आज 21 जून 2018 है। आज के दिन को हर किसी ने योग दिवस के रूप में मनाया है क्योंकि ऐसा करने से हम अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रहे हैं। जो कि हम 21 जून से हो जाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की देहरादून के योग पोग्राम से लेकर शिकागो तक सब अपने शरीर को कभी झुका रहे हैं कभी उठा रहे हैं। कभी हाथ-पांव इधर धम्म हो जाता है तो कभी इधर।

इतना अच्छा तो हो रहा है फिर भी मेरा पागल दिमाग मुझसे जाने क्यों कह रहा है कि ये योग नहीं है, सिर्फ इसका नाम योग दिवस है।

योग के बारे में कुछ सालों पहलेे मैं भी यही समझता था कि यह सिर्फ शरीर को तोड़ना-मरोड़ना होता है यानि कि वह होता है जो आस्था और संस्कार चैनल पर बाबा रामदेव करके दिखाते हैं और दावा करते हैं कि इससे सारी बीमारी ठीक हो जाती हैं। खैर वो बात छोड़ते हैं अब आते हैं योग पर।

योग ये तोड़-मरोड़ है

योग को जिन्होंने नहीं पढ़ा। वे बस योग को आज के ही दिन के लिये सीमित रख लिया है। वो बात दूसरी है लेकिन क्या सच में योग यही है जो हम आज के दिन पूरी दुनिया में देख रहे हैं। मुझसे कोई पूछे तो मैं नहीं ही कहूंगा क्योंकि मैंने योग को पढ़ा है और अध्यामिक रूप से सुना भी है।

योग के बारे में गलत धारणा रखने वालों को 21 जून को कम से कम योग के बारे में जान लो।

योग के शाब्दिक अर्थ में ही उसका असल मतलब छुपा हुआ है। योग यानि कि जोड़ना, योग यानि कि संतुलन, योग यानि कि साधना। अब इन सारे पहलू पर बात करते हैं। आखिर योग का अर्थ जोड़ना होता है तो उसे कैसे और किससे जोड़ना। तो हाजिर जवाब है मन को अपने तन से जोड़ना, सांसों को शरीर से जोड़ना। हम जब कोई भी शारीरिक क्रिया करते हैं तो उसमें सांसों का बड़ा महत्व है। हम चाहे किसी भी तरह से शरीर को तोड़ लें लेकिन जब तक सांसों को उस क्रिया पर नहीं जोड़ पाये तो वह योग नहीं हो पायेगा, सिर्फ तोड़-मोड़ू क्रिया ही रह जायेगा।

योग संतुलन है

हम अक्सर देख पाते हैं कि कोई योगी या इंसान जो योग करता है वो उल्टा घंटों खड़ा रहता है। वह समाधि की स्थिति में कई दिनों तक रहता है तो वो ऐसा क्यों कर पाते हैं और हम नही तो सीधा-जवाब है, संतुलन। योग संतुलन का नाम है। योग करते वक्त अपनी सांसों पर संतुलन होना चाहिये, अपनी इन्द्रियों पर संतुलन होना चाहिये। अगर यह संतुलन सही हो रहा है तो फर्क नहीं पड़ता कि योग किस स्थिति में हो रहा है। शायद इसलिये तो कहते हैं कि सोते (श्वासन) हुये भी योग हो सकता है।

योग के इन आयामों से कहते हैं कि आप सिर्फ शारीरिक रूप से अच्छे नहीं होते आपका मानसिक, भौतिक और अध्यात्मिक विकास भी होता है।

योग इन सबके अलावा भी बहुत कुछ है यह एकता है, बंधन है। यह बांधता जरूर है लेकिन हमें आजाद रखने के लिये हमारी सोच को विस्तार देेने के लिये। जो हम आज बेहद घटिया सोच में बंध गये हैं उसको योग सही करता है।

फिर ये आसन क्या हैं?

अगर जो मैं बोल रहा हूं वो योग है तो चार अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना चुकी दुनिया अब तक जो रही है वो क्या है? ऐसे सवाल आपके मन में आने चाहिये। अगर नहीं आ रहे हैं तो योग कीजिये, संतुलन वाला न कि वो जो बस हो रहा है। योग जो हम कर रहे हैं या कराने की कोशिश की जा रही है वो दरअसल योग तो बिल्कुल भी नहीं है।
ये सभी योग के आयाम हैं, माध्यम हैं जिनको आसन का नाम दिया है। इनसे वही लाभ होगा जो योग चाहता है आपका शारीरिक, मानसिक विकास हो। इसमें आसन, प्राणायाम और कुछ मुद्रायें होती हैं।


योग के बारे में कहा जाता है कि ये हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में हमेशा से था लेकिन इसके बारे में किसी ने बताया नहीं। फिर एक व्यक्ति ने पूरा योग शूस्त्र दे दिया। महर्षि पतंजलि ने योग के बारे में पूरी तरह से व्याख्या की है और उसका निचोड़ बताने की कोशिश की है। पतंजलि ने योग के बारे में कहा है।

पतंजलि के अनुसार योग की परिभाषा-
“योगश्चित्तवृतिनिरोधः” अर्थात चित्त की वृतियों का निरोध ही योग कहलाता है।”

योग के बारे में कई और लोगों ने भी अपनी बात रखी है। लेकिन मैं उनके बारे में बात नहीं करूंगा। मैं तो वो बात करूंगा जो मैंने गहराई से समझा है। मैं कोई योगी नहीं बस योग के बारे में पढ़-सुन बहुत लिया है। जैसा मैंने कहा कि योग हमारी रोजमर्रा की जिंदगी मे है। इसमें भक्ति योग है, ज्ञान योग है, कर्म योग है, हठ योग है और भी हैं।

कर्म योग मुझे सबसे अधिक भाता है। मुझे लगता है कि सबको इसके बारे में जानना चाहिये। कर्म से कोई नहीं बच सकता, इसलिये सबको अच्छे कर्म करते रहना चाहिये। क्योंकि आपके काम से ही आपका भविष्य निर्धारित होगा। गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि कर्म करते रहो, फल की चिंता करो। तुमको अपने कर्म के का फल यही भुगतना पड़ेगा।

बस यही कर्म है कि हम अपना कर्म करते रहे। एक स्टूडेंट का कर्म है कि वह अच्छे से पढ़ाई करे, प्रधानमंत्री का कर्म है कि वह देश सही से चलायें। बस इसी तरह से सबका कुछ न कुछ काम डिसाइड है।

आज पूरी दुनिया ने योग अच्छे से किया है। फेसबुक और व्हाट्सएप्प भी योग की फोटोज और सेल्फियों से पट गया है। ये सब बहुत अच्छा हुआ लेकिन मैं फिर भी यही कहना चाहूंगा कि ये जो सब कर रहे हैं वो योग तो बिल्कुल भी नहीं है।

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