भारत में सभी राजनीतिक पार्टियां खुद को सेक्युलर बताने में हमेशा अगली पंक्ती में खड़ी मिलेंगी. लेकिन समाज में जमीनी स्तर पर धर्मनिरपेक्षता की रस को बिखेरने में इनले सारे प्रयासों में वोटिया(वोट) वायरस लग जाता है. इसी का नतीजा है कि आजादी के इतने सालों बाद भी देश के दलितों का किसी न किसी बहाने दोहन हो रहा है, चाहे दलित को शादी में घोड़ी पर न चढ़ने देना या उन्हें मैला पिला देना. इन सारी हरकतों को अज्ञानता मानना मुर्खता होगी, दलितों के साथ होने वाले अत्याचार के पीछे किसी ना किसी शैतान समझदार का हाथ ही इन घटनाओं को जन्म देता है. ऐसी ही एक घटना गुजरात के मेहसाणा जिले में घटी है, जहां एक गांव में दलित व्यक्ति के अपनी शादी में घोड़ी पर बैठने का खामियाजा पूरे समुदाय को भुगतना पड़ा है. पूरे गांव ने अनुसूचित जाति (एससी) के लोगों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया है.

दलित दुल्हा(फोटो सोर्स गूगल)

बहिष्कार का मामला क्या है?

पुलिस के अनुसार मेहसाणा जिले के कड़ी तालुका के लोर गांव के उच्च जाति के लोग दूल्हे के घोड़ी चढ़ने से खुश नहीं थे. गांव के सरपंच वीनूजी ठाकोर ने गांव के अन्य नेताओं के साथ फरमान जारी कर गांववालों को दलित समुदाय के लोगों का बहिष्कार करने को कहा.  इस मामले में पुलिस ने बताया कि सरपंच को गिरफ्तार कर लिया गया है, ये मामला मंगलवार का है. पुलिस उपाधीक्षक मंजीत वंजारा ने बताया कि सात मई को मेहुल परमार की बारात गांव से गुजर रही थी. चूंकि परमार दलित जाति से है इसलिए गांव के कुछ नेताओं ने इस पर आपत्ति की और समुदाय के लोगों को अपनी हद पार नहीं करने की चेतावनी दी. उन्होंने बताया कि अगले दिन गांव के कुछ प्रमुख ग्रामीणों ने दलितों के सामाजिक बहिष्कार की घोषणा की. इसके अलावा समुदाय के लोगों से बात करने या उनके साथ किसी तरह का मेलजोल रखने वालों पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाये जाने की भी घोषणा की गयी थी.

मंजीत वंजारा गुरुवार को दलित ग्रामीणों द्वारा फोन किए जाने के बाद गांव पहुंची थीं. उन्होंने बताया कि गांव के सरपंच वीनूजी ठाकोर की गिरफ्तारी के अलावा चार अन्य लोगो के खिलाफ भी अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार रोकथाम अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं.

पत्रकारों से बात करते हुए मेहुल परमार ने कहा कि बहिष्कार के आह्वान के बाद दुकानदारों ने उन्हें दूध या अन्य जरूरी घरेलू सामान तक बेचने से मना कर दिया था. मेहुल ने कहा, ‘जब मैं घोड़ी चढ़ा तो कुछ ग्रामीणों ने मुझे इस तरह से बारात नहीं निकालने को कहा था. आज सुबह जब हमें सामाजिक बहिष्कार का पता चला तो हमने पुलिस की मदद मांगी. सुबह चाय बनाने के लिए किसी ने हमें दूध तक नहीं दिया.

दलित दूल्हे के पिता ने क्या कहा?

दूल्हे के पिता मनुभाई परमार ने इस मामले पर पांच लोगो के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है. मनुभाई ने पुलिस को बताया कि उनके छोटे बेटे मेहुल की शादी में उसे घोड़ी पर बैठाया गया था जिससे गांव के सरपंच और अन्य लोग खासा नाराज हो गए. शादी के दूसरे दिन सरपंच वीनूजी ठाकोर और उप-सरपंच बलदेव ठाकोर ने लोगों को मंदिर में इकट्ठा किया और दलितों का सामाजिक बहिष्कार करने का ऐलान किया. उन्होंने बताया कि इस बहिष्कार के तहत गांववाले मेहसाणा में रहने वाले किसी भी दलित को खाना और पानी के लिए मदद नहीं देंगे. गाड़ियों पर बैठने पर भी रोक लगा दी गई है. सरपंच ने फरमान सुनाया कि अगर कोई ग्रामीण दलितों की मदद करता है तो उन्हें पांच हजार जुर्माना भरना पड़ेगा और उसे भी गांव से निकाल दिया जाएगा.

गांव के सरपंच और उप-सरपंच के अलावा भोपा ठाकुर, मनु बोरात और गाबा ठाकुर को आरोपी बनाया गया है। उन पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत केस दर्ज हुआ है।

इन सब ताम- झाम के बीच दलित दूल्हे को इंसाफ का इंतजार रहेगा. क्योंकि कार्यवाई तो हमेशा होती है इसके बावजूद भी समाज मे दलितों पर अत्याचार बढ़ना देश में बह रही राजनितिक धारा में जाति जैसै बहाव को जोड़ना ही दलित दोहन का सबसे बड़ा कारण हो सकता है.

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