एक तरफ जहां देश में चुनावी तूफ़ान ने दस्तक देकर राजनीति में हलचल मचा रखी है तो दूसरी तरफ फनी तूफ़ान के कारण पिछले कुछ दिनों में देश को और खासकर उड़ीसा को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। फनी तूफ़ान के कारण उड़ीसा के लगभग 30 लाख घरों में बिजली, इंटरनेट और पानी की समस्या हो गई है  जो इस बात की गवाही है कि फनी तूफान के कारण कितना नुकसान हुआ है। यह तूफान उड़ीसा के बाद अब पश्चिम बंगाल में दस्तक दे चुका है।

ओडिशा में फनी तूफान के बाद का नज़ारा, फोटो सोर्स: गूगल
ओडिशा में फनी तूफान के बाद का नज़ारा, फोटो सोर्स: गूगल

इस तूफान के आने से पहले जिस तरह से भारतीय मौसम विभाग ने सटीक सूचना दी उसकी तारीफ आज दूसरे देश भी कर रहे है। लोग आज तक भारतीय मौसम विभाग के बारे में चुटकुली बनाते थे, कई बार सटीक जानकारी न मिल पाने के चलते बुराई करते आ रहे हैं उनको इस बार यूएन एजेंसी UNISDR की प्रमुख मामी मिजुतोरी की बातें ध्यान से सुनने की जरुरत है।

उन्होंने कहा,

भारतीय मौसम विभाग ने जिस तरह से अचूक सटीकता के साथ फनी के बारे में जानकारी दी। इससे भारत सरकार को प्रभावी इलाको से 12 लाख लोगों को निकालने का मौका मिला। आपदा से निपटने के लिए सभी लोगों को समय मिल गया। भारत की जीरो कैजुअलिटी पॉलिसी से अधिक जनहानि नहीं हुई। भारत ने बहुत अच्छा काम किया है यह सबके लिए एक मिसाल है।

मामी मिजुतोरी की इस बात से तो यही लग रहा है कि भारतीय मौसम विभाग जिस पर हमेशा से सवाल उठते रहते हैं कि विभाग का कोई भी पूर्वनुमान सही नहीं होता है, उस बात को फिलहाल भुला देने की जरूरत है। आज दुनिया में हर देश इसकी तारीफ के पुल बांध रहे हैं।

किसने क्या कहा?

अमेरिका ने अपने बयान में कहा है कि आपदा से कैसे लाखों लोगों को बचाएं यह बात भारत के एक गरीब राज्य से सीखें।फनी ने अपनी तीव्रता से दुनिया को चौका दिया था। पर भारत का ओडिशा पूरी तरह तैयार था। भारत ने इस तूफान के आने से पहले ही 26 लाख लोगों को यह मैसेज भेजा और दिखाया कि इस आपदा से कैसे बचा जा सकता है।

बीबीसी ब्रिटेन ने कहा कि भारत ने दुनिया को संदेश दिया फनी तूफान से होने वाले जनहानि को कैसे रोका जाए। सरकार ने कुछ समय में आपदा से निपटने का तंत्र विकसित किया है।

फनी तूफान के बाद क्या है मंजर?

फनी के कारण ओडिशा में ही नहीं बल्कि बंगाल में भी काफी नुकसान हुआ है। जिस तरह का यह तूफान था उसे कैटेगरी-4 में रखा गया है। तूफानों की कैटेगरी उनकी गति के हिसाब से तय की जाती है। इस बार जो फनी तूफान आया था उसकी स्पीड लगभग 209 से 251 किमी/घंटा के आसपास मानी जा रही है। आइए जान लेते है कि अब तक इस फनी तूफान ने क्या-क्या नुकसान किया है।

ओडिशा में राहत कार्य, फोटो सोर्स: गूगल
ओडिशा में राहत कार्य, फोटो सोर्स: गूगल

फनी तूफान ने सबसे ज्यादा 10 हज़ार गांवो, 52 शहरों और कस्बों को नुकसान पहुंचाया है। 30 लाख घरों में बिजली नहीं है तो वहीं 10 हज़ार बिजली के खंबे और फोन टॉवर उखड़ गए हैं। 10 हज़ार गांवो में इंटरनेट नेटवर्क नहीं है। 250 से ज्यादा ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। लेकिन भुवनेश्वर एयरपोर्ट सेवाएं शुरु कर दी गई है। फनी तूफान कितना भयानक था इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि यह पिछले 43 साल में गर्मियों में आया सबसे खतरनाक तूफान है। 1999 में आए तूफान में लगभग 15 हज़ार लोगों की जान चली गई थी। तब की घटना से सबक लेकर इस बार पहले से ही जबरदस्त तैयारियां कर ली गई थीं।

राहत कार्य में क्या हुआ अभी तक?

ओडिशा में फनी तूफान के दस्तक देने से पहले ही 80 लाख लोगों को मैसेज भेजकर चेता दिया गया था। लेकिन राहत कार्य के लिए मौसम विभाग ने कहा है कि हमारा काम पिछली 27 तारीख से अभी तक नहीं रुका है। 45 हज़ार स्वंयसेवियों के साथ 100 अफसर इस राहत कार्य के लिए काम कर रहे हैं। 100 अफसर 9 दिन से एक ही दफ्तर में रोज 20-20 घंटे तक काम कर रहे हैं. जबकि इन अफसरों के खुद के घर तूफान में टूटे हुए हैं लेकिन उसके बावजूद भी ये राहत कार्य में जुटे हुए हैं।

फोटो सोर्स: गूगल
फोटो सोर्स: गूगल

अभी तक जिन 30 लाख घरों में बिजली कटी थी उनमें से लगभग 10 लाख घरों में बिजली की व्यवस्था कर दी गई है। पुरी और खुर्दा को छोड़कर बाकी के प्रभावित जिलों में बीएसएनएल और एक-दो निजी मोबाइल कंपनियों की सेवाएं बहाल कर दी गई हैं। राहत कार्य में अभी तक 65 अलग-अलग विभागों की टीमें लगी हुई हैं। 12 लाख लोगों के लिए 5000 रसोईघरों और 4000 शेल्टर्स का इंतजाम किया गया है।

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