महुआ मोइत्रा, तृणमूल कांग्रेस की नई-नई सांसद बनी हैं. जिन्होंने अपने पहले ही संसदीय भाषण में खासा सुर्खियां बटोरी थी. फांसीवाद के सात चिन्ह विषय पर दिए गए अपने भाषण में उन्होंने मोदी सरकार को जमकर लताड़ा था. उन्होंने सरकार पर देश को फांसीवाद की ओर ले जाने का आरोप लगाया था. साथ ही दावा किया थी कि राष्ट्रवाद के नाम पर देश को बांटा जा रहा है.

उनका ये भाषण सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से वायरल हुआ था. इसी भाषण को लेकर उन पर आरोप लगे थे कि उनका ये भाषण चोरी का था. लोगों का कहना था कि महुआ मोइत्रा का भाषण उनका निजी भाषण नहीं है. बल्कि कहीं से कॉपी पेस्ट किया गया है.

इस विवाद के बाद मीडिया का एक तबका हाथ धोकर महुआ मोइत्रा के पीछे पड़ गया था. जिसमें सबसे बड़ा नाम ज़ी न्यूज़ का था. ज़ी न्यूज़ के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी ने बकायदा ट्वीट करते हुए महुआ मोइत्रा पर आरोप लगाया था कि उन्होंने वाशिंगटन मंथली में लिखे मार्टिन लॉंगमैन के आर्टिकल को चुराकर संसद में अपने भाषण में इस्तेमाल किया था.जिससे संसद की गरीमा को खतरा पहुंचा है. सुधीर चौधरी यहीं नहीं रुके उन्होंने बकायदा अपने पापुलर शो ‘DNA’ में इसको लेकर प्रोग्राम किया. जिसकी हैडिंग थी,

‘देखें, महुआ मोइत्रा के भाषण का DNA टेस्ट. भाषण को लेकर रिसर्च में आई चौकाने वाली बात.’

इसे ज़ी न्यूज़ के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से ट्विट भी किया गया है. सुधीर चौधरी पत्रकारिता में वो नाम है जो ख़बर करते नहीं बनाते हैं. या यूं कहें की सीधा फैसला सुनाते हैं जैसा कि उन्होंने इसके पहले कन्हैया कुमार में कर चुके हैं. अब वही बात सांसद महुआ मोइत्रा के केस में देखा जा रहा है. वहीं इस पूरे विवाद को लेकर किए गए प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी ज़ी न्यूज़ के रिर्पोटर ने महुआ को फ्रेम करने की कोशिश की थी.

महुआ ने लिया लीगल एक्शन

पिछले कुछ दिनों से चले आ रहे इस मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है। महुआ मोइत्रा ने ज़ी न्यूज़ के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी के खिलाफ़ मानहानी का केस कर दिया है. मोइत्रा के केस के संज्ञान लेते हुए मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट प्रीति परेवा इस मामले की सुनवाई 20 जुलाई को करेंगी. इसी दिन महुआ का बयान भी लिया जाएगा. इसके पहले भी महुआ मोइत्रा ने सुधीर चौधरी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया था जिसे ओम बिरला ने खारिज कर दिया था। यह प्रस्ताव उन्होंने गलत रिपोर्टिंग को लेकर किया था

महुआ मोइत्रा अपनी भाषण को लेकर दे चुकी हैं सफाई?

संंसद में दिए अपने भाषण को लेकर महुआ मोइत्रा ने सफाई भी दिया था। उन्होंने रिर्पोटर को फटकार लगाते हुए कहा कि होलोकास्ट मेमोरियल, बर्लिन (जर्मनी) में जो डॉक्टर लॉरेंस ब्रिज का ’14 सेंस ऑफ फासिज़्म का पोस्टर है. उसमें से 7 सेंस ऑफ फासिज़्म को भारत में कोट करना लीगल है. और मैंने इसी को कोट किया है. इसके बाद महुआ ने कहा कि आप जिस आर्टिकल के आधार पर मुझ पर आरोप लगा रहे हैं. वो इसी होलोकास्ट मेमोरियल के माध्यम से लिखा गया है. जिसे मार्टिन लॉंगमैन ने वाशिंगटन मंथली के लिए लिखे गए आर्टिकल में इस्तेमाल किया था। उन्होंने 14 में से 12 सेंस ऑफ फासिज़्म का इस्तेमाल किया था. क्योंकि अमेरिका में 12 सेंस को इस्तेमाल करने की मंजूरी है. हम दोनों ने इसी पोस्टर को कोट किया है.

इस विवाद के बाद ‘मार्टिन लॉंगमैन’ ने इसका खंडन करते हुए ट्वीट किया है कि

‘मैं भारत में काफी फेमस हो चुका हूं क्योंकि एक नेता पर गलत आरोप लगे हैं कि उन्होंने मेरे लेख से चोरी की है. ये मजेदार बात है. लेकिन दक्षिणपंथी मूर्ख हर देश में एक जैसे ही होते हैं.’

महुआ का विवादों से रहा है खासा लगाव

वैसे आपको बता दें कि सांसद महुआ मोइत्रा का विवादों से नाता बहुत पुराना हैं. सबसे पहले वह विवादों में साल 2015 में आई थीं, जब रिपब्लिक टीवी के एक डीबेट शो में उन्होंने मीडल फिंगर दिखा दिया था. 2017 में उन्होंने बीजेपी सांसद बाबुल सुप्रिया पर मानहानी का मुकदमा दर्ज कराया था. बाबुल सुप्रिया ने एक टीवी बहस के दौरान कहा था कि महुआ, ‘महुआ पीकर बेहोश’ है. जिसने विवाद का रूप धारण कर लिया था. अब इस मामले में भी उन्होेंने सुधीर चौधरी पर केस दर्ज कराया है  जिसकी सुनवाई 20 जुलाई को होना है।