हमारे देश की सबसे बिज़ी पार्टी बीजेपी को ज़रुरत है, थोड़ा टाइम निकालने की. टाइम निकाल कर पहले वह थोड़ा आराम कर ले और अपना दिमाग शांत कर ले. बेस्ट है कुछ देर की नींद ले और जब नींद से जग जाए तो एक कैबिनेट की मीटिंग बुलाए और तय करे कि एंटी नेशनल किस पैमाने पर घोषित किया जायेगा. यह सब कुछ आम लोगों के लिए तय किया जाए क्योंकि, आप सभी ने तो अपने दिमाग में एक पैमाना सेट कर ही लिया है जिसकी बिनाह पर आप लोगों को राष्ट्र-विरोधी घोषित कर देते हैं. इस पैमाने से यह फायदा होगा कि हमारे जैसे युवा भटक नहीं पायेंगे और उन रूल्स को फॉलो करके हम राष्ट्रवादी बन पायेंगे. सरकार चाहे तो इसका कोई सर्टिफिकेट कोर्स भी लागू कर सकती है, जिस कोर्स को हम पूरा करके सर्टिफाइड राष्ट्रवादी बन जाएं. जहाँ तक हमें जानकारी है बीजेपी में तो खरे राष्ट्रवादी पाए जाते हैं और वो भी बिलकुल वर्जिन राष्ट्रवादी, तो अगर वे लोग ही रूल बनाएं तो गलती की कोई गुंजाइश होने वाली नहीं है.

हमें पहले बताया गया था कि स्कूल-कॉलेज में विद्यार्थी पढ़ते हैं. पर अभी के कुछ वर्षों के ज्ञान से हमें यह पता लगा है कि हमारी जानकारी गलत थी. आज के पढ़े-लिखे लोग बता रहे हैं कि कॉलेज में विद्यार्थी नहीं बल्कि एंटी नेशनल्स पढ़ते हैं. पढ़े-लिखे ही होंगे तभी तो सरकार के इतने बड़े-बड़े पदों पर विराजमान हैं. पश्चिम बंगाल के बीजेपी प्रेसीडेंट दिलीप घोष ने शुक्रवार को कहा कि जाधवपुर यूनिवर्सिटी राष्ट्र विरोधियों और कम्युनिस्टों का अड्डा बन चुका है. दिलीप ने आगे कहा कि उनका संगठन बालाकोट जैसा सर्जिकल स्ट्राइक करेगा इन राष्ट्र विरोधियों और कम्युनिस्टों को ख़त्म करने के लिए.

दिलीप घोष जी से हमारे कुछ सवाल हैं-

1- विद्यार्थी राष्ट्र विरोधी कैसे बनता है?

2- किस ज़रुरत को पूरा करने के लिए वो राष्ट्र-विरोधी बनते हैं?

3- आम लोग इन जैसे राष्ट्र-विरोधियों को कैसे पहचानेंगे?

जाधवपुर यूनिवर्सिटी/फोटो सोर्स गूगल
जाधवपुर यूनिवर्सिटी/फोटो सोर्स गूगल

ये कुछ सवाल तो हम बस आपको मौन करने के लिए पूछ रहे थे ताकि कहीं दिमाग में अगर ज़रा सी विद्युत बाकी हो तो दिमाग की बत्ती जल जाए. आपकी मानसिकता को तो हम पहले ही जान चुके हैं, जिसके बारे में नीचे लिखने जा रहे हैं. आपके हिसाब से वे विद्यार्थी राष्ट्र-विरोधी इसलिए हैं क्योंकि वो आपके द्वारा बनाई हुई नीतियों पर सवाल पूछते हैं. वो इसलिए राष्ट्रविरोधी हैं क्योंकि वो आपकी बातों में सर हिलाकर हामी नहीं भरते हैं. वो आपकी बातों में तर्क ढूंढ रहे हैं इसलिए वो एंटी नेशनल हैं. वो आपकी कठपुतली नहीं है इसलिए राष्ट्रविरोधी हैं.

राष्ट्र विरोधियों के साथ-साथ घोष जी ने कम्युनिस्टों को भी खत्म करने की बात कही है, जिससे उनका डर दिखता है. इनको शायद इस बात की इल्म नहीं है कि विचारधारा को मारा नहीं जा सकता. कम्युनिस्ट एक विचारधारा है और किसी भी विचारधारा को फॉलो करना तब तक बुरा नहीं है जब तक वो किसी को नुकसान नहीं पहुंचाती है.

दिलीप घोष/फोटो सोर्स गूगल
दिलीप घोष/फोटो सोर्स गूगल

दिलीप घोष ने तृणमूल कांग्रेस पर इलज़ाम लगाते हुए कहा है कि वह बैठ कर तमाशा देख रही थी और पार्टी ने उपद्रवियों के खिलाफ कोई एक्शन भी नही लिया. दिलीप घोष ने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस इंतज़ार कर रही थी भीड़ के हाथों बाबुल सुप्रियो के मारे जाने की. वह अमित शाह को चिठ्ठी लिख कर पूरी घटना की जानकारी देंगे. नेता जी यह बात तो आप भी जानते हैं कि पत्र तो बस बोलने वाली बात है, ज़हर तो आप खुद ही जाकर उनके सामने घोलेंगे.

भीड़ /फोटो सोर्स गूगल
भीड़ /फोटो सोर्स गूगल

इससे और बदतर बात क्या हो सकती है कि वह अपने संगठन की तुलना हमारे देश की सेना से कर रहे हैं जिन्होंने अपनी जान मुश्किल में डाल कर बालाकोट में सर्जिकल स्ट्राइक किया था. यह बात बोलने की हिम्मत कहाँ से आती है? जब सेना के द्वारा की गई कार्यवाही को हम मोदी जी की सफलता बताते हैं, तब इन जैसे नेताओं को ये साहस आता है कि खुद को आर्मी वालों से कंपेयर करें. आज जो इनके इस भाषण पर चुप्पी लगी हुई है, हम दावे से यह बात कहते हैं कि इनके अलावा किसी और पार्टी के सदस्य ने अगर यह बात कही होती, तो कब का ये और इन जैसे बुद्धिजीवी उस इंसान को पाकिस्तान भेजने के लिए उतारू हो गए होते.

शायद नेता जी को इस पूरे घटनाक्रम में उस लड़के की खबर किसी ने नहीं दी जिसे भाड़े के गुंडों ने बैट, विकेट और अन्य हथियारों से ‘जय श्री राम’ का नारा लगाते हुए पीटा था. हम बीजेपी पर उस लड़के के हमले का आरोप नहीं लगा रहे हैं पर एक सवाल का जवाब दीजिये कि सो कॉल्ड ‘जय श्री राम’ का पेटेंट इस वक़्त कौन लेकर बैठा है? जिस भी पार्टी के पास इसका पेटेंट है उसे इस हमले की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए. अगर वह पार्टी ऐसा करने से डरती है तो खुद को फिर कायर घोषित कर दीजिये क्योंकि, अगर बाबुल सुप्रियो के साथ कुछ बुरा हुआ है तो उस पर कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए और वह क़ानून की ही प्रक्रिया में होगी. पर जिस तरह के भाषण आप दे रहे हैं, आप एक नए भीड़ को तैयार कर रहे हैं जो कि विद्या भवनों में घुस कर कल किसी विद्यार्थी को मार देगी और हम फिर भीड़ को पहचान नहीं पायेंगे और सारे आरोपियों को बेनिफिट ऑफ डाउट का ताज पहना दिया जाएगा.

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