लोकसभा के पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल को संपन्न हुआ. जिसमें लगभग सभी मतदताओं ने अपने विवेक से अपने मताधिकार का प्रयोग किया. और जिन्होंने वोट नहीं दिया वो चुनाव परिणाम के बाद नेताओं को कौन-सी गाली दी जाए उसी पर ज्ञान बटोरने में व्यस्त होंगे. पर दुनिया की सबसे छोटी महिला ने वोट करके बता दिया कि उसके लिए उसका वोट कितना जरुरी है.

फोटो सोर्स- गूगल

गिनिज वर्ल्ड बुक में अपना नाम दर्ज़ कराने वाली दुनिया की सबसे छोटी महिला ज्योति आमगे ने नागपुर के एक मतदान केंद्र पर वोट दिया. ज्योति की लंबाई महज 63 सेंटीमीटर है. जब ज्योति वोट डालने गई तब लोग उसे अचरज भरी निगाह से देख रहे थे. ज्योति अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए धैर्य के साथ कतार में खड़ी हुईं. वोट डालने के बाद उंगली की स्याही दिखाते हुए ज्योति ने कहा- मैं सभी लोगों से अपील करती हूँ, कृपया करके सभी लोग वोट डालने के बाद ही कोई और काम करे.

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ज्योति एक कुक और उद्यमी हैं. वह बिग बॉस-6 शो में भी हिस्सा ले चुकी हैं. ज्योति अमेरिका और इटैलियन टीवी सीरीज में भी काम कर चुकी हैं. ज्योति ने जिस बूथ पर मतदान किया वहां से केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी लोकसभा के उम्मीदवार हैं.

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से कई वोटर्स हैं जो अपनी उम्र की परवाह किये बगैर वोट डालने जाते हैं और देश के युवा वोटर्स को वोट की अहमियत का एहसास दिलाते हैं. श्याम शरण नेगी जो कि देश के सबसे उम्रदराज वोटर हैं, जिन्हें देश के पहले वोटर के रुप में जाना जाता है. श्याम शरण जी की उम्र 102 वर्ष है.

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श्याम शरण नेगी मतदान को लेकर बहुत ही जागरुक है और वो 1951 के पहले लोकसभा चुनाव से लगातार अपने वोट डालने के अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं. देश में ऐसे कई वोटर्स है जो किसी न किसी प्रकार से वोर्टस के लिए प्रेरणा के स्रोत है जो हालात कैसे भी मतदान जरुर करते है. और युवाओं को , संदेश देते है कि लोकतंत्र के लिए मतदान कितना जरुरी है. इसलिए दिल खोल के अपने मताधिकार का प्रयोग किजीए. क्योंकि हर वोट जरूरी होता है। वोट देना सबका अधिकार है।

श्याम शरण नेगी की ही तरह सिक्किम में भी सबसे उम्रदराज़ महिला सुमित्रा राय ने वोट किया है. 107 साल की सुमित्रा राय व्हीलचेयर पर बैठ कर बूथ तक पहुंची. दक्षिणी सिक्किम के पोकलोक, कामरांग में सुमित्रा राय जब वोट करने पहुंची तो मीडिया के सारे कैमरे उनकी ओर घूमे हुए थे.

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जहाँ एक ओर देश के युवा वोट को महज एक खानापूर्ति वाले काम की तरह देख कर कई बार वोट करने से कतराते हैं. वहीं ऐसे उम्रदराज वोटर्स, वोट के अधिकार का प्रयोग करने के लिए प्रेरित करते हैं. बदलाव की संभावना एक वोट पर भी निर्भर करती है. ये जागरूक उम्रदराज वोटर्स इस बात को पुख्ता करते हैं.

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