आज पूरा दिन सभी टीवी चैनलों पर केवल एक ही खबर ने सबका ध्यान अपने तरफ खींच रखा था, कठुआ मामला। यह मामला न सिर्फ मीडिया हाऊस के बीच बल्कि देश की जनता के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ था। सबको इसी बात का इंतजार था कि इस मामले में आरोपियों को अदालत क्या सजा सुनाएगी? क्योंकि पिछले साल फरवरी में इस घटना ने पूरे भारत को झकझोर कर रख दिया था। यहां तक कि इस घटना के बाद कुछ लोग तो आरोपियो के सपोर्ट में आ खड़े हुए थे। इस मामले में अब फैसला आ गया है और आरोपियों को सज़ा भी हो गई है। मामले में तीन को उम्रकैद की सजा हुई है जबकि तीन अन्य को पांच साल की सजा हुई है। एक को नाबालिग पाया गया जिसके बाद उसे बरी कर दिया गया है।

किस पर क्या था आरोप और क्या मिली सजा?

इस मामले में पहले 8 लोगों की गिरफ्तारी हुई। लेकिन सांजी राम के भांजे को बरी कर दिया गया था। उस पर अभी भी कश्मीर हाई कोर्ट में एक केस चल रहा है। बाकि बचे 7 लोगों को पठानकोट कोर्ट ने दोषी करार दिया था। सांजी राम का बेटा विशाल जंगोत्रा भी आरोपी था लेकिन अदालत ने उसे बरी कर दिया।

सांजी राम,मुख्य आरोपी, फोटो सोर्स: गूगल
मुख्य आरोपी सांजी राम, फोटो सोर्स- गूगल

जिन 6 लोगों को अदालत ने सजा सुनाई है उनमें सांजी राम, परवेश, दीपक खजुरिया को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। सब इंस्पेटर तिलक राज, सब इंस्पेरक्टर आनंद दत्ता और पुलिस ऑफीसर सुरेन्द्र कुमार को पांच-पांच साल की सजा हुई है।

मुख्य आरोपी सांजी राम के ऊपर आरोप था कि उसने ही इस पूरी घटना को अंजाम दिया। सांजी राम पर आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 376 (रेप), 328 (अपराध करने के आशय से जहर या नशीला पदार्थ खिलाना), 343 (तीन या उससे अधिक दिनों के लिए बंदी बनाए रखना) लगाई गई हैं। बाकि इस मामले में तीनों पुलिसकर्मियों को आईपीसी की धारा 201 (सबूत मिटाना) का दोषी करार दिया गया है।

दीपक खुजरिया, फोटो सोर्स: गूगल
दीपक खजुरिया, फोटो सोर्स- गूगल

सांजी राम ने स्पेशल पुलिस ऑफिसर दीपक खजुरिया के साथ मिल कर इस पूरे क्राइम की साजिश रची थी। प्रवेश, सांजी राम के भांजे का दोस्त था। बच्ची को बहलाकर मंदिर तक ले जाने और उसे नशीली दवा खिलाने का काम उसी का था। सब इंस्पेटर तिलक राज, सब इंस्पेरक्टर आनंद दत्ता और पुलिस ऑफीसर सुरेन्द्र कुमार पर आरोप मिटाने का आरोप था इसलिए उन्हें भी 5-5 साल की सजा सुनाई गई है।

17 महीने बाद आए इस फैसले का सभी को इंतज़ार था। कठुआ गैंगरेप के बाद कश्मीर में जिस तरह से विवाद शुरु हुआ था उस पर कहीं न कहीं पूर्ण विराम अब जाकर लगा है। इस मामले में फैसला आना उन तमाम लोगों के गाल पर तमाचा मारने जैसा है जो इस घटना में आरोपियों का साथ देने के लिए आगे आकर जगह-जगह पर धरना प्रदर्शन कर रहे थे।

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