राजस्थान सरकार ने एक बहुत बड़ा इनिशिएटिव लिया है। अब बलात्कार जैसी घटनाओं में पीड़ित महिलाएं/लड़कियां आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के पास जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं। ऐसे कदम उठाना ज़रूरी है क्योंकि अमूमन  राजस्थान जैसे कई इलाकों में लड़कियों और औरतों के साथ जब भी ऐसी से घटनाएं होती है तो उन पर दबाव बनाया जाता था कि ऐसी बातें घर से बाहर नहीं जानी चाहिए, जिसकी वजह से ये मामले पुलिस तक नहीं पहुँच पाते हैं और न ही पीड़िता को न्याय मिल पाता है। अभी कुछ दिन पहले ही राजस्थान में ‘थानागाजी गैंगरेप’ जैसी शर्मनाक घटना के हो जाने की वजह से सरकार ने ये कदम उठाया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स- गूगल

थानागाजी गैंगरेप केस –

अलवर जिले के थानागाजी में एक महिला के साथ उसके पति के सामने ही कई लोगों ने मिलकर गैंगरेप किया था। इस मामले में जांच रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य सरकार ने मामले में लापरवाही बरतने के चलते थानागाजी के पुलिस इंस्पेक्टर सरदार सिंह के खिलाफ एसटी एससी एक्ट और अन्य धाराओं में केस दर्ज करने और 16 सीसी की चार्जशीट देने के निर्देश दिए है। 

इसके अलावा सात दोषी पुलिस अधिकारियों को हटाने तथा जगमोहन शर्मा का जिले से बाहर ट्रांसफर और चार्जशीट देने के ऑर्डर दिये है। एसपी और एसएसपी से बयान मांगा गया है। इन्हीं सब मामलों के चलते राजस्थान सरकार ने ये कदम उठाया है जहां रेप की शिकार हुई महिलाएं बिना किसी डर, बिना किसी दबाव के बेझिझक अपनी आप बीती बता सकेगी।

सरकार के नियमों पर भी नज़र डाले –

थानागाजी गैंगरेप के बाद सरकार अब महिलाओं के हित में एक और नया नियम लागू करने जा रही है। अगर अब कोई महिला या लड़की के साथ हुए किसी भी तरह के रेप जैसे अपराध, जिसके खिलाफ वो पुलिस में रिपोर्ट कराने से डरती है अब ऐसी विक्टिम औरतें “साथिन और आंगनबाड़ी” कार्यकर्ता  की मदद से अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं।

फोटो सोर्स- गूगल

इन महिला कार्यकर्ताओं का पुलिस के साथ सीधा कनेक्शन होगा। शिकायत मिलने के बाद पुलिस खुद पीड़िता से मिलकर केस दर्ज करने के बाद एक्शन लेगी। सरकार इन मामलों में सजा के प्रोविज़न को लेकर सब के पास जाकर गांव-गांव में प्रचार भी करेगी, जिससे अपराधियों के मन में डर रहे। राज्य गृह मंत्रालय इसका सर्क्युलर तैयार कर रहा है। 11 जून को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में होने वाली रिव्यू मीटिंग में इस सर्कुलर को मंजूरी मिल सकती है।

थानागाजी मामले में कंपलेंट दर्ज करने में पुलिस की लापरवाही से सरकार की काफी झिकझिक हुई थी। इसके बाद राज्य गृह मंत्रालय को निर्देश दिए गए थे कि ऐसे मामलों में ऑप्शन्स  उपलब्ध कराये जाएँ। इसके बाद 1 जून से ये रूल लागू किया गया कि इस तरह की कंपलेन के लिए औरतें चाहे तो सीधे एसपी ऑफिस में रिपोर्ट दर्ज करा सकती हैं।

फोटो सोर्स- गूगल

 पूरे पुलिस स्टेशन को बदलने का फैसला लिया –

थानागाजी मामले में मिली रिपोर्ट के बाद सरकार ने डीएसपी जगमोहन शर्मा के साथ पूरे थाने का ट्रांसफर करने और एसएचओ सरदार सिंह के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट में केस दर्ज करने का फैसला लिया है। डीएसपी, एसएचओ व कांस्टेबल महेश काे 16 सीसीए की चार्जशीट दी जाएगी। एसआई बाबूलाल, एएसआई रूपनारायण, कांस्टेबल घनश्याम, बृजेंद्र, राजेंद्र व राम रतन पर रूल के साथ एक्शन लिया जाएगा। कुछ समय के लिए बने एसपी राजीव पचार व एएसपी चिरंजीलाल काे भी सफाई देनी होगी।

सरकार द्वारा उठाया ये कदम कितनी दूर तक जाएगा ये कह पाना मुश्किल है क्योंकि ऐसे कई कदम रहे हैं जो महिलाओं की सुरक्षा हेतु बनाए गए थे लेकिन इम्प्लीमेंट कितना हुआ ये सब ही जानते है। मगर फिर भी सरकर के इस एक्शन से वहाँ की औरतों में एक नयी उम्मीद जागी है जिसके चलते वो रेप जैसे जुर्म के खिलाफ बोल सके।

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