जब पिक्चरों में गोलियां चलने वाले सीन आते हैं तो, सिनेमा हाल सीटियों की आवाज़ों और हो-हल्ले से गूंज उठता है। लेकिन अगर ऐसा असल ज़िंदगी में होने लगे तो क्या वो सही होगा? क्या हम अपने आप को सुरक्षित महसूस कर पाएंगे? बिलकुल भी नहीं। लेकिन अफसोस कि ऐसा हमारे समाज में हो रहा है और खुले आम हो रहा है। प्रशासन और सरकारें हमेशा की तरह कार्रवाई करने की बात कर रहे हैं और हमेशा की तरह एक दूसरे को ऐसी समस्याओं का जिम्मेदार ठहराने में लगी हैं।

यूपी के सोनभद्र में कुछ ऐसा ही हुआ। जहां ट्रकों में सवार गुंडे आए और आकर गाँव वालों पर बेतहाशा गोलियां बरसानी शुरू कर दिया। बंदूक से निकलने वाली गोलियों ने न औरतों को देखा न आदमियों को और बस लाशों का ढेर लग गया। 10 लोगों की मौत हो गयी। 2 दर्जन से ज़्यादा लोग घायल हुए।

हत्याकांड के बाद सोनभद्र गाँव की तस्वीर, फोटो सोर्स:गूगल

32 ट्रैक्टरों पर सवार होकर 300 से ज़्यादा लोग हाथ में गंडासा और बंदूके लिए, पुलिस से बेखौफ वहाँ पहुंचे थे। 17 जुलाई, बुधवार को सोनभद्र के घोरावल थाना क्षेत्र के मूर्तिया गांव में जमीन कब्जाने को लेकर अंधाधुंध फायरिंग की ऐसी घटना हुई थी।

दरअसल गांव के बाहरी इलाके में सैकड़ों बीघे खेत हैं। जिस पर गांव के कुछ लोग पुश्तैनी तौर पर खेती करते आ रहे हैं। गांव वालों के मुताबिक इस जमीन का एक बड़ा हिस्सा प्रधान के नाम पर है। ग्राम प्रधान यज्ञदत्त ने एक आईएएस अधिकारी से 100 बीघे जमीन खरीदी थी।

वारदात वाले दिन यज्ञदत्त ने उस जमीन पर कब्जे के लिए बड़ी संख्या में अपने साथियों के साथ पहुंच कर ट्रैक्टरों से जमीन जोतना शुरू कर दिया। जब स्थानीय ग्रामीणों ने इसका विरोध किया, तो ग्राम प्रधान और उसके साथ के लोगों ने गांव वालों पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। थोड़ी देर में वहाँ लाशें बिछ गईं।

यह घटना सीधे और सटीक रूप से उत्तर प्रदेश की सरकार और प्रशासन को चुनौती देती है। ऐसा नहीं है कि यह एकलौता कांड है। अखबार और न्यूज़ में देखा जाये तो उत्तरप्रदेश में हत्या और बलात्कार की घटनाएँ रोजाना देखने को मिल जाती हैं। बस इतना बड़ा हत्या कांड कई सालों बाद सामने आया है।

घटना में मृत और घायल गाँव वाले, फोटो सोर्स: गूगल

पुलिस ने इस सामूहिक हत्याकांड के मामले में 29 लोगों को गिरफ्तार किया है और बाकी आरोपियों को पकड़ने के लिए छापेमारी की जा रही है। इस मामले में 61 लोगों पर मामला दर्ज किया गया है, जिसमें 50 लोग अज्ञात हैं। एक स्थानीय व्यक्ति लल्लू सिंह की याचिका पर गांव के मुखिया यज्ञदत्त, उसके भाई और अन्य पर भी एससी/एसटी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

अब हमारे देश में एक नया ट्रेंड चला है जहां हत्या और बलात्कार के मामलों में सवाल पूछे जाने पर मुआवजा देने की बात कर दी जाती है। एक दूसरे पर इल्ज़ाम लगाते हुए सरकारें जान की कीमत लगा कर मामले से पीछा छुड़ाती नज़र आती हैं। कोई पीड़ित के परिवार को 5 लाख रुपये देने की बात करता है तो दूसरा 10 लाख देने की बात कर देता है। लेकिन प्रशासन को मजबूत करने और बढ़ती अराजकता के माहौल को ठीक करने का कोई प्रयास होता नहीं दिखाई देता।

ये कोई हवाई बात नहीं है। कुछ ऐसा ही हो रहा है, इस हत्याकांड में। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से हत्याकांड के इस मामले पर जब सवाल पूछे गए तो उन्होंने बड़ी ही आसानी से वही कहा जो हर जुर्म की घटना होने के बाद वो अपनी सफाई में कहते हैं।

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ, फोटो सोर्स: गूगल

पहले तो उन्होंने इस घटना की निंदा की। फिर लखनऊ में संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कांग्रेस को इस घटना का जिम्मेदार बताया। उन्होंने घटना के पीछे की सारी हिस्ट्री बताते हुए कहा कि –

इस घटना की नींव 1955 में ही पड़ गई थी, जब कांग्रेस की सरकार थी। योगी के मुताबिक सोनभद्र के विवाद के लिए 1955 और 1989 की कांग्रेस सरकार दोषी है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत की जमीन को 1955 में आदर्श सोसाइटी के नाम पर दर्ज किया गया था। इस जमीन पर वनवासी समुदाय के लोग खेती-बाड़ी करते थे। बाद में इस जमीन को किसी व्यक्ति के नाम 1989 में कर दिया गया। 1955 में कांग्रेस की सरकार थी।

योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि:

मैंने खुद डीजीपी को निर्देश दिया है कि वो व्यक्तिगत रूप से इस मामले पर नजर रखें इस जमीन पर काफी समय से विवाद था और एक कमेटी इस मामले की जांच साल 1952 से करेगी।

अब इनके बयानों में आपको हिस्ट्री के बारे में पता चल जायेगा। कांग्रेस की गलती के बारे में पता चल जाएगा। वो जो उसने 1955, 1989 में की थी। लेकिन 2019 में हुए इस हत्याकांड पर योगी जी ने कुछ नहीं कहा और न ही अपनी गलती मानी।

वैसे कांग्रेस भी ऐसे मौकों पर पीछे नहीं रहती है। कांग्रेस सचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंची थी। लेकिन फिर उनको आधे रास्ते में ही पुलिस ने रोक दिया। फिर वहाँ पर भी आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया।

कांग्रेस महासचिव, प्रियंका गांधी, फोटो सोर्स: गूगल

कांग्रेस ने इस मामले पर ट्वीट करते हुए कहा कि –

यूपी की अजय सिंह बिष्ट सरकार द्वारा कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को सोनभद्र जाने से जबरन रोकना लोकशाही का अपमान है। बगैर लिखित आदेश और संविधान की मूल भावना के विपरीत अजय सिंह बिष्ट सरकार का यह कदम तानाशाही को दर्शाता है।

इसके अलावा एक और ट्वीट में लिखा गया कि:

सोनभद्र हत्याकांड के पीड़ितों से मिलने जा रही कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की गिरफ्तारी अजय सिंह बिष्ट सरकार की तानाशाही का निकृष्टतम उदाहरण है। हम पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए दृढ संकल्पित हैं और भाजपा सरकार के इन ओछे हथकंडों से डरने वाले नहीं हैं।

यूपी के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने प्रियंका को रोके जाने पर मीडिया से हुई बातचीत में कहा कि

धारा 144 लागू है। अगर आप राजनीतिक उद्देश्य से जाते हैं तो ये सही नहीं है। किसी को भी इतने संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। हमारी सरकार शांति बनाये रखने के लिए प्रतिबद्ध है।’

फिर उसके बाद कांग्रेस ने भी पीड़ित के परिवार वालों को 10 लाख का मुआवजा देने की बात कही। प्रियंका पीड़ितों के परिवारों से मिली और कहा कि ‘मेरा मक़सद पूरा हुआ।’

अब देखना है कि इस घटना के बाद किस तरह से कार्रवाई की जाएगी और क्या इसके बाद भी दबंगों का इस तरह खुलेआम तानाशाही करना चलता रहेगा?