साल 1691 ई. से देश के एक राज्य झारखंड में एक ऐतिहासिक मेला होता चला आ रहा है। जिस मेले में जगन्नाथ की रथ यात्रा के बहाने कभी देश के स्वतंत्रता सेनानी मिला करते थे और अंग्रेजों के खिलाफ़ आंदोलन की पूरी प्लानिंग किया करते थे। लेकिन इस साल हो रहे 2019 के इस ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मेले से एक ऐतिहासिक लेकिन दर्दनीय ख़बर आई है।

हुआ क्या है?

हुआ ये है कि इस ऐतिहासिक मेले में एक अजीबो-गरीब तमाशा दिखाया जा रहा था। अजीबो-गरीब इसलिए क्योंकि इस तमाशे में कोई नाच-गाना या किसी तरह का प्रदर्शन नहीं बल्कि, नवजात बच्चों की लाश का तमाशा दिखाया जा रहा था। यह सब पैसों के लिए हो रहा था और वो भी पुलिस वालों की मौजूदगी में। खैर, पुलिस वालों को क्या ही कहे, वो तो बस ड्यूटी पर हाजरी और अपना मुखड़ा दिखाने जाते हैं। उनसे कुछ कहो या शिकायत करो तो उनका कहना होता है कि हमे क़ानून मत सिखाओं, हवालात में डालकर सारा क़ानून निकाल दुंगा।

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जगन्नाथपुर मेला, फोटो सोर्स- गूगल

लेकिन ये अकड़ सिर्फ तब तक ही रहती है जब तक पुलिस वालों की सरकारी नौकरी पर बात न आ जाए या उनके ऊपर के अफसरों के मालिकों का दबाव न आ जाए। इस मामले में भी ऐसा ही कुछ हुआ। बात फैली और ऊपर तक गई तो अफसरशाही का जवाब भी आ गया। हटिया के डीसीपी प्रभात रंजन बरवार का कहना है कि,

‘मेले में ऐसी अमानवीय हरकत करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नवजातों की लाश कहां से आया, इसका पता लगाया जा रहा है’

हैरानी की बात तो ये है कि ये सभी बच्चे अविकसित थे, यानि वो बच्चे जो माँ की कोख में ही दम तोड़ गए और इस दुनिया को न देख पाए। इन सभी अविकसित बच्चों की लाश को टब और बंद हुई शीशे की बोतलों में केमिकल के साथ रखकर प्रदर्शन किया जा रहा था। और सिस्टम का मज़ाक तो देखिए कि जहां इस तरह का तमाशा चल रहा था उससे महज़ 50 मीटर की दूरी पर मेला ओपी(Observation Point) था। ओपी वो जगह है जहां पुलिस वाले मौजूद रहकर मेले की निगरानी करते हैं।

वक़्त बीतता रहा और पूरे दिन इस हैरानी में डालने वाले नज़ारों को लोग अपनी आंखों से निहारते रहे। मेले में आए लोग बड़ी हैरानी और दिलचस्पी के साथ वहां पूरे दिन भीड़ लगाए हुए थे और पैसे भी दे रहे थे। ख़ूब सारी फोटो खींचकर अपलोड और शेयर भी कर रहे थे। पूरे दिन इन नवजातों की फोटो वाइरल होती रही। फोटो वाइरल हुई तो इसकी जानकारी पुलिस के बड़े अफसरों के पास पहुंची। प्रेशर बढ़ा तो हटिया के डीएसपी प्रभात रंजन ने निर्देश दिए और फिर धुर्वा थाने की पुलिस मेले के उस स्टॉल पर पहुंच गई।

नवजातों की लाशों का तमाशा दिखाने वाले लोग, फोटो सोर्स- गूगल

मेले के उस स्टॉल पर पहुंचने के बाद नवजातों की लाश का तमाशा दिखाने वाले उन तीन लोगों को गिरफ्तार करके थाने ले गई। पूछताछ शुरू हुई तो कुछ जानकारियाँ निकलकर सामने आई। गिरफ्तार हुए ये आरोपी कोलकाता के सोरे बाजार जयमित्री स्ट्रीट के निवासी हैं। इनका नाम वकील माइटी, पिंटू माइटी और प्रभात सिंह हैं।

पूछताछ आगे बढ़ी तो उस सवाल का जवाब भी मिल गया जिसकी पुलिस को तलाश थी। सवाल थे कि इस तरह खुले तौर पर ये लोग इतने बड़े मेले में इस तरह का स्टॉल कैसे लगा पाए, किसने इनको पर्मिशन दी? और दूसरा जो महत्वपूर्ण सवाल था कि आखिर ये बदमाश पैसा कमाने की लालच में बच्चों की ये लाशे लाए कहां से? तो पूछताछ में पता ये चला कि इन तीनों ने मेला समिति को जानकारी देकर स्टॉल लगाए थे। साथ ही स्टॉल लगाने के लिए दस हज़ार रुपए जैसी बड़ी रक़म भी दी थी। लेकिन जब मेला समिति से इसका जवाब मांगा गया तो उन्होंने इससे साफ इंकार कर दिया। जगन्नाथपुर मेला न्यास समिति के कोषाध्यक्ष(Treasurer) लाल प्रवीण नाथ का कहना है कि,

‘मेला समिति की अनुमति के बगैर वहां स्टॉल लगाया गया था। ऐसा अजीबो-गरीब तमाशा मेला में कभी नहीं लगा था। मेला समिति का तमाशा करने वालों से कोई संबंध नहीं है। न ही पैसे लेकर उन्हें स्टॉल लगाने की अनुमति दी गई’

तो जनाब मान भी लिया जाए कि न आपकी मेला समिति ने पैसे लिए हैं, न आपने परमिशन दी स्टॉल लगाने की। तो आखिर ये लोग कैसे पूरे दिन पुलिस और आपकी समिति की आंखों के सामने इस तरह का तमाशा दिखाते रहे। दुनिया को ख़बर हो गई लेकिन आपको नहीं हुई। वाह, ये बात पचने जैसी तो नहीं है। बाकी सच छुपता नहीं है। आज नहीं तो कल कभी न कभी सच सामने आ ही जाएगा। खैर, दूसरे जवाब की तरफ बढ़ते हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स- गूगल

पूछताछ में दूसरे सवाल का जवाब यह मिला कि बच्चों की लाश, ये तीनों कोलकाता के एक मेडिकल कॉलेज से लाए थे और इनका मक़सद ये था कि लोगों को नवजातों की लाश दिखाकर रुपये कमाएं जाएं। लेकिन पुलिस इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है इसलिए इन तीनों से अभी और पूछताछ की जा रही है। ताकि ये केस आईने की तरह साफ हो पाए।

देवघर में भी मिल चुकी है ऐसी लाशें

साल 2017, तारीख़ 24 अप्रैल। झारखंड में देवघर के मोहनपुर प्रखंड स्थित दुमका रोड के ठीक किनारे एक गाँव बसा हुआ है। इस गाँव का नाम डुमरथर है। यहीं झाडिय़ों से पुलिस ने करीब एक दर्जन अर्ध-विकसित नवजातों के शव बरामद किये थे। सभी शव इस मेले के तमाशे की तरह शीशे की बोतलों में बंद मिले थे। और इस बात को जानकर आपका दिल तकलीफ़ से और आंखे आसुओं से भीग जाएंगी कि इन बच्चों की लाशों में ज़्यादातर लाशें बच्चियों की थी। एक दर्जन से ज़्यादा इस तरह बच्चों की लाशे मिलने से उस समय भ्रूण हत्या की आशंका जताई गई थी। क्योंकि इस घटनास्थल पर काफी संख्या में बियर की बोतलें भी मिली थीं।

पालोन की संयोजक मोनिका आर्य, फोटो सोर्स- गूगल
पालोन की संयोजक मोनिका आर्य, फोटो सोर्स- गूगल

इन पूरी घटना पर बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था पालोन की संयोजक मोनिका आर्य ने दु:ख जताते हुए कहा कि,

‘दुर्लभ बताकर इस तरह नवजातों की लाश पर तमाशा गलत है। यह अपराध की श्रेणी में है। पुलिस को इसकी जांच कर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। पुलिस पता लगाए कि बच्चों की लाश कहां से आई। पहले भी देवघर में बच्चों की बोतल बंद लाश मिल चुकी है। ये कनेक्शन वहां का भी हो सकता है’

इस आर्टिक्ल के कुछ अंश दैनिक जागरण से लिए गए हैं।

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