मेशा से भारत-पाकिस्तान का एक सिंपल मैच भी किसी फाइनल से कम नहीं होता। चाहे दोनों टीमों के प्लेयर्स हो या फिर दर्शक, सब के ऊपर मैच का एक अलग ही प्रेशर होता है। अब तो स्थिति ये है कि भारत-पाकिस्तान का द्विपक्षीय सीरीज देखे अरसे बित गए हैं। लेकिन, एक दौर था 1970-2000 का। इन 30 सालों में भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाले मैच काफी हाई-वोल्टेज मैचों में गिने जाते थे। इस दौर के बाद पाकिस्तान टीम में एक प्लेयर की एंट्री हुई जिन्हें, बाद में ‘रन मशीन’ कहा गया। वह थे यूनुस खान। यूनुस खान पाकिस्तान के एकलौते कप्तान भी हैं जिनकी कप्तानी में पाकिस्तान ने टी-20 वर्ल्ड कप जीता। आज यूनुस खान का 44वां जन्मदिन है।

साल 2000 में जब यूनुस खान ने पाकिस्तान के लिए क्रिकेट खेलना शुरु किया तो, नंबर सात पर बैटिंग करते थे। लगभग चार साल लग गए उन्हें नंबर तीन पर अपने आप को प्रमोट करने मे। इस बीच साल आया 2005। पाकिस्तान की टीम भारत आई थी। तीन टेस्ट मैच और 6 वनडे मैच खेला जाना था। यूनुस खान उस वक्त इंग्लैंड में बल्लेबाजी में धागा खोल कर आए थे और पाकिस्तान ने वनडे सीरीज जीता था। वहीं भारत, श्रीलंका के खिलाफ सीरीज जीत कर पाकिस्तान के खिलाफ उतरने के लिए तैयार था। लेकिन, पहले टेस्ट मैच 1-1 पर ड्रा हुआ और फिर वनडे सीरीज पाकिस्तान ने 4-2 से अपने नाम कर लिया।

फोटो सोर्स: गूगल

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टेस्ट सीरीज में यूनुस खान ने अपनी एक खास पहचान बनाई। दूसरा टेस्ट मैच जो कोलकाता में खेला गया उसमें पहली पारी में यूनुस खान ने शानदार 147 रनों की पारी खेली। कोलकता में लगाया गया टेस्ट शतक उनके लिए आज भी खास है। क्योंकि उनके करियर का भारत के खिलाफ यह पहला शतक था। खास इसलिए भी क्योंकि, यह शतक उस शहर में लगाया गया था जहां से यूनुस खान के पिता आते हैं।  इसके बाद तीसरे टेस्ट मैच में उन्होंने दोहरा शतक जड़ दिया। बंगलौर में लगाया गया यह शतक उन्हें एक अलग पहचान दी। इसी मैच के बाद सौरव गांगुली की कप्तानी पर सवाल खड़े होने लगे और फिर बाद में विवादों के कारण उन्हें अपनी कप्तानी छोड़नी पड़ी।

इस सीरीज के बाद यूनुस खान पाकिस्तान टीम की एक अहम हिस्सा बन गए और मोहम्मद यूसुफ के साथ एक दिवार बन कर पाकिस्तानी टीम के लिए खेलते रहे। जब यूनुस खान अपनी क्रिकेट करियर के अंतिम हिस्से में थे तो, साल 2016 में इंग्लैड दौरे पर पाकिस्तान की टीम गई थी। यूनुस खान के खेल को लेकर कई सारे सवाल खड़ किए जा रहे थे। कई दिग्गज खिलाड़ी उनके खिलाफ स्टेटमेंट दे रहे थे। यूनुस खान को अब संन्यास ले लेना चाहिए। बैटिंग बिल्कुल लचर हो रही है, वगैरह-वगैरह।

यूनुस खान और अजहरुद्दीन, फोटो सोर्स: गूगल

यूनुस खान और अजहरुद्दीन, फोटो सोर्स: गूगल

इंग्लैंड के खिलाफ मैच चल रहा था। यूनुस खान से बॉल छू भी नहीं रही थी। दिन का मैच खत्म हुआ। टीवी पर अजहरुद्दीन मैच देख रहे थे। शाम को उन्होंने फोन किया युनूस खान के पास। बात चित हुई और कुछ टिप्स भी दिया यूनुस खान को। अजहरुद्दीन का कहना था कि क्रीज का इंस्तेमाल करना सीखिए। जैसे बॉलर्स क्रीज का इस्तेमाल करते हैं वैसे, बैट्समैन भी कर सकते हैं। इसी बात को लेकर यूनुस खान तीसरे टेस्ट मैच में उतरे और दोहरा शतक ठोक डाला। जब ‘मैन ऑफ द मैच’ के लिए उनके नाम का ऐलान किया गया तो, यूनुस खान पोडियम पर जाते ही सबसे पहला नाम अजहरुद्दीन का लिया था। फिर उस दोहरे शतक को अजहरुद्दीन को डेडिकेट किया था।
इस तरह से अपनी करियर के अंतिम दिनों में भी दोहरे शतक लगा कर क्रिकेट को अलविदा कहने वाले यूनुस खान आज पाकिस्तान क्रिकेट में एक अलग चैप्टर बन गए। यूनुस खान का खास कर के भारत के खिलाफ शानदार प्रदर्शन रहा है। 9  टेस्ट मैचों में 88 के औसत से पांच शतक उनके नाम हैं। इतना ही नहीं, वे अपने देश की तरफ से टेस्ट क्रिकेट में 10 हजार रन बनाने वाले पहले कप्तान हैं। उनके नाम 34 टेस्ट शतक है जो, किसी भी पाकिस्तानी प्लेयर्स से ज्यादा हैं। अपने पहले ही टेस्ट में शतक लगाने वाले वह पहले पाकिस्तानी प्लेयर्स भी हैं।

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