किसी मशहुर लेखक ने कहा है आवश्कता आविष्कार की जननी है। लेकिन भारत में यह शायद लागू नहीं होता। क्योंकि भारत में आविष्कार नहीं किया जाता है यहां जुगाड़ लगाया जाता है। जैसे बंगाल के तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने किया है। इन्होंने चुनाव प्रचार करने की एक अलग तरकीब खोज निकाली है। अब धूप से भी बचना है और चुनाव भी जीतना है। दोनों काम एक साथ तो नहीं हो पाएगा इसलिए अभीषेक बनर्जी ने अपने लोकसभा क्षेत्र में खुद ना जाकर अपने पुतले को पुलिस की गाड़ी में ऱखकर इलाके भर में घूमावाया।

पुलिस की गाड़ी के साथ कुछ कार्यकर्ता भी थे। जो नारे तो लगा रहे थे लेकिन अभीषेक बनर्जी के समर्थन में या पुतले के समर्थन इसका कुछ पता नहीं। गाड़ी पर माला पहनाया हुआ और हाथ जोड़े हुए उनका पुतला था जो उनका प्रतिनिधित्व कर रहा था। इस क्रांतिकारी काम के बाद अभीषेक बनर्जी की चर्चा पूरे देश में हो रही है। आखिर भाईसाहब ममता बनर्जी के भतीजे जो ठहरे। लेकिन इस घटना के बाद एक बात तो सामने आ ही गई है कि अगर वोट मांगने की मजबूरी नहीं होती तो ये कर्मठ नेता कभी धूप में नहीं निकलते। मजबूरी इसलिए क्योंकि कुर्सी पाने की लालच जो है। अब किसको एसी का मजा लेना पसन्द नहीं है।

इस अतरंगी चुनाव प्रचार को सोशल मीडिया पर भी काफी अलग-अलग तरह के रिएक्शन मिल रहे हैं। ट्वीटर पर इनकी वीडियों को लेकर कोई कुछ तो कोई कुछ जवाब दे रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि यह जरुर ममता बनर्जी का आइडिया रहा होगा। वहीं एक शख्स ने तो हद कर दी उसने ट्वीटर पर लिखा खैरियत रही कि पुतले के ऊपर इसने छाता नहीं लगवा लिया।

हालांकि अभी तक अभीषेक बनर्जी के तरफ से इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।ममता बनर्जी का भी इस बारे में जवाब आने का सभी लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। लेकिन एक बात तो तय है कि जो नेता धूप में निकाल कर वोट मांगने नहीं जा पा रहा है वो जीत जाने के बाद क्या खाक जनता के बीच उनकी समस्या हल करने जाएगा। बाकी जनता समझदार तो हइय्ये है।

खैर, यह बात तो है कि गर्मी का मौसम है। धूप तो ऐसे है जैसे मानो शरीर ही जल जाए क्योंकि मौसम का तापमान 37 डिग्री से भी उपर है। लेकिन चुनावी तापमान के आगे ये मौसम भी फिका पड़ता दिख रहा है। देश में जिस तरह से चुनावी मौसम समय-समय पर बदल रहा है। उसमें कई तस्वीरे सामने आ रही है। इस बार के चुनाव में पार्टी से लेकर नेताओं के भी कई रुप देखने को मिल रहे हैं। माहौल ही कुछ ऐसा बन चुका है। मतदान के तीन चरण समाप्त हो चुके है जिसमें लगभग 308 नेताओं के भाग्य का फैसला ईवीएम में कैद चुका है।

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