विदेश मंत्री सुषमा स्वराज कल आबू धाबी पहुंच गई हैं. जिसको लेकर खबरों का बाज़ार काफी गर्म है. आबू धाबी जाने की असल वजह है वहां आयोजित होने वाला ओआईसी का कार्यक्रम. इस कार्यक्रम में सुषमा स्वराज को गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में बुलाया गया है. मई, 2018 में ओआईसी की 45वी बैठक हुई थी जिसमें बांग्लादेश ने भारत का पक्ष लेते हुए कहा था कि भारत में 10 फीसदी मुस्लिम आबादी है और इसी कारण उसे भी इस संगठन का निरीक्षण करने के लिए बुलाना चाहिए.

क्या है OIC?

ओआईसी यानि कि ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन, हिंदी में इस्लामिक सहयोग संगठन. ये मुस्लिम देशों का सबसे बड़ा संगठन हैं जिसमें 57 देश शामिल है. जिनमें करीब-करीब 180 करोड़ लोग रहते हैं. सबसे बड़े अंतर्राष्ट्रीय संगठन यूएन के बाद यही दूसरा बड़ा संगठन है. इसकी स्थापना 24 मुस्लिम देशों की उपस्थिति में 1969 में हुई थी.

संगठन का उद्देश्य

  • मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक क्षेत्रों में एक-दूसरे का प्रोत्साहन बढ़ाना.
  • ये संगठन सदस्य राष्ट्रों में पल रहे उपनिवेशवाद को खत्म करने और जातीय भेदभाव व अलगाववाद को खत्म करने का प्रयास करते हैं.
  • विश्व के सभी मुस्लमानों के राष्ट्र अधिकारों और उनकी स्वतंत्रता की रक्षा करना इस संगठन का मुख्य उद्देश्य है.
  • इसका एक बड़ा उद्देश्य है सभी देशों के बीच शांति स्थापित करना और सहयोग के तालमेल को बढ़ाना.

 पहली बार आया बुलावा

1969 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब भारत को ओआईसी के कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण मिला है. भारत के औद्दोगिक विकास मंत्री फखरूद्दीन अली अहमद 1969 में इसमें शामिल होने गए थे लेकिन ऐन मौके पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति याहिया खान ने वीटो पॉवर का इस्तेमाल कर भारत को वहां सम्मिलित होने से रोक दिया था, जिससे भारत को इस बैठक से बाहर होना पड़ा था.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि हम इस बार के ओआईसी सम्मेलन का हिस्सा नहीं बनेंगे. इसका कारण उन्होने बताया है भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर बुलाया जाना.

सुषमा स्वराज का इस 46वें सम्मेलन में जाना पाकिस्तान को इतना अखर गया कि वो अब इसमें शामिल ही नहीं हो रहा. ये पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने इस मंच पर भारत का विरोध किया है. जब बांग्लादेश ने भारत का पक्ष लेते हुए उसे बुलाने का सुझाव रखा था तब भी पाकिस्तान ने इस बात का विरोध किया था. लेकिन देखिए ओआईसी की 46वी बैठक है और सुषमा स्वराज वहां भारत का नेतृत्व कर रही हैं.

पुलवामा हमले के बाद ये बैठक बहुत अहम है. पूरी दुनिया में पाकिस्तान की किरकिरी हुई है. भारत और पाकिस्तान के बीच का तनाव अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुका है. कश्मीर के मुद्दे को लेकर भी ये बैठक अहम है. 2 मार्च को इस बैठक का आखिरी दिन होगा, संगठन इस दिन अपनी ओर से कई प्रस्ताव पारित करेगा. पिछले साल की बैठक में 39 प्रस्ताव पारित हुए थे जिनमें से एक मुद्दा कश्मीर का था. न्यूज़ रिपोर्ट्स के मुताबिक बैठक में मुस्लिम देशों में शांति, सुरक्षा और अलगाववाद को मिटाने पर चर्चा की जाएगी.

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