राष्ट्रपति बनने के बाद अपने फैसलों की वज़ह से डॉनल्ड ट्रंप का विवादों में आना कोई नई बात नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति पद पर बैठते ही ट्रंप ने ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति के लिए पहले से बने-बनाए सभी नियमों में फेर बदल कर दिये।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने देश के संसद में कहा कि अमेरिका, भारत और तुर्की से जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेंज (जीएसपी) कार्यक्रम के लाभार्थी का दर्जा वापस लेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप जब दुनिया के सात बड़े मुस्लिम देशों पर प्रतिबंध लगा रहे थे, तब दुनिया में हो रही इस बड़े राजनीतिक बदलाव को हम महसूस नहीं कर पाए। लेकिन आज जब ट्रंप ने भारत पर यह प्रतिबंध लगाया है तो हम ट्रंप के सनक वाले इस फैसले के असर को समझ सकते हैं।

अमेरिकी फैसले का मायने क्या है?

दरअसल, अमेरिकी कानून के मुताबिक यह बदलाव नोटिफिकेशन जारी होने के 2 महीने बाद लागू हो जाएगा। इसका असर यह होगा कि अमेरिका के जीएसपी कार्यक्रम में शामिल देशों को जो विशेष तरजीह दी जाती है, वह समाप्त हो जाएगी। अमेरिका जीएसपी कार्यक्रम में शामिल देशों पर एक तय राशि के आयात पर शुल्क नहीं लेता है।

इसका साफ अर्थ यह है कि यदि ऐसा हुआ तो इसके तहत भारत को 5.6 अरब डॉलर (40,000 करोड़ रुपए) के एक्सपोर्ट पर मिलने वाली छूट का लाभ नहीं मिलेगा। जीएसपी से बाहर होने पर भारत को हर साल आर्थिक आधार पर काफी ज्यादा नुकसान का सामना करना पड़ेगा।

अमेरिका का क्या कहना है?

अमेरिका का कहना है कि भारत में पाबंदियों की वज़ह से उसे व्यापारिक नुकसान हो रहा है। वह जीएसपी के मापदंड पूरे करने में नाकाम रहा है। यही वज़ह है कि अमेरिका भारत से यह विशेष दर्जा वापस लेने की तैयारी में है। अमेरिका ने अचानक इस मामले में फैसला नहीं लिया है, बल्कि पिछले साल से ही अमेरिका इस मामले में विचार कर रहा है। एक सप्ताह पहले अमेरिका के राष्ट्रपति ने उदाहरण देते हुए कहा था कि अमेरिका से भारत जाने वाली एक बाइक पर भारत 100% टैरिफ वसूलता है, जबकि वहां से आने वाले इसी तरह के सामान पर अमेरिका कोई टैक्स नहीं लेता। उन्होंने कहा कि हम भी भारतीय आयात पर बराबर टैरिफ लगाएंगे।

भारत का क्या कहना है?

अमेरिका के इस फैसले से भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा। लेकिन वाणिज्य सचिव अनूप वधावन ने कहा है कि अमेरिका के साथ हमारे रिश्ते मजबूत हैं। व्यापार से जुड़े मुद्दों पर हम वार्ता कर रहे हैं। हम इस पर मेडिकल समाग्री समझौता नहीं करेंगे। लेकिन जो भी हो अमेरिकी सरकार के इस फैसले का भारतीय व्यपार पर असर पड़ना तय है।

राष्ट्रपति बनने के ठीक बाद अपने कई फैसलों के वज़ह से ट्रंप की देश-विदेश में जमकर आलोचना भी हुई है, लेकिन बावजूद इसके कुछ सोचे समझे बगैर ट्रंप ने अमेरिका की पुरानी सरकारों द्वारा की गई महत्वपूर्ण डील को ठुकराकर अपनी सनक की नीति को लागू करना जारी रखा है।

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