एक 4 साल की लड़की, जिसे बहुत देर तक सोना अच्छा लगता था। एक लड़की जिसे भरतनाट्यम सीखने की ज़िद थी लेकिन, टाइम पास करने के लिए क्रिकेट के मैदान पर जाया करती थी। पिता को लगा कि शायद भाई के साथ मैदान पर जाने से उसका आलस्य दूर हो जाएगा। लेकिन, भाई को क्रिकेट की प्रैक्टिस कराते-कराते वह कब क्रिकेट से जुड़़ती चली गई , उसे खुद भी पता नहीं चला। आज वही लड़की भारत की सबसे सफल बल्लेबाज होने के साथ-साथ सबसे सफल महिला क्रिकेट कप्तान भी है। वह लड़की हैं मिताली राज

हमेशा की तरह एक सुबह आंखों में नींद और मन में भरतनाट्यम का सपना लिए मिताली क्रिकेट ग्राउंड पर पहुंची। उस वक्त उनके कोच ज्योति प्रसाद उन्हें सिर्फ़ पत्थर से प्रैक्टिस कराते थे। चोट भी लगती थी। एक हाथ को पीठ पर बांधकर दूसरे हाथ से बैटिंग कर रही थी। फिल्डिंग करते वक्त अगर कोई बॉल उनके पास आ जाती तो, आधे अधूरे मन से बॉल वापस फेंकती थी। बोर होने पर अगर किसी को खाली देखती तो कहती थीं, बॉल फेंको मैं शॉट खेलूंगी। उन्हें बैटिंग करते हुए उनके कोच दूर से ही देख रहे थे। उन्होंने मिताली के पिता से कहा कि बच्ची के अंदर बहुत टैलेंट है। इस पर ध्यान दीजिए और संपथ कुमार नायडू से कोचिंग दिलवाइए।Image

फिर क्या था मिताली संपथ कुमार के पास कोचिंग के लिए चली गईं। संपथ कुमार नायडू उस वक्त के सबसे कड़क और मुश्किल कोच थे। मिताली की प्रैक्टिस के दौरान कई बार वे उसे एक स्टंप से बल्लेबाजी करने के लिए कहते थे और बॉल मिस होने पर खूब डांटते थे। लड़कों के साथ भी प्रैक्टिस करनी पड़ती थी और वे तेज गेंदें डालते थे। कैच प्रैक्टिस करते समय यदि मिताली जरा भी लापरवाही करती थी तो संपथ उन्हें पत्थर से कैच प्रैक्टिस करवाते थे।Image

मिताली के पिता अपनी सर्विस के दौरान एयरफोर्स और आंध्रा बैंक के लिए क्रिकेट खेल चुके थे। इसलिए उन्होंने भी मिताली के टैलेंट को पहचाना। प्रैक्टिस के दो साल बाद ही जब मिताली लगभग 12 साल की थी, तो लीग मैच खेलना शुरु कर दी थी।  7 साल तक लगातार अच्छा खेलती रही और फिर साल 1999 में पहली बार उन्हें भारतीय टीम में खेलने का मौका मिला। मैच मिल्टन कीनेस में था। आयरलैंड के खिलाफ अपने पहले ही मैच में मिताली ने शतक ठोक दिया। नाबाद 114 रनों की पारी खेलने के बाद उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट में सनसनी मचा दी। उन्हें जल्द ही टेस्ट टीम में जगह मिली। साल 2001-2002 में इंग्लैंड की टीम जब भारत आई तो, लखनऊ में मिताली को पहला मैच खेलने का मौका मिला। लेकिन, वह शून्य पर आउट हो गई।Image

चार साल बाद जब भारतीय टीम इंग्लैंड दौरे पर गई  तो, उस टीम का हिस्सा मिताली थी। उस दौरे में खेले गए एक मैच में उन्होंने 214 रनों की पारी खेली, जो अभी तक किसी भी महिला प्लेयर द्वारा बनाया गया दूसरा सबसे बड़ा स्कोर है। देखते ही देखते मिताली भारत में  ही नहीं बल्कि, पूरे विश्व में एक अलग ही मुकाम पर पहुंच गईं। एक ऐसा मुकाम जहां पहुंचने की कोशिश तो सभी करते हैं लेकिन, पहुंचता कोई-कोई है।

साल 2005 में जब मिताली को भारतीय टीम की कमान सौंपी गई लेकिन, उसके पहले ही साल 2003 में उन्हें अर्जुना अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका था। उनके हाथों में जब टीम की बागडोर मिली तो, भारतीय टीम विश्व कप के फाइनल तक का सफर तय करने में कामयाब रही। साल 2006 में भारतीय टीम जब इंग्लैंड दौरे पर थी तो, टेस्ट सीरीज में 1-0 से हासिल की गई जीत ने खूब वाहवाही बटोरी थी। इसी साल भारत ने उनकी कप्तानी में एशिया कप भी जीता। जैसे-जैसे मिताली का करियर आगे बढ़ता गया मिताली की बैटिंग एक लेवल अप होती गई। तीन साल लगातार यानि साल 2010, साल 2011 और साल 2012 में मिताली महिलाओं की बल्लेबाजी की रैकिंग में पहले पायदान पर रही। Image

साल 2015 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया। इसी साल यानि 2015 में ही मिताली राज पहली भारतीय क्रिकेटर बनीं जिन्हें Wisden Cricketer Of The Year का खिताब मिला। 16 जून 1999 में वनडे में डेब्यू करने वाली मिताली हाल ही में अपने क्रिकेट करियर के 20 साल पूरे कर चुकी हैं। क्रिकेट में इतना लंबा करियर सिर्फ सचिन तेंदुलकर और श्रीलंका के सनत जयसूर्या का है। मिताली वनडे में 200 मैच खेलने वाली एकलौती महिला क्रिकेटर हैं। साथ ही 6000 रन उनके नाम हैं। इतना रन बनाने वाली मिताली पहली महिला क्रिकेटर भी हैं।

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मिताली हमेशा से अपनी फिटनेस को लेकर चर्चा में रहती हैं। 37 साल की हो चुकी मिताली की फिटनेस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह लगातार 109 वनडे मैच खेलने वाली दुनिया की एकलौती महिला प्लेयर हैं। 126 मैचों में कप्तानी कर चुकी मिताली विश्व की पहली महिला कप्तान भी हैं। रन चेज के मामले में तो मिताली धोनी और विराट कोहली से भी आगे हैं। रन चेज करते वक्त मिताली का औसत 111 रहा है जबकि, धोनी का रन औसत 103 और विराट का रन औसत 96 है।

3 दिसंबर 1982 में जोधपुर में जन्म लेने वाली मिताली के ऊपर आज सबको नाज है। मिताली के ऊपर एक हिंदी फिल्म भी बन रही है। जिसका नाम है  ‘शाबाश मिठू’ (Shabaash Mithu) है। फिल्म का डायरेक्शन राहुल ढोलकिया कर रहे हैं। इस फिल्म में मिताली का रोल तापसी पन्नु कर रही हैं।