बिस्मिल एक ऐसा शायर जो खुले हाथों से फांसी का फंदा चूमना चाहता था।

  लबे-दम भी न खोली ज़ालिमों ने हथकड़ी मेरी तमन्ना थी कि करता मैं लिपटकर प्यार फांसी