पाकिस्तान चले जाने को कहा गया था. इस याचिका की सुनवाई जस्टिस रोहिंटन नरीमन और जस्टिस विनीत शरण कर रहे थे.

जस्टिस नरीमन ने इस याचिकाकर्ता के वकील को याचिका में दिए गए आवेदन को पढ़ कर सुनाने को कहा. इसके बाद वकील से पूछा गया कि क्या आप सच में इस मुद्दे पर बहस करना चाहते हैं? इसके साथ ही जस्टिस ने उनसे कहा कि हम आपकी बात सुनेंगे लेकिन इसके साथ ही आपके खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी पारित करेगें. ये बात सुनकर वकील ने अपने पैर पीछे खिसका लिए और बहस से पीछे हट गए. वकील के जवाब के बाद इस याचिका को खारिज कर दिया गया.

प्रतिकात्मक तस्वीर

हमारे देश में ऐसे कई असमाजिक तत्व है जो हिंदू-मुस्लिमों के बीच दीवार खड़ी करने में लगे हुए हैं. लेकिन भारत का संविधान इतना भी कमज़ोर नहीं है.

इससे पहले पिछले साल दिसंबर में मेघालय के हाई कोर्ट जस्टिस एसआर सेन ने एक बार कहा था कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है और सारे मुस्लमानों को विभाजन के समय ही पाकिस्तान चले जाना चाहिए था. जस्टिस सेन ने अपनी ये टिप्पणी एक याचिका का निपटारा करने के दौरान की थी जिसके बाद इस साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रंजन गोगोई ने हाईकोर्ट के रजिस्टार को नोटिस जारी करते हुए इस टिप्पणी हटाने को कहा था.

देश में जो भी भाजपा के विरुद्ध या फिर देश के हालात के बारे में कुछ कह देता है तो उसे पाकिस्तान भेजने का ऐलान होने लगता है. ऐसा आमिर खान, शाहरूख खान, नसीरूद्दीन शाह समेत कई लोगों के साथ हो चुका है. मैं कहना चाहती हूं कि ये देश हर उस मुसलमान का है जिसने विभाजन के दौरान यहां रहने का फैसला किया. उस हर एक मुसलमान का उतना ही हक है जितना इस देश में रहने वाले किसी और धर्म के व्यक्ति का. इस देश में भले हिंदुओं की संख्या ज़्यादा हो, लेकिन भारत एक धर्म विशेष नहीं बल्कि धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है.

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