पता नहीं, लोगों को सनसनी कितनी पसंद है, ब्रेकिंग में क्या मज़ा आता है, फिर चाहे वो किसी की मौत की ही क्यों न हो? कुछ ऐसा ही हुआ था सुषमा स्वराज के निधन के वक्त. औपचारिक ऐलान बाद में हुआ, लेकिन न्यूज चैनलों ने पहले ही सुषमा स्वराज को ‘मारना शुरू कर दिया’ था. सब कुछ केवल यह टीआरपी का खेल था या फिर ‘सबसे तेज’ रहने की होड़. लेकिन, अगर इस तरह के संवेदनशील मुद्दे पर भी मीडिया ‘तमाशा’ करना शुरू कर दे तो यह काफी शर्मनाक है. आज सुष्मा स्वराज की बात इसलिए भी क्योंकि आज उनका बर्थडे है।

देश की पहली महिला विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का पिछले साल ही निधन हो गया था. सुषमा स्वराज नहीं रहीं. लेकिन, सुषमा स्वराज का जाना सिर्फ एक न्यूज़ नहीं था. ये एक ऐसे दौर का जाना था. जिसमें क्या पार्टी, क्या विपक्ष, सबने उनके काम को सराहा. उनके कामों की मिसालें दी गईं. जैसा एक समय में अटल बिहारी वाजपेयी के लिए कहा जाता था कि आदमी तो सहीं हैं पर गलत पार्टी में हैं. ऐसी ही छवि सुषमा स्वराज की भी थी.

लोगों के दिलों पर राज करना अगर किसी नेता को आता था, अगर कोई अपने काम में मानवता को तर्जी देता था, तो वो सुषमा स्वराज थीं. पार्टी के आदर्शों को संभालते हुए विपक्ष पर आक्रमक रहते हुए भी जिसने देश के हर वर्ग, हर नेता से सिर्फ और सिर्फ सम्मान हासिल किया.

यही वजह थी कि 2014 में भारी बहुमत से जीत के आई मोदी सरकार ने उन्हें विदेश मंत्री बनाया. विदेश मंत्री रहते उन्होंने विदेशों में फंसे भारतीयों के लिए जो किया वो किसी से छिपा नहीं है. यही वजह है कि उन्होंने विदेश मंत्री बनते ही ये ट्वीट किया था

‘भारतीय दूतावास उनका घर है जो अपने घर से दूर हैं. जब भी आप किसी मुसीबत में हों, तुरंत भारतीय दूतावास से संपर्क करें. हम हमेशा आपकी मदद के लिए तत्पर हैं.’

इतना ही नहीं उन्होंने अपने कहे को सच भी कर दिया. एक बार किसी शख्स ने सुषमा स्वराज से रात के 3 बजे मदद मांगी. जिसके बाद बकायदा विदेश मंत्रालय ने तुरंत उसकी मदद की. इस घटना ने भारतीय दूतावास को दुनिया के सामने एक नज़ीर की तरह पेश किया. इसके अलावा पाकिस्तान से गीता को वापस लाना हो, चाहे कुलभूषण जाधव मामले को संयुक्त राष्ट्र में उठाना हों, ये सब सुषमा स्वराज के विदेश मंत्री रहते ही मुमकिन हो पाया.

बहुत कम होते हैं जो इस राजनीति रूपी दल-दल में कमल की तरह खिल पाते हैं. सुषमा स्वराज वही कमल थीं. इसी का नतीजा था कि देश के करोड़ों रूपये लूट कर भागने वाले ललित मोदी की मदद करने का आरोप जब सुषमा स्वराज पर लगा, तब भी किसी विपक्षी ने उनसे इस्तीफा देने की मांग नहीं की.

इसी मामले को लेकर जब एक फ्रेंच नेशनल डेली ने जुलाई 2015 में, एक विपक्ष के नेता से पूछा कि आप लोगों ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का इस्तीफा क्यों नहीं मांगा. तब उस नेता का जवाब था, ‘वह हमारे पुराने दोस्तों में से एक हैं.

जब सुषमा स्वराज ने सोनिया गांधी को पीएम बनने से रोक दिया

यह कहानी साल 2004 की है. चुनाव में यूपीए ने एनडीए को हरा दिया था. कांग्रेस ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का फैसला किया था. भाजपा ने इसका जम कर विरोध किया. सुषमा स्वराज ने इस विरोध का नेतृत्व किया. उनका कहना था,

‘संसद सदस्य बनकर अगर संसद में जा कर बैठती हूं तो हर हाल मे मुझे उन्हें माननीय प्रधानमंत्री कह कर संबोधित करना होगा, जो मुझे गवारा नहीं. मेरा राष्ट्रीय सम्मान मुझे झकझोरता है. मुझे इस राष्ट्रीय शर्म में भागीदार नहीं बनना. अगर सोनिया गांधी पीएम बनती हैं तो वो सिर मुंडवा लेंगी, सफेद साड़ी पहनेंगी, भिक्षणी की तरह जमीन पर सोएंगी और सूखे चने खाएंगी.’

इसके बाद सोनिया गांधी ने खुद ये घोषणा कर दी की वो प्रधानमंत्री नहीं बनेंगी. जिस वजह से डॉ मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया गया.

इसके अलावा 2013 में भी सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाने को लेकर उठे सवालों पर भी उनका रूख ऐसा ही था. उन्होंने कहा था, मैंने हमेशा कहा है कि सोनिया गांधी हमारे देश में इंदिरा गांधी की बहु और राजीव गांधी की पत्नी के रूप में आई थीं और इस प्रकार वह हमारे प्यार और स्नेह की हकदार हैं. कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में वह हमारे सम्मान की हकदार हैं, लेकिन अगर प्रधानमंत्री बनना चाहती हैं तो मैं इसके खिलाफ हूं.

सुषमा स्वराज ने इसकी वजह भी बताई थी. उनका कहना था कि हमारा देश लंबे समय तक विदेशी शासन के अंदर गुलाम रहा था. कई लोगों ने इसे आज़ाद कराने के लिए बलिदान दिया था. अगर आज़ादी के इतने साल बाद भी, हम किसी विदेशी को प्रधानमंत्री पद पर बैठाते हैं तो इसका मतलब देश के करोड़ों लोग अक्षम हैं. लोगों में प्रधानमंत्री बनाने या चुनने की क्षमता नहीं है. इससे लोगों की संवेदनशीलता प्रभावित होगी.

विपक्ष का सम्मान, पार्टी का साथ और संसद में सवाल कैसे पूछा जाता है, सुषमा सवराज जाते-जाते हमें ये सब कुछ सिखा के गई हैं. साथ ही हमारे देश में विपक्ष भी सुष्मा स्वराज के किए गए कार्यों पर कभी सवाल नहीं उठाता है। आज पूरा देश सुष्मा स्वराज का 68वां जन्मदिन मना रहा है। इस मौके पर उनके पति ने भी एक प्यारा सा ट्वीट शेयर किया है। उनके पति स्वराज कौशल ने ट्वीट किया,

हैप्पी बर्थडे सुषमा स्वराज- हमारी जिंदगी की खुशी।’ 

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने ट्वीट में कहा कि हम सुषमा स्वराज को याद कर रहे हैं जिनका 14 फरवरी को 68वां जन्मदिन है। विदेश मंत्रालय परिवार को खास तौर पर उनकी कमी खलेगी। उन्होंने कहा,

”यह घोषणा करके खुशी हो रही है कि सरकार ने प्रवासी भारतीय केंद्र का नाम सुषमा स्वराज भवन और विदेश सेवा संस्थान का नाम सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट आफ फारेन सर्विस करने का निर्णय किया है।”

पिछले साल ही 6 अगस्त 2019 को सुषमा स्वराज का देहांत हुआ था। जिसके बाद पक्ष से लेकर विपक्ष तक ने उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। 14 फरवरी, 1952 को अम्बाला छावनी में जन्मी सुषमा स्वराज का नाम आज भी भारतीय इतिहास के पन्नों में एक मजबूत शख्सियत के रुप में दर्ज है।