आजादी के बाद से हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता रहा है. ये खबर जानने के बाद सबसे पहले आपके मन में एक ही सवाल आता होगा वो ये कि आखिर हम 15 जनवरी को ही क्यों भारतीय सेना दिवस मनाते हैं? मुख्य खबर पर पहुँचने से पहले हम आपको आपके इस सवाल का जवाब दे देते हैं.

15 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है भारतीय सेना दिवस?

देश को आजादी मिलने के बाद साल 1949 में आज ही के दिन भारत के अंतिम ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ, जनरल फ्रांसिस बुचर के स्थान पर तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल के. एम करियप्पा को भारतीय सेना का कमांडर-इन-चीफ बनाया गया था.

आजादी के बाद जनरल के. एम करियप्पा के पहले भारतीय सेना कमांडर-इन-चीफ का पदभार ग्रहण करने के उपलक्ष्य में इस दिन को सेना दिवस घोषित किया गया था. बाद में करियप्पा फील्ड मार्शल भी बने थे.

ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा कोलकाता में भारतीय सेना का गठन 1 अप्रेल 1895 में किया गया था. जिसे ब्रिटिश काल के दौरान ब्रिटिश इंडियन आर्मी नाम से जाना जाता था. भले ही भारतीय सेना की स्थापना 1 अप्रैल को हुई थी लेकिन आजादी के बाद से भारत ने सेना दिवस 15 जनवरी को मानना शुरू किया था. आज की तारीख में भारतीय सेना में लगभग 13 लाख सक्रिय सैनिक और करीब 96,000 आरक्षित सैनिक हैं. वहीं देश भर में सेना की 53 छावनियां और 9 आर्मी बेस हैं. इसी ताकत के साथ भारतीय थल सेना को विश्व में तीसरे नंबर की सबसे ताकतवर सेना माना जाता है.

खुद को राष्ट्रवादी कहने वाली मोदी सरकार के काल में कितनी ताकतवर हुई भारतीय सेना?

साल 2014 में केंद्र में आई बीजेपी सरकार खुद को राष्ट्रवादी बताती आई है. बीते 6 सालों में मोदी सरकार सेनाओं को मजबूत बनाने के लिए जल्द से जल्द सेना का आधुनिकीकरण करने का दावा करती रही है.

लेकिन इन सब दावों के उलट पिछले साल 21 जुलाई को संसद में भारत की रक्षा तैयारियों पर सीएजी द्वारा एक रिपोर्ट पेश की गई थी.  भारतीय सेना और सुरक्षा तैयारियों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सीएजी ने यहां तक कहा था कि भारतीय सेना के पास सिर्फ 10 दिनों तक युद्ध लड़ने के लिए ही गोला-बारूद का भंडार है.

बता दें कि जब भूटान में डोकलाम सीमा पर भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने आए थे, उस दौरान भी सीएजी ने भारतीय सेना की क्षमता पर गंभीर सवाल उठाए थे. डोकलाम विवाद के दौरान चीन लगातार कहता रहा कि भारतीय सेना पीछे हट जाए नहीं तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.

वहीं डोकलाम विवाद के समय चीन ने लगातार भारतीय सेना को इतिहास(1962 की लड़ाई में मिली हार) से मिले सबक से सीख लेने की बात कही थी. तब से ही देश में यह बहस चल पड़ी है कि क्या भारत अब चीन से मुकाबला करने में सक्षम है या नहीं ?

इसके अलावा सीएजी ने वायुसेना के मालवाहक एयरक्राफ़्ट आईएल-76 के रख-रखाव में खामियों के साथ-साथ वायुसेना के बेड़े में शामिल पुराने लड़ाकू विमानों की कार्य क्षमता पर सवाल उठाए थे.

वायुसेना के मालवाहक एयरक्राफ़्ट आईएल-76, फोटो सोर्स - गूगल

वायुसेना के मालवाहक एयरक्राफ़्ट आईएल-76, फोटो सोर्स – गूगल

भारतीय वायुसेना मिग-21 जैसे पुराने लड़ाकू विमानों से ही काम चला रही है. जो 1960 के दशक में शामिल किए गए थे. रिपोर्ट के अनुसार भारतीय सेना से जल्द ही मिग-21 विमानों को हटा दिया जाएगा. वहीं एक रिपोर्ट में सामने आया कि 2032 तक सेना को केवल 22 जहाजों का बेड़ा ही मिल पाएगा. वहीं इस रिपोर्ट में सीएजी ने भारतीय मिसाइल सिस्टम की विश्वसनीयता पर चिंता जताई थी.

वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय सेना ने चीन और पाकिस्तान से सामना करने के लिए 42 जहाजों का बेड़ा और क़रीब 750 एयरक्राफ्ट की मांग सरकार के सामने रखी है.

      ढाई मोर्चे पर युद्ध लड़ने के लिए कितनी तैयार है भारतीय सेना’

आज के समय में विश्व में हथियार आयात करने के मामले में भारत पहले नंबर पर आता हैं. इसके साथ ही केंद्र की मोदी सरकार भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और हथियारों के आयात को कम करने की दिशा में ‘मेक इन इंडिया’ योजना भी ज़ोर-शोर से चला रही है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट (SIPRI) की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2010 से 2014 के दौरान हुए विश्व हथियार आयात में अकेले भारत का हिस्सा 15 प्रतिशत रहा. भारत के पूर्व आर्मी प्रमुख बिपिन रावत कई मौकों पर कह चुके हैं कि भारतीय सेना ढाई मोर्चों पर एक साथ लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है.

लेकिन सीएजी की रिपोर्ट सामने आने के बाद सेना प्रमुख के इस बयान का मज़ाक उड़ाया गया. कहा गया कि आखिर वो किस आधार पर ढाई मोर्चों पर एक साथ युद्ध के लिए तैयार होने की बात कर रहे हैं ?

जेएनयू में साउथ एशियन स्टडी सेंटर की प्रोफ़ेसर सबिता पांडे कहती हैं कि-

किसी ताकतवर देश के लिए भी दो मोर्चे पर एक साथ युद्ध लड़ना इतना आसान नहीं होता है.

साल 1988 के बाद से रक्षा क्षेत्र में लगातार निवेश घटता हीं आ रहा है.

पिछले वित्तीय वर्ष में कुल बजट का 12.22 प्रतिशत रक्षा क्षेत्र में निवेश किया गया जो कि बीते दो दशकों में कुल बजट का सबसे कम हिस्सा था. साल 1988 में रक्षा क्षेत्र के लिए GDP का 3.18 प्रतिशत राशि आवंटित की गई थी. जिसके बाद से लगातार गिरावट देखने को मिली है. पिछले साल के बजट में भारत की कुल जीडीपी का 1.6 फ़ीसदी हिस्सा रक्षा पर खर्च करने के लिए आवंटित किया गया था जबकि वैश्विक स्तर यह मानक दो से 2.25 फ़ीसदी है.  भारत की तुलना में हमारे दोनों पड़ोसी देशों में से चीन ने अपनी जीडीपी का 2.1 फ़ीसदी हिस्सा रक्षा क्षेत्र पर आवंटित  किया था वहीं पाकिस्तान ने अपनी GDP का 2.36 प्रतिशत खर्च किया.

भारत की तीनों सेनाओं की ताकत 

लगभग 13 लाख सैन्य ताकत वाली भारतीय थल सेना के पास करीब 4,426 युद्धक टैंक हैं. इसके अलावा बख़्तर-बंद वाहनों की संख्या 6,704 हैं. स्वचलित तोपों की संख्या 290 और मैन्युअल तोपों की संख्या 7,414 है. वहीं रॉकेट प्रोजेक्टर की संख्या 29 है.

भारतीय वायुसेना के पास करीब 676 लड़ाकू विमान, 809 हमलावर विमान, 857 मालवाहक विमान और 323 ट्रेनर एयरक्राफ्ट हैं. वहीं टोटल सैन्य हेलीकॉप्टरों की संख्या 666 है. वहीं हमलावर हेलिकॉप्टरों की संख्या 16 है.

बात करें भारतीय नौसेना की तो उनके पास करीब 295 जहाज हैं. वहीं 3 विमान वाहक पोत के साथ- साथ 14 युद्ध पोत, 11 विध्वंसक, 23 लड़ाकू जलपोत और 15 पनडुब्बी शामिल हैं.

चीन

चीन की पीपल्स लिब्रेशन आर्मी में कुल 2,300,000 सैनिक हैं. चीनी आर्मी में यु्द्ध टैंको की संख्या लगभग 6,457 है. इसके अलावा बख़्तर- बंद वाहनों की संख्या 4,788  है. स्वचलित तोपों की संख्या 1,710 है और मैन्युअल तोप 6,264 हैं. वहीं रॉकेट प्रोजेक्टर की संख्या 1770 है.

चीन के वायु सेना के पास लड़ाकू विमान 1,271, हमलावर विमान 1,385, ट्रांसपोटर्स 782, ट्रेनर एयरक्राफ्ट की संख्या 352 है. वहीं टोटल हेलीकॉप्टर की संख्या 912 और हमलावर हेलीकॉप्टर 206 हैं.

चीन की नौसेना में 714 जहाज हैं. वहीं विमान वाहक पोत 1, युद्ध पोत 51, विध्वंसक 35, लड़ाकू जलपोत 35, पनडुब्बी 68, पेट्रोल क्राफ्ट 220 और युद्ध पोत जहाज 31 हैं.

पाकिस्तान 

इसमें कुल कर्मी 6,20,000 है. इसमें यु्द्ध टैंक की संख्या 2,924 है. बख़्तर- बंद वाहन 2,828 है. वहीं स्वचलित तोपों की संख्या 465 और मैन्युअल तोप 3,278 हैं. वहीं रॉकेट प्रोजेक्टर की संख्या 134 है.

पाकिस्तान के पास लड़ाकू विमान 301, हमलावर विमान 394, ट्रांसपोटर्स 261, ट्रेनर एयरक्राफ्ट की संख्या 190 है. वहीं टोटल हेलीकॉप्टर की संख्या 316 है. वहीं हमलावर हेलीकॉप्टर 52 हैं.

पाकिस्तान की नौसेना में 197 जहाज हैं. वहीं विमान वाहक पोत 0, युद्ध पोत 10, विध्वंसक 0, लड़ाकू जलपोत 0, पनडुब्बी 8, पेट्रोल क्राफ्ट 17 और युद्ध पोत जहाज 3 हैं.

तुलनात्म


क अध्ययन

तुलनात्मक तौर पर भारत, पाकिस्तान से मजबूत और चीन के समक्ष जरूर कमजोर लगता है. इस तरह देखा जाए तो भारत को पाकिस्तान के बजाय चीन से मुक़ाबला करने के लिए खुद को तैयार करना होगा. इन सभी आकड़ों के बीच भारतीय सेना चीन से सिर्फ एक एडवांटेज लेती हुई दिखती है और वो ये है कि चीनी सेना ने वियतनाम युद्ध के बाद किसी युद्ध में भाग नहीं लिया है. जबकि भारतीय सेना पाकिस्तानी सीमा पर अघोषित युद्ध से हमेशा संघर्ष रत ही रहती है, वहीं कश्मीर में भी भारतीय सेना को आतंकियों से मुक़ाबला करने की अच्छी समझ है. वहीं चीनी सेना हिमालयी सरहदों में युद्द लड़ने में इतनी काबिलियत नहीं रखती  है कि वह भारत का मुकाबला कर सके. इसके अलावा भारत और चीन बॉर्डर की भौगोलिक स्थिति भारत के पक्ष में है.  बात करें नौ सेना की तो हिंद महासागर में भारतीय नौ सेना काफी मजबूत है. भारतीय नौसेना बड़ी आसानी सेमोदी सरकार में आखिर कितनी ताकतवर हुई भारतीय सेना , जब चाहे मध्यपूर्व और अफ्रीका के साथ चीन के रास्ते को सील कर सकती है.